लोद्रवा गढ़

लोद्रवा गढ़ राजस्थान के 36 राजवंशों में परमार वंश की प्रसिद्द शाखा लोधा परमार का वैभवशाली राज्य था। इस प्रकार यह आज के लोधी राजपूतों की राजधानी थी। आपको बता दें कि लोद्रवा गढ़ राजस्थान में जैसलमेर से 10 किमी. की दूरी पर स्थित है, जो राजस्थान के लोधी /लोधा क्षत्रियों की राजधानी थी। लोद्रवा गढ़ के राजा नृपभानु सिंह लोधी एक वीऔर बेहद पराक्रमी राजा थे। इसका प्रमाण कर्नल जेम्स टोड की क़िताब ‘राजस्थान का इतिहास’ के पृष्ठ संख्या- 51 में मिलता है, जिसमें वर्णित है कि" देवरावल की दक्षिणी सीमा पर लोध राजपूत रहते थे। इनकी राजधानी लोद्रवा थी, जिसके राजा नृपभानु सिंह लोधी थे।”
आपको बता दें कि लगभग 10वीं शताब्दी के आसपास राजस्थान में लोद्रवा गढ़ एक बेहद शक्तिशाली राज्य था, जिसके पराक्रम से पूरे राजस्थान में इस राज्य और इसके राजा नृपभानु सिंह का काफी प्रभाव था। लेकिन उनके अपने ही पड़ोसी जैसलमेर के राजा देवराज सिंह भाटी ने धोखे से महाराज नृपभानु सिंह की हत्या कर दी थी और लोद्रवा राज्य पर अपना अधिकाकर लिया था।
ग़ौरतलब है कि लोद्रवा राज्य के लोग अपने स्वाभिमान को लेकर हमेशा अडिग रहे। इसीलिए लोद्रवा गढ़ आज भी स्वाभिमान की निशानी माना जाता है। हालाँकि राजा देवराज की नीच हरकतों के कारण लोद्रवा की प्रजा को उसके राजा नृपभानु की हत्या किये जाने के बाद वहाँ से पलायन करना पड़ा। इसी पलायन में ठाकुर खजान सिंह लोध के पूर्वज लोद्रवा से ब्रजक्षेत्र में आकर बस गये और मथुरिया लोध राजपूत कहलाये।

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