• हस्त नक्षत्र

    हस्त नक्षत्र में जन्मा जातक आकर्षक व्यक्तित्व का धनी होगा हस्त नक्षत्र 13वाँ नक्षत्र है। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। यह पू ष ण ढ प्रथम नाम अक्षर से पहचा...

  • स्वाती (नक्षत्र)

    स्वाति नक्षत्र आकाश मंडल में 15वाँ नक्षत्र होकर इसका स्वामी राहु यानि अधंकार है। कहावत भी है कि जब स्वाति नक्षत्र में ओस की बूँद सीप पर गिरती है तो मोती बनता...

  • शतभिषा

    शतभिषा, नक्षत्रों में 24वाँ नक्षत्र है। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है, इसकी दशा में 18 वर्ष है व कुंभ राशि के अंतर्गत आता है। जहाँ नक्षत्र स्वामी राहु है वहीं...

  • विशाखा

    विशाखा नक्षत्र का अंतिम चरण मंगल की वृश्चिक राशि में आता है। इसे तो नाम अक्षर से पहचाना जाता है। जहाँ नक्षत्र स्वामी गुरु है तो राशि स्वामी मंगल गुरु मंगल का...

  • रोहिणी नक्षत्र

    रोहिणी नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा गया है। इस नक्षत्र में तारों की संख्या पाँच है। भूसे वाली गाड़ी जैसी आकृति का यह नक्षत्र फरवरी के मध्य भाग में मध्याक...

  • रेवती (नक्षत्र)

    यह एक नक्षत्र है और ३२ तारों का एक समूह है। यह मृदु मॅत्र संज्ञक नक्षत्र है। इस नक्षत्र में विद्या का आरंभ, गृह प्रवेश, विवाह, सम्मान प्राप्ति, देव प्रतिष्ठा...

  • मृगशिरा

    मृगशिरा या मृगशीर्ष एक नक्षत्र है। वैदिक ज्योतिष में मूल रूप से 27 नक्षत्रों का जिक्र किया गया है। नक्षत्रों के गणना क्रम में मृगशिरा नक्षत्र का स्थान पांचवा...

  • मूल नक्षत्र

    मूल नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में आते हैं। यह ये यो भा भी के नाम से जाना जाता है। नक्षत्र का स्वामी केतु है। वहीं राशि स्वामी गुरु है। केतु गुरु धनु राशि...

  • मघा

    मघा नक्षत्र सूर्य की सिंह राशि में आता है। नक्षत्र स्वामी केतु है, इसकी महादशा 7 वर्ष की होती है। केतु को राहु का धड़ माना गया है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से द...

  • पूर्वाषाढ़ा

    पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र मंडल का 20वाँ नक्षत्र है। यह धनुराशि में आता है। इस नक्षत्र का स्वामी शुक है तो राशि स्वामी शुक्र। नक्षत्र स्वामी की सर्वाधिक दशा 20 वर्ष...

  • पूर्वाभाद्रपद

    गुरु का नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद का अंतिम चरण मीन राशि में आता है। इसे ही नाम से पहचाना जाता है। गुरु का नक्षत्र व गुरु की राशि मीन में होने से ऐसा जातक आकर्षक...

  • पूर्वाफाल्गुनी

    पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र 11वाँ नक्षत्र है। यह सूर्य की सिंह की राशि में आता है। इसके चारों चरण सिंह में मो टी ट नाम अक्षर से चरणानुसार आते हैं। नक्षत्र स्वामी...

  • पुनर्वसु नक्षत्र

    पुनर्वसु हिन्दु ज्योतिष के अनुसार आकाश में स्थित एक नक्षत्र होता है। इसमें दो दीप्तिमान तारे हैं जो मिथुन नक्षत्र मंडल में आते हैं, जिन्हें कैस्टर एवं पॉल्लक...

  • धनिष्ठा

    धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम दो चरणों में जन्मा जातक गू, गे नाम से जाना जा सकता है। मंगल इस नक्षत्र का स्वामी है, वहीं राशि स्वामी शनि है। मंगल का नक्षत्र होने स...

  • ज्येष्ठा

    ज्येष्ठा नक्षत्र गंड मूल नक्षत्र कहलाता है। यह वृश्चिक राशि में नो या यी यु के नाम से जाना जाता है। राशि स्वामी मंगल व नक्षत्र स्वामी बुध का ऐसे जातकों पर अस...

  • चित्रा नक्षत्र

    आकाशीय मंडल में चौदहवाँ नक्षत्र है। चित्रा नक्षत्र के देवता त्वष्टा हैं जो एक आदित्य हैं। इस नक्षत्र के प्रथम दो चरण कन्या राशि में आते हैं। पे पो नाम से इस ...

  • उत्तराषाढा

    उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इसका प्रथम चरण भूनाम से धनुराशि में आता है। राशि स्वामी गुरु है तो नक्षत्र स्वामी सूर्य है। सूर्य की दशा में सबसे कम ...

  • उत्तराभाद्रपद

    उत्तरा भाद्रपद आकाश मंडल में 26वाँ नक्षत्र है। यह मीन राशि के अंतर्गत आता है। इसे दू, थ, झ नाम से जाना जाता है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी शनि है। वहीं...

  • उत्तराफाल्गुनी

    उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र बारहवाँ हैं वहीं इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इसका प्रथम चरण सिंह राशि में आता है। अतः इस राशि वालों के सूर्य का दोहरा लाभ मिल जाता...

  • आर्द्रा

    आर्द्रा भारतीय ज्योतिष में एक नक्षत्र है। संस्कृत भाषा से आए इस नाम का अर्थ होता है "नम"। आर्द्रा से सम्बन्धित हिंदू मिथक बृहस्पति की दूसरी पत्नी तराका के सा...

  • अश्विनी

    नक्षत्रों में सबसे पहला नक्षत्र एक अप्सरा जो बाद में अश्विनी कुमारों की माता मानी जोने लगी सूर्य पत्नी जो कि घोड़ी के रूप में छिपी हुई थी। सूर्य की पत्नी अश्...

  • अश्लेषा

    आश्लेषा नक्षत्र में जन्मा जातक प्रत्येक कार्य में सफल होता है। आश्लेषा नक्षत्र नौवाँ नक्षत्र है। यह कर्क राशि के अंतर्गत आता है। इसके चरणानुसार नाम डी डू डे ...

  • अनुराधा नक्षत्र

    भारतीय ज्योतिर्विदों ने कुल २७ नक्षत्र माने हैं, जिनमें अनुराधा सत्रहवाँ है। इसकी गिनती ज्योतिष देवगण तथा मध्य नाड़ीवर्ग में की जाती है जिसपर विवाह स्थिर करन...

भरणी

यह एक नक्षत्र है। नक्षत्रों की कड़ी में भरणी को द्वितीय नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। जो व्यक्ति भरणी नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे सुख सुविधाओं एवं ऐसो आराम चाहने वाले होते हैं। इनका जीवन भोग विलास एवं आनन्द में बीतता है। ये देखने में आकर्षक व सुन्दर होते हैं। इनका स्वभाव भी सुन्दर होता है जिससे ये सभी का मन मोह लेते हैं। इनके जीवन में प्रेम का स्थान सर्वोपरि होता है। इनके हृदय में प्रेम तरंगित होता रहता है ये विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के प्रति आकर्षण एवं लगाव रखते हैं।
भरनी नक्षत्र के जातक उर्जा से परिपूर्ण रहते हैं। ये कला के प्रति आकर्षित रहते हैं और संगीत, नृत्य, चित्रकला आदि में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। ये दृढ़ निश्चयी एवं साहसी होते हैं। इस नक्षत्र के जातक जो भी दिल में ठान लेते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। आमतौपर ये विवाद से दूर रहते हैं फिर अगर विवाद की स्थिति बन ही जाती है तो उसे प्रेम और शान्ति से सुलझाने का प्रयास करते हैं। अगर विरोधी या विपक्षी बातों से नहीं मानता है तो उसे अपनी चतुराई और बुद्धि से पराजित कर देते हैं।
जो व्यक्ति भरणी नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे विलासी होते हैं। अपनी विलासिता को पूरा करने के लिए ये सदैव प्रयासरत रहते हैं और नई वस्तुएं खरीदते हैं। ये साफ सफाई और स्वच्छता में विश्वास करते हैं। इनका हृदय कवि के समान होता है। ये किसी विषय में दिमाग से ज्यादा दिल से सोचते हैं। ये नैतिक मूल्यों का आदर करने वाले और सत्य का पालन करने वाले होते हैं। ये रूढ़िवादी नहीं होते हैं और न ही पुराने संस्कारों में बंधकर रहना पसंद करते हें। ये स्वतंत्र प्रकृति के एवं सुधारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले होते हैं। इन्हें झूठा दिखावा व पाखंड पसंद नहीं होता।
इनका व्यक्तित्व दोस्ताना होता है और मित्र के प्रति बहुत ही वफादार होते हैं। ये विषयों को तर्क के आधापर तौलते हैं जिसके कारण ये एक अच्छे समालोचक होते हैं। इनकी पत्नी गुणवंती और देखने व व्यवहार मे सुन्दर होती हैं। इन्हें समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है।

म त - प त एव वर ष ठ न गर क भरण - प षण एव कल य ण अध न यम, 2007 Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 भ रत सरक र क एक अध न य
चत र थ चरण म क त - चन द रम भरण प रथम चरण म श क र - स र य, द व त य चरण म श क र - ब ध, त त य चरण म श क र - श क र, और भरण चत र थ चरण म श क र - म गल, क त त क
अग न ह न द धर म म आग क द वत ह व सभ द वत ओ क ल य यज ञ - वस त भरण करन क म ध यम म न ज त ह - - इसल य उनक उप ध भ रत ह व द क क ल स अग न
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ह य ल ग च न - त ब बत पर व र क त ब बत - बर म भ ष ब लत ह डफल अपन भरण - प षण झ म ख त श क र और मछल म रकर करत ह य 900 स 1, 800 म टर क ऊ च ई
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क ब द भ र ण स व कस त ह त ह ब ज कहल त ह ख व स त रण य ऐस इक ई क भ रण स उत पन न ह त ह ब ज कहल त ह ग ऐस पर पक व भ र ण ज सम एक प ध छ प
क तहत प ज क त क य गय थ यह स स थ न एक स व यत त स स थ न ह ज सक भरण - प षण स चन एव प रस रण म त र लय, भ रत सरक र द व र क य ज त ह इसक प रस द ध
स रक षकत अध न यम Hindu Minority and Guardianship Act ह न द दत तक और भरण - प षण अध न यम Hindu Adoptions and Maintenance Act ह न द क ङ ब ल क क छ
ज य द ल प त ह न क स भ वन रहत ह श क र त न नक षत र क स व म ह भरण प र व फ ल ग न और प र व ष ढ शक त स थ न : द व त य, त त य, सप तम एव द व दश
स स ध त उत प द इक इय म द ग ध उत प दन, इस प त र ल ग इक इय एव एल प ज भरण इख इय आत ह शहर क लघ एव मध यम - उद य ग इक इय च न हट, ऐशब ग, त लकट र
र ज न, ट न न आद प ए ज त ह ल ट क सधर ऊतक क न र म ण व भज य तक स ह त ह य प दप क सभ भ ग क भरण ऊतक Ground Tissue म फ ल ह ए ह त ह

द न तक ज र रह र ज य अपन यह कर तव य समझत थ क ग र ओ और ग र क ल क भरण प षण क स र व यवस थ कर वरत त क श ष य क त स न अत य त गर ब ह त ह ए
और भरण स वत: न य त र त ह त ह ल दन और उत रन क छ ड कर अन य सब क र य क चक र स वय च ल त ह त ह द सर प रक र क औज र म मश न म छड क भरण ह त
ह जह पर घ स क बह लत ह त ह और प लत अथव ज गल पश इनम चर कर अपन भरण - प षण करत ह यह चर ग ह स इन अर थ म भ न न ह त ह क यह क घ स प रज त य
गद धर क स र स प त क स य उठ गय ऐस व पर त पर स थ त म प र पर व र क भरण - प षण कठ न ह त चल गय आर थ क कठ न इय आई ब लक गद धर क स हस कम नह
न न र व ध ध पन त क इसस बड कष ट ह आ क य क उन ह अन क आश र त क भरण प षण करन थ न न स हब न प शन प न क ल ए ल र ड डलह ज स ल ख पढ क
न य य लय क इस ब त क अध क र द द य गय ह क अवयस क बच च क द ख र ख एव भरण प षण क व यवस थ कर व ध व त त ओ क यह व च र ह क ह द व व ह क स द ध त
स द ध न त प छ छ ट ज त ह ऐस क न न एव न त य बन य ज त ह ज व शव द क भरण - प षण करत रहत ह आम जनत म क ठ क भ वन घर करन लगत ह द ष प रच र

अनुराधा नक्षत्र

भारतीय ज्योतिर्विदों ने कुल २७ नक्षत्र माने हैं, जिनमें अनुराधा सत्रहवाँ है। इसकी गिनती ज्योतिष देवगण तथा मध्य नाड़ीवर्ग में की जाती है जिसपर विवाह स्थिर करन...

अश्लेषा

आश्लेषा नक्षत्र में जन्मा जातक प्रत्येक कार्य में सफल होता है। आश्लेषा नक्षत्र नौवाँ नक्षत्र है। यह कर्क राशि के अंतर्गत आता है। इसके चरणानुसार नाम डी डू डे ...

अश्विनी

नक्षत्रों में सबसे पहला नक्षत्र एक अप्सरा जो बाद में अश्विनी कुमारों की माता मानी जोने लगी सूर्य पत्नी जो कि घोड़ी के रूप में छिपी हुई थी। सूर्य की पत्नी अश्...

आर्द्रा

आर्द्रा भारतीय ज्योतिष में एक नक्षत्र है। संस्कृत भाषा से आए इस नाम का अर्थ होता है "नम"। आर्द्रा से सम्बन्धित हिंदू मिथक बृहस्पति की दूसरी पत्नी तराका के सा...

उत्तराफाल्गुनी

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र बारहवाँ हैं वहीं इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इसका प्रथम चरण सिंह राशि में आता है। अतः इस राशि वालों के सूर्य का दोहरा लाभ मिल जाता...

उत्तराभाद्रपद

उत्तरा भाद्रपद आकाश मंडल में 26वाँ नक्षत्र है। यह मीन राशि के अंतर्गत आता है। इसे दू, थ, झ नाम से जाना जाता है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी शनि है। वहीं...

उत्तराषाढा

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इसका प्रथम चरण भूनाम से धनुराशि में आता है। राशि स्वामी गुरु है तो नक्षत्र स्वामी सूर्य है। सूर्य की दशा में सबसे कम ...

कृत्तिका

कृत्तिका वा कयबचिया एक नक्षत्र है। इसका लैटिन/अंग्रेजी में नाम Pleiades है। पृथ्वी से देखने पर पास-पास दिखने वाले कई तारों का इस समूह को भारतीय खगोलशास्त्और ...

चित्रा (नक्षत्र)

च दहव नक षत र ह च त र नक षत र क द वत त वष ट ह ज एक आद त य ह इस नक षत र क प रथम द चरण कन य र श म आत ह प प न म स इस नक षत र क पहच न च त र नक षत र - एक नक षत र ...

चित्रा नक्षत्र

आकाशीय मंडल में चौदहवाँ नक्षत्र है। चित्रा नक्षत्र के देवता त्वष्टा हैं जो एक आदित्य हैं। इस नक्षत्र के प्रथम दो चरण कन्या राशि में आते हैं। पे पो नाम से इस ...

ज्येष्ठा

ज्येष्ठा नक्षत्र गंड मूल नक्षत्र कहलाता है। यह वृश्चिक राशि में नो या यी यु के नाम से जाना जाता है। राशि स्वामी मंगल व नक्षत्र स्वामी बुध का ऐसे जातकों पर अस...

धनिष्ठा

धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम दो चरणों में जन्मा जातक गू, गे नाम से जाना जा सकता है। मंगल इस नक्षत्र का स्वामी है, वहीं राशि स्वामी शनि है। मंगल का नक्षत्र होने स...

धनिष्ठा नक्षत्र

धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम दो चरणों में जन्मा जातक गू, गे नाम से जाना जा सकता है। मंगल इस नक्षत्र का स्वामी है, वहीं राशि स्वामी शनि है। मंगल का नक्षत्र होने स...

पुनर्वसु

पुनर्वसु मात्रेयसंहिता के रचयिता एवं आयुर्वेदाचार्य थे। अत्रि ऋषि के पुत्र होने के कारण इन्हें पुनर्वसु आत्रेय कहा जाता है। अत्रि ऋषि स्वयं आयुर्वेदाचार्य थे...

पुनर्वसु नक्षत्र

पुनर्वसु हिन्दु ज्योतिष के अनुसार आकाश में स्थित एक नक्षत्र होता है। इसमें दो दीप्तिमान तारे हैं जो मिथुन नक्षत्र मंडल में आते हैं, जिन्हें कैस्टर एवं पॉल्लक...

पुष्य

राशि में 3 डिग्री 20 मिनट से 16 डिग्री 40 मिनट तक होती है। यह क्रान्ति वृ्त्त से 0 अंश 4 कला 37 विकला उत्तर तथा विषुवत वृ्त्त से 18 अंश 9 कला 59 विकला उत्तर ...

पुष्य नक्षत्र

पुष्य का अर्थ है पोषण करने वाला, ऊर्जा व शक्ति प्रदान करने वाला. मतान्तर से पुष्य को पुष्प का बिगडा़ रूप मानते हैं। पुष्य का प्राचीन नाम तिष्य शुभ, सुंदर तथा...

पूर्वभाद्रपदा

प रम पर क भ रत य खग लश स त र म अल फ प ग स ई और ब ट प ग स ई क म ल कर प र वभ द रपद नक षत र क न म द य ज त ह ज सक अर थ ह पहल व ल ख श क दम ब ट प रम पर क भ रत य खग...

पूर्वाफाल्गुनी

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र 11वाँ नक्षत्र है। यह सूर्य की सिंह की राशि में आता है। इसके चारों चरण सिंह में मो टी ट नाम अक्षर से चरणानुसार आते हैं। नक्षत्र स्वामी...

पूर्वाभाद्रपद

गुरु का नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद का अंतिम चरण मीन राशि में आता है। इसे ही नाम से पहचाना जाता है। गुरु का नक्षत्र व गुरु की राशि मीन में होने से ऐसा जातक आकर्षक...

पूर्वाषाढ़ा

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र मंडल का 20वाँ नक्षत्र है। यह धनुराशि में आता है। इस नक्षत्र का स्वामी शुक है तो राशि स्वामी शुक्र। नक्षत्र स्वामी की सर्वाधिक दशा 20 वर्ष...

मघा

मघा नक्षत्र सूर्य की सिंह राशि में आता है। नक्षत्र स्वामी केतु है, इसकी महादशा 7 वर्ष की होती है। केतु को राहु का धड़ माना गया है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से द...

मूल नक्षत्र

मूल नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में आते हैं। यह ये यो भा भी के नाम से जाना जाता है। नक्षत्र का स्वामी केतु है। वहीं राशि स्वामी गुरु है। केतु गुरु धनु राशि...

मृगशिरा

मृगशिरा या मृगशीर्ष एक नक्षत्र है। वैदिक ज्योतिष में मूल रूप से 27 नक्षत्रों का जिक्र किया गया है। नक्षत्रों के गणना क्रम में मृगशिरा नक्षत्र का स्थान पांचवा...

रेवती (नक्षत्र)

यह एक नक्षत्र है और ३२ तारों का एक समूह है। यह मृदु मॅत्र संज्ञक नक्षत्र है। इस नक्षत्र में विद्या का आरंभ, गृह प्रवेश, विवाह, सम्मान प्राप्ति, देव प्रतिष्ठा...

रोहिणी नक्षत्र

रोहिणी नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा गया है। इस नक्षत्र में तारों की संख्या पाँच है। भूसे वाली गाड़ी जैसी आकृति का यह नक्षत्र फरवरी के मध्य भाग में मध्याक...

विशाखा

विशाखा नक्षत्र का अंतिम चरण मंगल की वृश्चिक राशि में आता है। इसे तो नाम अक्षर से पहचाना जाता है। जहाँ नक्षत्र स्वामी गुरु है तो राशि स्वामी मंगल गुरु मंगल का...

शतभिषा

शतभिषा, नक्षत्रों में 24वाँ नक्षत्र है। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है, इसकी दशा में 18 वर्ष है व कुंभ राशि के अंतर्गत आता है। जहाँ नक्षत्र स्वामी राहु है वहीं...

श्रवण नक्षत्र

आक श म त र - सम ह क नक षत र कहत ह स ध रणत यह चन द रम क पथ स ज ड ह पर व स तव म क स भ त र - सम ह क नक षत र कहन उच त ह ऋग व द म एक स सर पक ल कहत ह जब स ष ट प र ...

स्वाती (नक्षत्र)

स्वाति नक्षत्र आकाश मंडल में 15वाँ नक्षत्र होकर इसका स्वामी राहु यानि अधंकार है। कहावत भी है कि जब स्वाति नक्षत्र में ओस की बूँद सीप पर गिरती है तो मोती बनता...

हस्त नक्षत्र

हस्त नक्षत्र में जन्मा जातक आकर्षक व्यक्तित्व का धनी होगा हस्त नक्षत्र 13वाँ नक्षत्र है। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। यह पू ष ण ढ प्रथम नाम अक्षर से पहचा...