ⓘ अग्निवंश भारत के चार प्राचीन राजपुतों को कहां गया है, जिसमें परमार, प्रतिहार, चौहान और चालुक्य यह चार वंश शामिल हैं। चालुक्य के अंतरगत सोलंकी और बघेल राजवंश आते ..

                                     

ⓘ अग्निवंश

अग्निवंश भारत के चार प्राचीन राजपुतों को कहां गया है, जिसमें परमार, प्रतिहार, चौहान और चालुक्य यह चार वंश शामिल हैं। चालुक्य के अंतरगत सोलंकी और बघेल राजवंश आते है|| अग्निवंश भारत के ३६ राजपुत वंशों में से एक हैं। दशरथ शर्मा लिखते हैं कि-हम किसी अन्य वंश को अग्निवंश माने या न माने परन्तु परमारों को अग्निवंशी मानने में कोई आपत्ति नहीं है। इतिहासकार कर्नल टाॅड ने लिखा है कि सिंघल की राजकुमारी राणी पद्मिनी भी अग्निवंश में ही जन्मी थी। उनका वंश चौहान था। चंदबरदाई राव के पृथ्वीराज रासौ अनुसार इन राजपुतों की उत्पत्ति मुनि वशिष्ठ द्वारा आबु पर्वत पर किए यज्ञ द्वारा हुई थी। भलेही वें यज्ञकुंड से उत्पन्न हुए हो लेकिन आबु पर्वत पर हुए किसी यज्ञीय कार्य के द्वारा ही क्षत्रियों के शुध्दीकरण के पश्चात इन चार वंशों का उदय हुआ, इस मत को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। नैणसी और सूर्यमल्ल मिश्रण ने भी इस मत का समर्थन किया है। एक मत के अनुसार यह राजपुत, सुर्यवंश से और चंद्रवंशीय क्षत्रियों से ही उत्पन्न हुए। इस मत के प्रमुख प्रतिपादक डॉ. गौरीशंकर हीराचंद औझा थे।

                                     
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