ⓘ कमलानाथ शर्मा जलविज्ञान, सिंचाई तथा जल-निकास, एवं जल-विद्युत अभियांत्रिकी के अन्तरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, वैदिक ग्रंथों में जलविज्ञान, पर्यावरण आदि विषयों के लेखक, ..

                                     

ⓘ कमलानाथ

कमलानाथ शर्मा जलविज्ञान, सिंचाई तथा जल-निकास, एवं जल-विद्युत अभियांत्रिकी के अन्तरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, वैदिक ग्रंथों में जलविज्ञान, पर्यावरण आदि विषयों के लेखक, साहित्यकार, तथा हिंदी के जानेमाने व्यंग्य लेखक और कहानीकार हैं।

जलविज्ञान, जल-विद्युत अभियांत्रिकी व विश्व खाद्यान्न में उल्लेखनीय योगदान के अतिरिक्त के॰एन॰शर्मा ने वेदों, उपनिषदों आदि वैदिक वाङ्मय में जल, पर्यावरण, पारिस्थितिकी आदि पर भी शोध करके प्रचुरता से लिखा है। हिंदी साहित्य में साठ के दशक से कमलानाथ के नाम से उनके व्यंग्य तथा कहानियां भी देश की विभिन्न पत्रिकाओं में छपते रहे हैं।

अपने कार्यकाल के दौरान आपने विश्व के लगभग सभी देशों की यात्रा की, वहां के सिंचाई, जलनिकास, जलविज्ञान आदि के विकास में योगदान दिया तथा अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं से संबद्ध रहे।

                                     

1. जन्म एवं शिक्षा

मार्च 1946 में जयपुर के प्रतिष्ठित प्रवासी आन्ध्र-परिवार में इनका जन्म हुआ। वे संस्कृत के युग पुरुष कविशिरोमणि भट्ट मथुरानाथ शास्त्री के कनिष्ठ पुत्र एवं सुप्रसिद्ध विद्वान देवर्षि कलानाथ शास्त्री के अनुज हैं। इन्होंने जोधपुर विश्वविद्यालय अब जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के ऍम.बी.ऍम. इंजीनियरिंग कॉलेज से प्रथम श्रेणी में सिविल इंजीनियरिंग में बी॰ई॰ और बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ़ टैक्नॉलोजी एण्ड साइंस BITS, पिलानी से प्रथम श्रेणी में हाइड्रॉलिक स्ट्रक्चर्स में एम॰ई॰ की डिग्री प्राप्त की।

                                     

2. विभिन्न पदों पर सेवा

आप 1969 से 1981 तक मालवीय नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टैक्नोलॉजी, जयपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफ़ेसर रहे।

1981 से 1989 तक आप भारत सरकार के उद्यम ऍनऍचपीसी लिमिटेड में जलविज्ञान और जल संसाधन विभाग के अध्यक्ष के रूप में देश की अनेक बाँध परियोजनाओं के डिज़ाइन, कार्यान्वयन तथा निर्माण से संबद्ध रहे।

आपने 1989 से 2010 तक 110 देशों की सदस्यता वाले इण्टरनैशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज आईसीआईडी के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में सेवायें दीं तथा मार्च 2010 में उक्त अन्तरराष्ट्रीय आयोग के सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए।

सम्प्रति आप जलसम्बन्धी वैदिक ज्ञान को समर्पित" एक्वाविज़्डम” नामक संस्था के चेयरमैन हैं तथा भारत में जलविज्ञान, बाँध एवं जल-विद्युत परियोजनाओं के लिए तकनीकी विशेषज्ञ/ सलाहकार के रूप में सेवायें दे रहे हैं।

                                     

3. सम्मान, फ़ैलोशिप एवं प्रशस्तिपत्र

1. विश्व सिंचाई, जल निकासी तथा बाढ़ प्रबंधन विज्ञान के विकास में उत्कृष्ट नेतृत्व स्थायी योगदान के लिए सैक्रेमेंटो कैलिफ़ोर्निया, अमरीका, 2007) एवं नई दिल्ली भारत, 2009 में अन्तरराष्ट्रीय सम्मान व प्रशस्ति पट्टिकाएं;

2. 18वीं वैश्विक सिंचाई कांग्रेस द्वारा 100 से अधिक राष्ट्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में विश्व खाद्य सुरक्षा और जलविज्ञान में असाधारण योगदान के लिए मॉन्ट्रियल कनाडा में अन्तरराष्ट्रीय सम्मान व प्रशस्ति पट्टिका, 2002;

3. विशेषज्ञ के रूप में विश्वबैंक समर्थित अन्तरराष्ट्रीय कार्यक्रम IPTRID के तहत सिंचाई और जल निकासी प्रौद्योगिकी में अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्किंग के तकनीकी मूल्यांकन के लिए ब्रिटिश काउन्सिल फैलोशिप, ऑक्सफोर्ड इंग्लैण्ड, नीदरलैण्ड और फ़्रांस, मार्च-मई 1993;

4. ऍनऍचपीसी लिमिटेड प्रशासन द्वारा जल संसाधन व जलविज्ञान में उत्कृष्ट एवं असाधारण सेवाओं के लिए प्रशस्ति पत्रों द्वारा सम्मान, 1981 एवं 1989;

5. जल संसाधन अभियांत्रिकी विशेषज्ञ के रूप में कैनेडियन इन्टरनैशनल डेवेलपमेंट एजेंसी CIDA कनाडा के सहयोग से मॉन्ट्रियल और नायग्रा फॉल्स दोनों कनाडा में चमेरा जल विद्युत परियोजना 540 मेगावाट, हिमाचल प्रदेश भारत की समीक्षा और द्विपक्षीय विचार विमर्श के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम के तहत कनाडा में नवम्बर – दिसम्बर 1981 एवं जनवरी से मार्च 1984;

6. जल प्रबंधन में विशेषज्ञ के रूप में फ़ोर्ड फ़ाउण्डेशन फ़ैलोशिप, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस अमरीका, 1976-77 ;

7. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा ‘भारतीय लेखकों द्वारा उत्कृष्ट पुस्तक लेखन कार्यक्रम/योजना’ के अंतर्गत उच्चस्तरीय तकनीकी पुस्तक लेखन हेतु फ़ैलोशिप 1972-75।

                                     

4. विश्वकोशों में सन्दर्भ एवं परिचय

इन्स्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया, लिंक्डइन अमरीका, इण्टरनैशनल बायोग्राफिकल सेंटर इंग्लैण्ड, अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट", राले उत्तरी कैरोलाइना, अमरीका और ऍन्साइक्लोपीडिया ऑफ़ द हिस्ट्री ऑफ़ साइंस, टैक्नोलोजी एंड मेडिसिइन नॉन-वैस्टर्न कल्चर्स आदि द्वारा प्रकाशित विभिन्न परिचय कोशों व" हू इज़ हू” में असाधारण उपलब्धियों के लिए इनके जीवनी सन्दर्भ प्रकाशित हुए हैं।

                                     

5. अन्तरराष्ट्रीय एवं भारतीय तकनीकी संगठनों में योगदान व उपलब्धियां

1. सदस्य, मौसम संशोधन प्रयोगों के लिए राष्ट्रीय समिति, तत्कालीन पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार 1985-1988; सदस्य, भारतीय मानक ब्यूरो की अनुभागीय समिति बी॰डी॰सी॰-46: पी-2 नदी घाटी परियोजनाएं 1986-89; सदस्य, अन्तरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन की आईएसओ समिति 30 1998-2005 व टी.सी. 113 1998-2005;

2. ऑल्टरनेट गवर्नर बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स, विश्व जल परिषद वर्ल्ड वाटर कौंसिल, WWC, 2000-2004;

3. भारतीय जलवैज्ञानिक संस्था IAH में आजीवन फ़ैलो सम्मानित सदस्य तथा भारतीय जल संसाधन संस्था IWRS में कार्यकारिणी समिति सदस्य 2005-2008 व आजीवन सदस्य;

4. विश्व कृषि फोरम WAF कांग्रेस, सैण्ट लुइस, मिसूरी अमरीका, 15-18 मई 2005, में वैश्विक खाद्य समस्या उन्मूलन पर परिचर्चा, टिप्पणियां, व योगदान ;

5. दस विश्व संस्थाओं के" अन्तरराष्ट्रीय जल, खाद्य और पर्यावरण संवाद”DWFE अन्तरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान, श्रीलंका द्वारा संचालित के अंतर्गत सुस्थिर सिंचित कृषि, ग्रामीण विकास, वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता क्षेत्र के नीति संवादों पर अन्य अन्तरराष्ट्रीय संगठनों जैसे खाद्य एवं कृषि संगठन FAO, प्रकृति के लिए विश्वव्यापी फ़ंड World Wide Fund for Nature, WWF, विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO, अन्तरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान IWMI, श्रीलंका, अन्तरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ IUCN, वैश्विक जल भागीदारी Global Water Partnership, GWP, आदि के साथ स्टॉकहोम, रोम, हनोई आदि शहरों में हुए संवादों में प्रतिनिधित्व एवं योगदान 2000-2006;

6. तृतीय विश्व जल फोरम WWF 3, क्योतो, जापान में" एकीकृत जल संसाधन विकास और प्रबंधन” के अंतर्गत सत्र 2-6-1: ‘खाद्य पर्याप्तता और सुरक्षा’ में संयुक्त अध्यक्ष, मार्च 2003;

7. अन्तरराष्ट्रीय संगठनों, सम्मेलनों, विश्व संस्थाओं जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन FAO, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन UNESCO तथा वैश्विक जल भागीदारी Global Water Partnership, GWP, अन्तरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान IWMI, सिंचाई और जल निकासी में प्रौद्योगिकी अनुसंधान हेतु अन्तरराष्ट्रीय कार्यक्रम IPTRID, अन्तरराष्ट्रीय जल संघों की सम्पर्क समिति IWALC, विश्व जल परिषद World Water Council, WWC, अन्तरराष्ट्रीय जल संसाधन संघ IWRA, अन्तरराष्ट्रीय सिंचाई एवं जल निकास आयोग ICID, अन्तरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ IUCN आदि की अन्तरराष्ट्रीय बैठकों में अध्यक्ष/सह अध्यक्ष, प्रस्तुतकर्ता, लेखक, प्रतिनिधि आदि विभिन्न पदों पर योगदान 1998-2008;

8. विभिन्न देशों में संपन्न एशियाई, अफ़्रीकी, अमेरिकी व यूरोपीय क्षेत्रीय सिंचन, जल निकासी तथा बाढ़ प्रबंधन सम्मेलनों में कई वर्षों तक प्रतिनिधित्व एवं योगदान 1993-2009;

9. 16 भाषाओं में अनूदित अन्तरराष्ट्रीय सिंचाई एवं जल निकास आयोग ICID के बहुभाषी तकनीकी शब्दकोश Multilingual Technical Dictionary कार्य समूह में सचिव एवं 2010 संस्करण का संशोधन, परिवर्द्धन एवं CD-ROM प्रकाशन;

10. विश्वबैंक द्वारा वित्तपोषित एवं टीएचडीसी इण्डिया लिमिटेड द्वारा निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल-विद्युत परियोजना 444 मेगावाट उत्तराखंड, भारत में विशेषज्ञ पैनल के सदस्य।

                                     

6. प्रकाशित पुस्तकें, शोधपत्र एवं लेख

1. ‘वाटर पॉवर इंजीनियरिंग’, विकास पब्लिशिंग हाउस प्राइवेट लिमिटेड, नोयडा -201301, प्रथम संस्करण 1979, द्वितीय संस्करण 2013, ISBN: 978-932596898-1, पृष्ठ 625;

2. इप्ट्रिड – एन आईसीआईडी विज़न’, आईसीआईडी, नई दिल्ली, 1995;

3. ‘रिसर्च इन इरिगेशन एंड ड्रेनेज – ए रिव्यू ऑफ़ आईसीआईडी’ज़ एफ़र्ट्स’, आईसीआईडी, नई दिल्ली, 1994;

4. प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में जलविज्ञान, जल संसाधन, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा आदि से सम्बंधित विभिन्न विषयों पर दर्जनों तकनीकी शोधपत्र, लेख, प्रस्तुति तथा टाइम्स ऑफ़ इंडिया के ‘स्पीकिंग ट्री’ कॉलम में वेदों में जल, पर्यावरण आदि पर लेख, 150 से अधिक अन्तरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय सम्मेलनों में लेखों की प्रस्तुति/तकनीकी टिप्पणियाँ, 25 से अधिक अन्तरराष्ट्रीय संगठनों से संबद्ध रह कर विशेषज्ञ सलाह।

5. साहित्य का ध्वनि तत्त्व उर्फ़ साहित्यिक बिग बैंग व्यंग्य संग्रह, अयन प्रकाशन, नई दिल्ली, 2015 ।

6. भौंर्या मो कहानी संग्रह, ऑनलाइन गाथा-द अनएन्डिंग टेल, लखनऊ, 2015

7. मूरख तो एकहि भलो व्यंग्य संग्रह, ऑनलाइन गाथा-द अनएन्डिंग टेल, लखनऊ, 2016

8. लापता चेहरों का भूगोल संस्मरणात्मक कथोपन्यास, शब्दार्थ प्रकाशन, जयपुर, 2019

9. एक शाम हरी घास पर व्यंग्य संग्रह, शिवना प्रकाशन, सीहोर म.प्र., 2019

                                     

7. संपादन

1. मल्टीलिंगुअल टैक्निकल डिक्शनरी, आईसीआईडी, 2010;

2. रिपोर्ट ऑफ़ आईसीआईडी टास्क फ़ोर्स फॉर लीस्ट डैवेलप्ड कंट्रीज़ इन एशिया, आईसीआईडी, 2008;

3. टास्क फ़ोर्स रिपोर्ट्स – एन आईसीआईडी इनपुट टु डब्लू.डब्लू.एफ़ 3 एंड 4, CD-ROM संस्करण, आईसीआईडी, 2007;

4. रोल ऑफ़ डैम्स फॉर इरिगेशन, ड्रेनेज एंड फ़्लड कंट्रोल – एन आईसीआईडी पोज़ीशन पेपर, आईसीआईडी, 1999;

5. आईसीआईडी की मासिक पत्रिका ‘न्यूज़लैटर’, वार्षिक रिपोर्ट, त्रैमासिक समाचार बुलेटिन एवं ग्रन्थसूची बिब्लियोग्राफी, 1989-2004।

                                     

8. संपादन सहयोग

6. ‘हिस्टोरिकल डैम्स’, आईसीआईडी, 2001;

7. ‘द इंडस बेसिन – हिस्ट्री ऑफ़ इरिगेशन, ड्रेनेज एंड फ़्लड मैनेजमेंट’, आईसीआईडी, 2004;

8. ‘डैन्यूब वैली - हिस्ट्री ऑफ़ इरिगेशन, ड्रेनेज एंड फ़्लड कंट्रोल’, आईसीआईडी, 2004।

                                     

9. विश्वकोशों एवं अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों में वैदिक वाङ्मय पर व्याख्यान व शोधलेख

के॰एन॰शर्मा ने वैदिक वाङ्मय में निहित जलविज्ञान, पर्यावरण, पारिस्थितिकी आदि वैज्ञानिक विषयों पर पैरिस फ़्रांस, कुनमिंग चीन, क्योतो जापान, जर्मनी, भारत आदि देशों में अनेक व्याख्यान दिए हैं तथा शोधलेख लिखे हैं जो विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों में चर्चित रहे हैं और उन संस्थाओं के प्रकाशनों में उपलब्ध हैं । उनके शोधलेख नीदरलैण्ड से प्रकाशित स्प्रिंगर के" ऍन्साइक्लोपीडिया ऑफ़ द हिस्ट्री ऑफ़ साइंस, टैक्नोलोजी एंड मेडिसिइन नॉन-वैस्टर्न कल्चर्स” जैसे विश्वकोशों ने भी प्रकाशित किये हैं। इण्टरनैशनल वाटर रिसोर्सेज़ एसोसिएशन IWRA, फ़्रांस, यूनेस्को पैरिस, इण्टरनैशनल वाटर हिस्ट्री एसोसिएशन आईडब्लूएचए, नीदरलैण्ड, भारतीय जल संसाधन संस्था IWRS, इण्टरनैशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज, एक्वा फ़ाउण्डेशन नई दिल्ली, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर आदि अनेक प्रतिष्ठित संस्थाएं हैं जिनके अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों में के॰एन॰शर्मा ने व्याख्यान दिए हैं तथा अपने शोधलेख प्रस्तुत किये हैं।

                                     

10. हिंदी में कहानी एवं व्यंग्य लेखन

कमलानाथ के व्यंग्य तथा कहानियां 1960 के दशक से देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते आरहे हैं। बहुत सी ई-पत्रिकाओं में भी आपके व्यंग्य व कहानियां प्रकाशित होते हैं तथा उनकी कई रचनाएँ गद्यकोशों में संकलित हैं । इनका एक व्यंग्य संग्रह" साहित्य का ध्वनि तत्त्व उर्फ़ साहित्यिक बिग बैंग” अयन प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा 2015 में प्रकाशित हुआ है। इनके एक अन्य कहानी संग्रह "भौंर्या मो" को ऑनलाइन गाथा, लखनऊ ने 2015 में ही ई-बुक तथा पेपरबैक रूप में प्रकाशित किया है।उनका एक और व्यंग्य संग्रह "मूरख तो एकहि भलो" भी ई-बुक तथा पेपरबैक रूप में 2016 में ऑनलाइन गाथा, लखनऊ ने ही प्रकाशित किया है।। वर्ष 2016 में इनकी चार कहानियां "समूह-१२" द्वारा "कहानी का समय" शीर्षक से प्रकाशित कथा-संग्रह में भी शामिल हैं! सन् 2019 में उनकी दो पुस्तकें - नौवेला की तर्ज़ पर लिखा संस्मरणात्मक कथोपन्यास लापता चेहरों का भूगोल शब्दार्थ प्रकाशन, जयपुर से और व्यंग्य संग्रह एक शाम हरी घास पर शिवना प्रकाशन, म.प्र. से प्रकाशित हुई हैं।

राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर ने उनको व्यंग्य संग्रह" साहित्य का ध्वनि तत्त्व उर्फ़ साहित्यिक बिग बैंग” के लिए सन 2018-19 के प्रतिष्ठित कन्हैयालाल सहल पुरस्कार से सम्मानित किया है।

शब्दकोश

अनुवाद
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