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ⓘ विज्ञान

कहते हैं।

विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है, जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी शाखा के लिये भी करते हैं, जो तथ्य, सिद्धान्त और तरीकों को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि किसी भी विषय के क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कहते है। ऐसा कहा जाता है कि विज्ञान के ज्ञान-भण्डार के बजाय वैज्ञानिक विधि विज्ञान की असली कसौटी है। Or प्रकृति मे उपस्थित वस्तुओं के क्रमबध्द अध्ययन से ज्ञान प्राप्त करने को ही विज्ञान कहते हैं। या किसी भी वस्तु के बारे मे विस्तृत ज्ञान को ही विज्ञान कहते हैं ।।

किसी भी वस्तु के बारे में जानकारी ग्रहण करना और जानकारी को सही तरीकों से लागू करना एवं किसी भी वस्तु का सही अवलोकन करना एवं उसका विश्लेषण करना ही विज्ञान है

प्रयोगों द्वारा सिद्ध क्रमबद्ध ज्ञान को भी विज्ञान कहते है

                                     

1. प्राकृतिक विज्ञान

प्राकृतिक विज्ञान प्रकृति और भौतिक दुनिया का व्यवस्थित ज्ञान होता है, या फ़िर इसका अध्ययन करने वाली इसकी कोई शाखा। असल में विज्ञान शब्द का उपयोग लगभग हमेशा प्राकृतिक विज्ञानों के लिये ही किया जाता है। इसकी तीन मुख्य शाखाएँ हैं: भौतिकी, रसायन शास्त्और जीव विज्ञान।

", समाजशास्त्र, इत्यादि शामिल हैं।

                                     

2. निगमनात्मक प्रवासी

निगमनात्मक प्रणाली कुछ ऐसी विद्याओं का समूह है जो दर्शन और विज्ञान के विषयों पर तर्क और गणना के सिद्धान्त का अनुप्रयोग करते हैं। इसमें गणित और तर्क शामिल हैं।

प्रायः सामाजिक विज्ञान और निगमनात्मक प्रणालियों को विज्ञान नहीं माना जाता।

                                     

3. विज्ञान की प्रमुख शाखाएँ एवं अध्ययन–विषय

विज्ञान विज्ञान का अर्थ है विशेष ज्ञान । मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं के लिए जो नए-नए आविष्कार किए हैं, वे सब विज्ञान की ही देन हैं। आज का युग विज्ञान का युग है। विज्ञान के अनगिनत आविष्कारों के कारण मनुष्य का जीवन पहले से अधिक आरामदायक हो गया है। दुनिया विज्ञान से ही विकसित हुई हैं।

मोबाइल, इंटरनेट, ईमेल्स, मोबाइल पर 3जी और इंटरनेट के माध्यम से फेसबुक, ट्विटर ने तो वाकई मनुष्य की जिंदगी को बदलकर ही रख दिया है। जितनी जल्दी वह सोच सकता है लगभग उतनी ही देर में जिस व्यक्ति को चाहे मैसेज भेज सकता है, उससे बातें कर सकता है। चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो।

यातायात के साधनों से आज यात्रा करना अधिक सुविधाजनक हो गया है। आज महीनों की यात्रा दिनों में तथा दिनों की यात्रा चंद घंटों में पूरी हो जाती है। इतने द्रुतगति की ट्रेनें, हवाई जहाज यातायात के रूप में काम में लाए जा रहे हैं। दिन-ब-दिन इनकी गति और उपलब्धता में और सुधार हो रहा है।

चिकित्सा के क्षेत्र में भी विज्ञान ने हमारे लिए बहुत सुविधाएं जुटाई हैं। आज कई असाध्य बीमारियों का इलाज मामूली गोलियों से हो जाता है। कैंसर और एड्सस जैसे बीमारियों के लिए डॉक्टर्स और चिकित्साविशेषज्ञ लगातार प्रयासरत हैं। नई-नई कोशिकाओं के निर्माण में भी सफलता प्राप्त कर ली गई है।

सिक्के के दो पहलुओं की ही भांति इन आविष्कारों के लाभ-हानि दोनों हैं। एक ओर परमाणु ऊर्जा जहां बिजली उत्पन्न करने के काम में लाई जा सकती है। वहीं इससे बनने वाले परमाणु हथियार मानव के लिए अत्यंत विनाशकारी हैं। हाल ही में जापान में आए भूकंप के बाद वहां के परमाणु रिएक्टर्स को क्षति बहुत बड़ी त्रासदी रही।

अत: मनुष्य को अपनी आवश्यकता और सुविधानुसार मानवता की भलाई के लिए इनका लाभ उठाना चाहिए न कि दुरुपयोग कर इनके अविष्कारों पर प्रश्नचिह्न लगाना चाहिए।

                                     
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अभियांत्रिकीय भौतिकी

Asianfree भौतिकी या asianfree विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग के संयुक्त अध्ययन से जुड़ी है । यह विशेष रूप से कंप्यूटर, परमाणु, विद्युत एवं यांत्रिक इंजीनियरिंग के लिए एक स्वतंत्र है. असल में वैज्ञानिक तरीकों का दृष्टिकोण रखते हुए, यह शाखा में इंजीनियरिंग में नए समाधान की रचना और उनके विकास कर सकते हैं लागू करने का उद्देश्य रखती है.

                                     

सरोज चूड़ामणि गोपाल

सरोज Churamani गोपाल, एक भारतीय चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षाविद् और पहली महिला में बाल रोग सर्जन के रूप में जाना जाता है कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान में अध्यक्ष, राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी है. वे भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया है.

                                     

रातको जानेव

रात नई यूगोस्लाविया और सर्बिया के एक परमाणु वैज्ञानिक है । वे क्लोन विज्ञान और कला अकादमी के सदस्य थे.

                                     

भूमिविज्ञान

Homewise, मृदा विज्ञान की दो शाखाओं. इसकी दूसरी शाखा का नाम mitarbeite pedology) है. Homewise के रिश्ते की मिट्टी जीवों पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह है ।

                                     

कवानम्योन

Conmen विश्वकोश उत्तर कोरिया में 20 भागों में प्रकाशित एक विश्वकोश है. इस प्रकाशक विज्ञान विश्वकोश द्वारा 2012 में किम इल-सुंग के जन्मदिन में जयंती वर्ष में प्रकाशित किया गया था । इस विश्वकोश में 58.000 लेख और 9.000 छवियों है.

                                     

मिस्टर प्रमोद राय

श्री प्रमोद भारत के उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित एक शहर गाज़ीपुर जिले में स्थित है के तहत एक छोटे से गांव में सविता, बो एक स्थायी निवासी के, असली के क्षेत्र में अंग्रेजी, गणित, विज्ञान के साथ प्रसिद्ध शिक्षक और भूमिहार उन्हें परिवार के एक सामान्य व्यक्ति है । हिंदू विश्वास है, यह निर्माता भगवान, श्री ब्रम्हा जी के द्वारा बनागई मानव साधन है जो दुनिया के किसी भी कार्य असंभव नहीं माना जाता है ।

                                     

क्रम-विकासवादी जीव विज्ञान

क्रम-विकासवादी जीवविज्ञान जीव विज्ञान का उपक्षेत्र है जो विकासवादी प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है जिसने पृथ्वी पर जीवन की विविधता का उत्पादन किया। 1930 के दशक में, जूलियन हक्सले ने जैविक अनुसंधान के पहले असंबंधित क्षेत्रों जैसे कि आनुवांशिकी और पारिस्थितिकी, सिस्टमैटिक्स और पैलियंटोलॉजी से समझ के आधुनिक संश्लेषण को क्या कहा, क्रम-विकासवादी जीव विज्ञान का अनुशासन उभरा।

                                     

ब्रजेन्द्रनाथ शील

सर ब्रजेन्द्रनाथ शील भारत के एक प्रख्यात मानवतावादी दार्शनिक थे। वे ब्राह्म समाज के महान मौलिक चिन्तकों में से एक थे। उन्होने तुलनात्मक धर्म एवं विज्ञान के दर्शन पर कार्य किया।

                                     

अभिहितान्वयवाद

अभिहितान्वयवाद कुमारिल भट्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत है। इस सिद्धांत के अनुसार पद और वाक्य में पद की सत्ता है और वाक्य सार्थक पदों के योग से बनता है। इन्होंने इस‌ सिद्धांत के केंद्र में तात्पर्य शक्ति को रखा अर्थात हमारे कहने का जो तात्पर्य है जो वाच्य है उसके अनुसार हम पदों को सजाकर वाक्य बनाते हैं। इसके अनुसार पद ही महत्वपूर्ण है जो हमारे भावानुकूल वाक्य बनाते हैं। इनके शिष्य प्रभाकर ने बाद में इनके मत‌ का विरोध किया और अन्विताभिधानवाद सिद्धांत का प्रतिपादन किया।

                                     

मिथ्यापनीयता

मिथ्यापनीयता विज्ञान के दर्शन की वह अवधारण है जो कहता है कि किसी सिद्धान्त को असत्य सिद्ध करना सम्भव है। किसी सिद्धान्त को असत्य सिद्ध करने का यह कार्य कई तरह से किया जा सकता है। इसका सबसे सरल तरीका यह है कि कोई ऐसा उदाहरण ढूँढ निकाला जाय जिसमें यह सिद्धान्त लागू होना चाहिए, किन्तु किसी कारण से लागू न हो रहा हो।

शब्दकोश

अनुवाद
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