ⓘ हिन्दी ललित निबन्धकार. ललितनिबंध निबंध का एक प्रकार है। ललित निबन्ध विधा की उपस्थिति का अभास आधुनिक काल और गद्य विधा के आरम्भ के साथ ही मिलने लगता है। भारतेन्दु ..

                                     

ⓘ हिन्दी ललित निबन्धकार

ललितनिबंध निबंध का एक प्रकार है। ललित निबन्ध विधा की उपस्थिति का अभास आधुनिक काल और गद्य विधा के आरम्भ के साथ ही मिलने लगता है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रतापनारायण मिश्र, सरदार पूर्ण सिंह, चन्द्रधर्शर्मा गुलेरी, बालमुकुन्द गुप्त, पुन्न्नलाल पदुमलाल बक्शी आदि के निबन्धों में इस विधा के पूर्वाभास दिखाई पडने लगते हैं, लेकिन एक व्यवस्थित और महत्वपूर्ण विधा के रूप में इसकी पहचान पहले-पहल आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबन्धों में दिखाई पडती है। ‘अशोक के फूल’, ‘कुटज ’और ‘कल्पलता’ संकलनों के निबंध पहले-पहल इस विधा के प्रतिदर्श बने। अतः उनके ये निबन्ध ही इस विधा के वास्तविक प्रस्थान विन्दु हैं। आगे चलकर कुबेरनाथ राय, विद्या निवास मिश्र, विवेकी राय, कृष्णबिहारी मिश्र, श्रीराम परिहार, दरवेश सिंह आदि निबन्धकारों ने इसे और समृद्ध किया। ललित निबंध की एक संज्ञा व्यक्तिव्यंजक निबंध भी है। इसलिए इसके दायरे में शिवप्रसाद सिंह, नामवर सिंह, अज्ञेय, अष्टभुजा शुक्ल को भी शामिल कर सकते हैं। किंतु, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्और कुबेरनाथ राय इस विधा की एक त्रयी रचते हैं। इस विधा को वास्तविक पहचान इन्ही रचनाकारों ने दी।

                                     

1. * कुबेरनाथ राय

हिन्दी ललित निबन्ध परम्परा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर, सांस्कृतिक निबन्धकाऔर भारतीय आर्ष-चिन्तन के गन्धमादन थे। उनकी गिनती आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी और विद्यानिवास मिश्र जैसे ख्यातिलब्ध निबन्धकारों के साथ की जाती है। उनका समूचा लेखन भारतीयता की पहचान और उसकी व्याख्याको समर्पित रहा है।

                                     

2. * विद्या निवास मिश्र

संस्कृत के प्रकांड विद्वान, जाने-माने भाषाविद्, हिन्दी साहित्यकाऔर सफल सम्पादक नवभारत टाइम्स थे। उन्हें सन १९९९ में भारत सरकार ने साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ललित निबंध परम्परा में ये आचार्य हज़ारीप्रसाद द्विवेदी और कुबेरनाथ राय के साथ मिलकर एक त्रयी रचते है। पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी के बाद अगर कोई हिन्दी साहित्यकार ललित निबंधों को वांछित ऊँचाइयों पर ले गया तो हिन्दी जगत में डॉ॰ विद्यानिवास मिश्र का ही जिक्र होता है।

                                     

3. * हजारीप्रसाद द्विवेदी

आधुनिक युग के मौलिक निबंधकार, उत्कृष्ट समालोचक एवं सांस्कृतिक विचारधारा के प्रमुख उपन्यासकार आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म १९ अगस्त १९०७ में बलिया जिले के दुबे-का-छपरा नामक ग्राम में हुआ था। उनका परिवार ज्योतिष विद्या के लिए प्रसिद्ध था। उनके पिता पं. अनमोल द्विवेदी संस्कृत के प्रकांड पंडित थे। द्विवेदी जी की प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल में ही हुई और वहीं से उन्होंने मिडिल की परीक्षा पास की। इसके पश्चात् उन्होंने इंटर की परीक्षा और ज्योतिष विषय लेकर आचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण की। शिक्षा प्राप्ति के पश्चात द्विवेदी जी शांति निकेतन चले गए और कई वर्षों तक वहां हिंदी विभाग में कार्य करते रहे। शांति-निकेतन में रवींद्रनाथ ठाकुर तथा आचार्य क्षितिमोहन सेन के प्रभाव से साहित्य का गहन अध्ययन और उसकी रचना प्रारंभ की। द्विवेदी जी का व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली और उनका स्वभाव बड़ा सरल और उदार था। वे हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत और बांग्‍ला भाषाओं के विद्वान थे। भक्तिकालीन साहित्य का उन्हें अच्छा ज्ञान था। लखनऊ विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. की उपाधि देकर उनका विशेष सम्मान किया था।

                                     

4. *विवेकी राय

हिन्दी के एक महत्वपूर्ण ललित निबन्धकार, जो अपनी ललित भंगिमा और गंवई जीवन के प्रति अनन्य राग क कारण विशेष रूप से जाने जाते हैं। विवेकी राय हिन्दी ललित निबन्ध परम्परा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। इस विधा में उनकी गिनती आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदि, विद्यानिवास मिश्और कुबेरनाथ राय जैसे शीर्षस्थानीय निबन्धकार के साथ की जाती है। उनके निबन्ध सग्रह ‘मनबोध मास्टर की डायरी’ और ‘फ़िर बैतलवा डाल पर’ उनकी पहचान के शुरुआती आधार बनते हैं तो ‘वन तुलसी की गन्ध’ और ‘जगत तपोवन सो कियो’ निबन्ध के क्षेत्र में नए क्षितिज के विस्तर के प्रमाण हैं। इस विधा में उनके अब तक ग्यारह संग्रह प्रकशित हो चुके हैं। ‘उठ जाग मुसफ़िर’ उनका बारहवां निबन्ध संग्रह है।

                                     

5. * परिचय दास

ललित निबंध, सांस्कृतिक कविता, भारतीय आलोचना में नए विन्यास का प्रयत्न. भोजपुरी, हिन्दी में लेखन. जन्म: ग्राम - रामपुर कांधी.

शब्दकोश

अनुवाद
Free and no ads
no need to download or install

Pino - logical board game which is based on tactics and strategy. In general this is a remix of chess, checkers and corners. The game develops imagination, concentration, teaches how to solve tasks, plan their own actions and of course to think logically. It does not matter how much pieces you have, the main thing is how they are placement!

online intellectual game →