ⓘ काशीनाथ सिंह हिन्दी साहित्य की साठोत्तरी पीढ़ी के प्रमुख कहानीकार, उपन्यासकार एवं संस्मरण-लेखक हैं। काशीनाथ सिंह ने लंबे समय तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिन ..

                                     

ⓘ काशीनाथ सिंह

काशीनाथ सिंह हिन्दी साहित्य की साठोत्तरी पीढ़ी के प्रमुख कहानीकार, उपन्यासकार एवं संस्मरण-लेखक हैं। काशीनाथ सिंह ने लंबे समय तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिन्दी साहित्य के प्रोफेसर के रूप में अध्यापन कार्य किया। सन् 2011 में उन्हें रेहन पर रग्घू के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में साहित्य के सर्वोच्च सम्मान भारत भारती से भी सम्मानित किया जा चुका है।

                                     

1. जीवन परिचय

काशीनाथ सिंह का जन्म वाराणसी अब चंदौली के जीयनपुर गाँव में 1 जनवरी, सन् 1937 को हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके पैत्रिक गाँव जीयनपुर के पास के विद्यालयों में ही हुई। सन् 1953 में हाईस्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। हालाँकि गणित विषय में वे कमजोर थे। उच्च शिक्षा के लिए काशीनाथ सिंह बनारस चले आये जहाँ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से उन्होंने स्नातक, परास्नातक 1959 और पी-एच०डी० 1963 की उपाधियाँ प्राप्त कीं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में ही पहले वे हिंदी भाषा का ऐतिहासिक व्याकरण कार्यालय में सन् 62 से 64 तक शोध सहायक रहे। फिर सन् 1965 में वहीं उन्होंने अध्यापन कार्य शुरू किया और हिन्दी साहित्य के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के पद पर कार्य करते हुए 1997 में सेवानिवृत्त हुए। हिन्दी के सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ० नामवर सिंह काशीनाथ सिंह के बड़े भाई हैं।

                                     

2. साहित्य सृजन

काशीनाथ सिंह की सृजन-यात्रा साठोत्तरी पीढ़ी के एक कहानीकार के रूप में आरंभ हुई। उनकी पहली कहानी संकट कृति पत्रिका सितंबर 1960 में प्रकाशित हुई थी। काशीनाथ सिंह साठोत्तरी पीढ़ी के सुप्रसिद्ध चार यार रवीन्द्र कालिया, दूधनाथ सिंह और ज्ञानरंजन के साथ चौथे यार हैं। उनका पहला उपन्यास अपना मोर्चा 1967 ईस्वी के छात्र आंदोलन को केंद्र में रखकर लिखा गया था। लंबे समय तक वे कहानीकार के रूप में ही विख्यात रहे। बाद में संस्मरण के क्षेत्र में उतरने पर उन्हें काफी ख्याति प्राप्त हुई। अपना मोर्चा के लंबे समय बाद उनका दूसरा उपन्यास काशी का अस्सी प्रकाशित हुआ जो वस्तुतः कहानियों एवं संस्मरणों का सम्मिलित रूप है। सन् 2002 में प्रकाशित काशी का अस्सी को उनका सबसे महत्त्वपूर्ण काम माना जाता है। यह घाटों, अजीब पात्रों और 1970 के दशक के छात्र राजनेताओं के जीवन के अंदरूनी चित्र की तरह लिखा गया है । उपन्यास वाराणसी के रंगीन जीवन के विस्तृत चित्रण में अद्वितीय माना जाता है।

काशीनाथ सिंह साहित्यिक व्यक्तित्वों के जीवन से सम्बद्ध संस्मरण-लेखन की अपनी अनूठी शैली के लिए भी जाने जाते हैं। उनके संस्मरणों को शरद जोशी पुरस्कार-प्रप्त याद हो कि न याद हो तथा आछे दिन पाछे गये में संकलित किया गया है। नामवर सिंह के जीवन पर केंद्रित संस्मरण-पुस्तक है घर का जोगी जोगड़ा। काशी का अस्सी के अंशों को प्रसिद्ध निर्देशक उषा गांगुली द्वारा रंगमंच पर प्रस्तुत किया गया है और इसी उपन्यास पर चंद्रप्रकाश द्विवेदी द्वारा फीचर फिल्म मोहल्ला अस्सी का भी निर्माण किया जा चुका है।

काशीनाथ सिंह को 2011 में उनके उपन्यास रेहन पर रग्घु के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। हाल के दिनों में काशी का अस्सी पर आधारित एक नाटक काशीनामा भारत और विदेशों में 125 बार आयोजित किया गया है।

                                     

3. प्रकाशित कृतियाँ

कहानी-संग्रह-
  • लोग बिस्तरों पर 1968
  • सदी का सबसे बड़ा आदमी 1986
  • सुबह का डर 1975
  • संकलित कहानियाँ 2008
  • कविता की नयी तारीख 2010
  • कल की फटेहाल कहानियाँ 1980
  • आदमीनामा 1978
  • कहनी उपखान सम्पूर्ण कहानियाँ - 2003 राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली से
  • नयी तारीख 1979
  • प्रतिनिधि कहानियाँ 1984
  • खरोंच 2014
  • 10 प्रतिनिधि कहानियाँ 1994
उपन्यास-
  • महुआ चरित - 2012
  • काशी का अस्सी - 2002
  • रेहन पर रग्घू - 2008
  • उपसंहार - 2014
  • अपना मोर्चा - 1972
संस्मरण-
  • घर का जोगी जोगड़ा -2006
  • याद हो कि न याद हो -1992
  • आछे दिन पाछे गए - 2004
शोध-आलोचना-
  • आलोचना भी रचना है 1996
  • हिंदी में संयुक्त क्रियाएं 1976
  • लेखक की छेड़छाड़ 2013
नाटक-
  • घोआस

साक्षात्कार-

  • गपोड़ी से गपशप 2013 संपादक- पल्लव
संपादन-
  • परिवेश अनियतकालीन पत्रिका 1971-76
  • काशी के नाम 2007 नामवर सिंह के पत्रों का संचयन

काशीनाथ सिंह पर केंद्रित विशिष्ट साहित्य

  • बनास जन का विशेषांक गल्पेतर गल्प का ठाठ काशी का अस्सी पर केंद्रित - 2010
  • कहन पत्रिका का विशेषांक साठ के काशी और काशी का साठ, संपादक- मनीष दुबे, 2000
  • संबोधन का विशेषांक अक्टूबर 2012 - जनवरी 2013 संपादक- कमर मेवाड़ी

शब्दकोश

अनुवाद
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