ⓘ प्रदर्शन के मूल्यांकन के तरीकों. प्रदर्शन मूल्यांकन के बहुत से तरीके आविष्कारित है। प्रत्येक तरीका किसी न किसी संस्था के कोई न कोई उद्देश्य के लिए प्रभावी है। य ..

                                     

ⓘ प्रदर्शन के मूल्यांकन के तरीकों

प्रदर्शन मूल्यांकन के बहुत से तरीके आविष्कारित है। प्रत्येक तरीका किसी न किसी संस्था के कोई न कोई उद्देश्य के लिए प्रभावी है। यह तरीके कोई भी संस्था या कर्मचारी के ज़रूरत के आधापर खारिज या स्वीकार किये जाने चाहिए। प्रदर्शन मूल्यांकन के तरीको को दो श्रेणियो मे बाँटा गया है-

  • पारंपरिक तरीके
  • आधुनिक तरीके
                                     

1. पारंपरिक तरीके

  • प्रदर्शन परीक्षण और टिप्पणियाँ - यह ज्ञान और कौशल की परीक्षा के आधापर होता है। यह परीक्षा लिखित हो सकती है या फिर कौशल के वास्तविक प्रस्तुति के आधार पर। इसके लाभ है- परीक्षण वास्तविक प्रदर्शन की तुलना में अधिक उपयोगी हो सकता है। इसके नुकसान है- परीक्षण और प्रबंध की लागत यदि ज़्यादा हो तो परीक्षण को नुकसान भुगतना पड़ सकता है।
  • निबंध विधि - दर निर्धारित करनेवाले इसमें कर्मचारी विवरणा विस्तार इन व्यापक श्रेणीयों में करते है-प्रदर्शन का सग्रम प्रभाव, कर्मचारी क्षमता, मौजूदा क्षमता और प्रदर्शन योग्यता, शक्तियों और कमज़ोरियों और प्रशिक्षण की ज़रूरत। इसके लाभ निम्नलिखित है- कर्मचारी के बारे में जानकारी अंतराल को भरने मे उपयोगी है जिसे संरचित सूची में पाया जाता है। इसके नुकसान है- दर निर्धारित करनेवाले लिखने की कुशलता पर निर्भर करता है, ज़्यादातर इसमे अच्छे लिखने वाले कम होते हैं। वह ज़्यादातर भ्रमित होते है और सफलता हमेशा उनके स्मरणशक्ति पर निर्भर होती है।
  • गोपनीय अभिलेख की विधि - यह तरीका ज़्यादातर सरकारी विभाग में उपयोग होता है, तथापि उद्योग में उपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यहाँ विवरण वार्षिक गोपनीय विवरण के रूप में दिया जाता है। दर निर्धारण निम्नलिखित विषयों पर होता है, उपस्थिति, आत्म-अभिव्यक्ति, एक साथ काम करना, नेतृत्व, पहल, तकनीकी योग्यता, सोचने की क्षमता, मौलिकता और कुशलता आदि। यह प्रणाली बरहद गोपनीय है। मूल्यांकन करने के लिए प्रतिक्रिया केवल एक प्रतिकूल प्रविष्टि के मामले में दी जाती है। नुकसान- मूल्यांकन अत्याधिक व्यक्तिपरक और चालाकी से होती है क्योंकि यह मानव संसाधन के कार्य जैसे पदोन्नति से जुड़ी होती है।
  • दर निर्धारण शल्क - इसमे निर्भता, पहल, उत्पादन, उपस्थिति आदि के आधापर प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। प्रत्यैक पैमाना अति उत्तम प्रदर्शन से लेकर बुरे प्रदर्शन तक सीमित है। कुल संख्यात्मक स्कोर की गणना की जाती है और उसके आधापर निष्कर्ष निकाला जाता है। इसके लाभ है - सरल इस्तमाल, कम लागत, हर प्रकार के काम के निरुपण के लिए उपयुक्त आदि। इसके नुकसान है - दर निर्धारित करने वाले के पक्षपात के कारण निष्कर्ष पर असर पड़ सकता ह।
  • जांच सूची - इसमे कर्मचारियो के विभिन्न लक्षणो को हाँ या ना प्रशनो के रूप में सुचिबद्ध किया जाता है। यहाँ पर दर निर्धरित करने वाला केवल जाँच करता है और मानव संसाधन विभाग इसका असल रूप मे निरुपण करता है। इसके लाभ है - सीमित प्रशिक्षण की ज़रूरत, मानकीकरण की उपस्थिती आदि। इसके नुकसान है - दर निर्धरित करने वाले का पक्षपात, मानव संसाधन विभाग के द्वारा गलत तरीको का इस्तमाल आदि।
  • ज़बरदस्ती चुनाव की विधि - इसमे बयानो को दो या उससे अधिक खंडो मे बाँटा जाता है और दर निर्धारित करनेवाला इसमे सही या गलत दर्शाता है। इसमे ज़बरदस्ती चुनाव करना पड़ता है। इसके लाभ है - ज़बरदस्ती के चुनाव की वजह से निजि झुकाव नहीं रहता। इसके नुक्सान है - बयानो को गलत तरीको से बनाया जा सकता है।
  • बल से वितरण का तरीका - इसमें कर्मचारी दर निर्धारण पैमाने पर एक उच्च बिंदु के आसपास एकत्रित रहते हैं। दर निर्धारित करनेवाला कर्मचारियों को सभी बिंदुओं में बाँटने पर मजबूर रहता है। इसके लाभ है - व्यक्तिगत पूर्वाग्रह का उन्मूलन। इसके नुक्सान है - सामान्य वितरण की धारणा, अवास्तविकता, केंद्रीय प्रवृत्ति की त्रुटीयाँ।
  • आलोचनात्मक घटना विधि - कर्मचारियों के जिस आलोचनात्मक व्यवहर से उनके प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ता है, उस व्यवहापर ध्यान केंद्रित किया जाता है। पर्यवेक्षक समय-समय पर इसे दर्ज करता है। इसके लाभ है - मूल्यांकन वास्तविक व्यवहापर निर्भर करता है, मूल्यांकन विवरण के आधापर होता है, सरल प्रतिक्रिया, अधिनस्थ के प्रगति के आसार अधिक होते हैं। इसके नुकसान है- नकारात्मक घटनाओं को प्राथमिकता मिल सकती है, कुछ घतनाएँ भूली जा सकती है, ज़रूरत से ज़्यादा परिवेक्षण आदि।
  • क्षेत्र की समीक्षा का तरीका - इसमे मूल्यांकन किसी दूसरे कॉर्पोरेट या मानव संसाधन के द्वारा किया जाता है। इसके लाभ है- प्रबंधकीय स्तर के पदोन्नति के लिए उपयोगी है। इसके नुकसान है- असदस्य, कर्मचारियों के काम के महौल से अपरिचित होते है तथा असल व्यवहार का अवलोकन करना संभव नहीं होता।
  • तुलनात्मक मूल्यांकन विधि - यह विभिन्न तरीकों का संग्रह है, जो अन्य सहकर्मियों के साथ प्रदर्शन की तुलना करता है। जो तकनीके आमतौपर इस्तमाल की जाती है, वह है- श्रेणी विधि और जोड़ियों में तुलना की विधि।
  • श्रेणी विधि- वरिष्ठ अपने कार्यकर्ताओं बेहतर से सबसे खराब की श्रेणी में रखते हैं। हालांकि सबसे अच्छा कैसे और क्यों यह इस पद्धति में सविस्तार नहीं करते। यह आसान तरीका है प्रशासन और विवरण करने का।
  • जोड़ियों में तुलना की विधि - इस विधि में जोड़ी के रूप में हर एक कर्म्चारी का मूल्यांकन दूसरे कर्मचारी से होता है। तुलना की गिनती इस सूत्र के आधापर होती है। N x N-1/2
                                     

2. आधुनिक तरीकें

  • उद्येश्यों के द्वारा प्रबंधन का तरीका - इसमें उद्येश्यों के द्वारा प्रबंधन और प्रदर्शन का मूल्यांकन प्रबंधन के उद्येश्य की प्रप्ति के ऊपर होता है। इसमें निम्नलिखित प्रक्रिया होती है
  • कर्मचारी द्वारा प्राप्त लक्ष्यों के साथ वास्तविक लक्ष्यों की तुमलना।
  • नए लक्ष्यों और नई रणनिति की स्थापना जो पिछले वर्ष हासिल नहीं हो पाए।
  • प्रदर्शन मानकों की स्थापना।
  • प्रत्येक अधीनस्थ के लिए लक्ष्यों और वांछित परिणाम की स्थापना।

इसके लाभ है- प्रबंधनीय पद के लिए उपयुक्त। इसके नुकसान है- सभी नौकरियो के लिए उपयुक्त नहीं है, योग्यता वेतन का भुगतान लंबी अवधि लक्ष्यों के बजाय अल्पकालित लक्ष्यों के आधापर होता है।

  • निर्धारव्यवहार क्रम ण मान - प्रभावी और अप्रभावी व्यवहार के बयान अंक निर्धारित करते हैं। लाभ- दर निर्धारण की कमियों को दूर करता है। नुकसान- सबसे दर निर्धारण तकनीक में निहित विक्रितियों से ग्रस्त।
  • ३६० डिग्री प्रतिपुष्टि की विधि - प्रदर्शन विवरण का व्यवस्थित संग्रह। जिसके पास महत्वपुर्ण जानकारी है मुल्यांकन के बारे मे वह मुल्यांक हो सकता है। लाभ- यह तकनिक व्यापक परिप्रेक्षय के लिये उपयोगी है। कई स्त्रोतों से प्रतिक्रिया प्रप्त करना डरावना और धमकी भरा हो सकता है।
  • मूल्यांकन केंद्र - यह तकनीक सबसे पहले अमेरिका में १९४३ में विकसित हुआ। इस केंद्र में प्रबंधक एक साथ आके नौकरी से संबंधित मूल्यांकन करते हैं। लाभ- अत्यधिक विश्वसनीय भविष्य का बेहतर पूर्वानुमान गलत लोगों के काम पर नहीं रखते।
  • लागन लेखांकन विधि - यहाँ प्रदर्शन मौद्रिक रिटर्न से मूल्यांकन किया जाता है। कर्मचारी रखने की लागत और संगठन का फायदा निधारीत प्राप्त करना पड़ता है इसलिए यह लागत और विश्लेषण पर अधिक निर्भर है।
  • मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन - यह मूल्यांकन पिछले के बजाय भविष्य के प्रदर्शन के लिए कर्मचारी क्षमता का आकलन करने के लिए निर्देशित करते हैं। यह मूल्यांकन गहराई से साक्षात्कार, मनोवैज्ञानिक परीक्षण और पर्यवेक्षक के साथ चर्चा और समीक्षा के रूप में किया जाता है। इसमें व्यक्तिगत विशेषताओं पर ज़ोर दिया जाता है।
                                     
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