परम्परा

भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से चली आ रही गुरु-शिष्य परम्परा को परम्परा कहते हैं। यह हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्मों में समान रूप से पायी जाती है।
परम्परा का शाब्दिक अर्थ है - बिना व्यवधान के शृंखला रूप में जारी रहना। परम्परा-प्रणाली में किसी विषय या उपविषय का ज्ञान बिना किसी परिवर्तन के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ियों में संचारित होता रहता है। उदाहरणार्थ, भागवत पुराण में वेदों का वर्गीकरण और परम्परा द्वारा इसके हस्तान्तरण का वर्णन है। यहां ज्ञान के विषय आध्यात्मिक, कलात्मक संगीत, नृत्य, या शैक्षणिक हो सकते हैम्।

1. गुरुओं की उपाधि
परम्परा में केवल गुरु के प्रति ही श्रद्धा नहीं रखी जाती बल्कि उनके पूर्व के तीन गुरुजनों के प्रति भी श्रद्धा रखी जाती है। गुरुओं की संज्ञाएं इस प्रकार हैं-
परमेष्टिगुरु - परपरगुरु के गुरु
परमगुरु - वर्तमान गुरु के गुरु
परपरगुरु - परमगुरु के गुरु
गुरु - वर्तमान गुरु

2. परम्परा का महत्त्व
यास्क ने स्वयं परम्परा की प्रशंसा की है -
‘अयं मन्त्रार्थचिन्ताभ्यूहोऽपि श्रुतितोऽपि तर्कतः ॥
अर्थात् मन्त्रार्थ का विचार परम्परागत अर्थ के श्रवण अथवा तर्क से निरूपित होता है। क्योंकि -
‘न तु पृथक्त्वेन मन्त्रा निर्वक्तव्याः प्रकरणश एव निर्वक्तव्याः।
मन्त्रों की व्याख्या पृथक्त्वया हो नहीं सकती, अपि तु प्रकरण के अनुसार ही हो सकती है।
‘न ह्येषु प्रत्यक्षमस्ति अनृषेरतपसो वा ॥
वेदों का अर्थ किसके द्वारा सम्भव है? इस विषय पर यास्क का कथन है कि - मानव न तो ऋषि होते हैं, न तपस्वी तो मन्त्रार्थ का साक्षात्काकर नहीं सकते।

निसर्गदत्त महराज

Nisargadatta महाराज शैव, अद्वैत स्ट्रीम करने के लिए संबंधित इंटर संप्रदाय एक भारतीय गुरु है । उनके उपदेश पर आधारित पुस्तक मैं कर रहा हूँ कि भारत के बाहर से, विशेष रूप से पश्चिमी देशों में लोगों को उनके बारे में पता चला.

शिष्य

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राजकुमार विजय

राजकुमार विजय श्री लंका के पौराणिक राजा थे जिनका उल्लेख महावंश आदि इतिहास ग्रन्थों में हुआ है। परम्परा के अनुसार उनका राज्यकाल 543–505 ईसापूर्व में था।

सन्धि विच्छेद

संधि दो शब्दों से मिलकर बना है – सम् + धि। जिसका अर्थ होता है ‘मिलना ‘। हमारी हिंदी भाषा में संधि के द्वारा पुरे शब्दों को लिखने की परम्परा नहीं है। लेकिन सं...

अनुष्ठान

कर्मकाण्ड या अनुष्ठान से तात्पर्य ऐसे क्रमबद्ध कार्यों कार्यों से है जो विशेष स्थान पर, विशेष विधि से, विशेष शब्दों द्वारा किए जाते हैं। कर्मकाण्ड किसी समुदा...

चिन्तामणि

भारतीय परम्परा में चिन्तामणि एक मणि है जो इच्छा की पूर्ति करती है। इसे पश्चिमी जगत में प्रसिद्ध फिलास्फर्स स्टोन के तुल्य माना जा सकता है। चिन्तामणि का उल्ले...

विष्णुपुर घराना

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मलणी

स्रोत:- नंद मौर्य राजवंश सारे राजस्थान में, शादी से संबंधित परंपराओं कर रहे हैं. ऐसा माना जाता है होना करने के लिए बिना कई हो बेटी उसके घर भोजन-पानी में कर स...

प्रमेयिका

गणित में प्रमेयिका ऐसे कथन को कहते हैं जो सिद्ध किया जा चुका हो। प्रमेयिकाएँ अन्य बड़े परिणामों की सिद्धि के लिये सीढ़ी का काम करतीं हैं। गणित के अनेकानेक पर...

देवार गीत

देवार गीत देवार जाति के लोग गाते हैं। देवार है छत्तीसगढ़ की भ्रमण शील जाति या धुमन्तु जाति। कभी इधर तो कभी उधर, इसीलिये शायद इनके गीतों में इतनी रोचकता है, इ...

गुरुकुल पद्धति

गुरुकुल शिक्षा पद्धति --- गुरुकुल पूर्णतः आवासीय शिक्षा प्रदान करने का एकांत स्थान होता था।जहाँ 08-10वर्ष की आयु मे बच्चा गुरु के सानिध्य मे रह कर विषम हालात...

बस्तर का दशहरा

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में मनाया जाने वाला दशहरा अपने विशेष स्वरूप के कारण प्रसिद्ध है। बस्तर का दशहरा दुनिया का सबसे लंबे समय तक चलने वाला लोक पर्व माना...