ⓘ डॉ० नरेश पाल मीना जन्म: १८ नवम्बर १९८२ एक भारतीय अधिकारी और भारत के राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति के क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक हैं। और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति ..

                                     

ⓘ डॉ० नरेश पाल मीना

डॉ० नरेश पाल मीना जन्म: १८ नवम्बर १९८२ एक भारतीय अधिकारी और भारत के राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति के क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक हैं। और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में भारत के गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली का एन॰सी॰टी॰, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और दमन और दीव, राज्यों में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को न्याय दिलाने एवं उनको हो रही परेशानियों का निवारण के लिए कार्य कार्य करते हैं। उनके कार्यों में ज़मीनी स्तर की सक्रियता और अनुसूचित जनजाति के लोगों के साथ गहरे सम्बंध स्थापित करना और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जानकारी पिछड़ें क्षेत्रों के आदिवासी जनजाति के लोगों तक पहुँचना और उनकी समस्याओं के निवारण के लिए तत्काल आवश्यक कार्यवाहि कर उनको न्याय दिलाने के लिए पूर्ण प्रयत्न करना प्रमुख है।

                                     

1. प्रारम्भिक जीवन

डॉ० नरेश पाल मीना का जन्म जन्म: १८ नोवेम्बर १९८२ को राजस्थान के गांव पहाड़ी, तहसील टोडाभीम, करौली जिले में एक आदिवासी समुदाय के मीना परिवार में हुआ। डॉ० नरेश पाल मीना की प्रारंभिक शिक्षा करौली जिले की टोडाभीम तहसील के एक स्थानीय विधालय राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, पहाड़ी में हुई। तथा 9वी कक्षा से 12वी तक पढाई ईस्टर्न रेलवे इंटर कॉलेज, मुगलसराय, उत्तर प्रदेश से हुई और इसके बाद वो प्रसिद्ध महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश में पढ़ने चले गये सन 2000 में व्यवसायिक प्रबंधन में स्नातक बी. बी. ए. की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद सन 2003 में उदयपुर के प्रसिद्ध मोहनलाल सूखाड़िया विश्वविद्यालय एम. बी. ए. की उपाधि प्राप्त की। सन 2014 में मीना जी ने डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविधालय से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की तथा इग्नू विश्वविद्यालय से 2016 मे पत्रकारिता एवं मीडिया के क्षेत्र में पीजीजेएमसी कि उपाधि प्राप्त की है तथा भारत सरकार के विभिन्न संस्थाओं में काफी विषयों में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

                                     

2. शुरूआती कैरियर

स्नातक स्तर तक की पढ़ाई कर चुकने के बाद नरेश पाल जी ने भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में काम किया। सन 2005 से सन 2007 तक इस विभाग में काम करने के बाद सन 2007 से 2013 तक ग्रामीण विकास मंत्रालय में काम की शुरुआत की। और सन 2013 से 2017 तक भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विश्वविधालय अनुदान आयोग में भारत के विभन्न राज्यों में निदेशक और डी॰डी॰ओ॰ और अन्य पदों पर कार्यरत रहें।

                                     

3. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

सन २०१७ के अन्त में मीना जी ने निदेशक का पद सम्भाला और कुछ समय आयोग के मुख्य कार्यालय निदेशक का पद सम्भालने के बाद कुछ समय भारत के पिछड़े हुए राज्य छत्तीसगढ़ में आयोग का क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर में निदेशक का पद सम्भाला और आदिवासियों की परेशनियों का निवारण करने के लिए निरंतर कार्य करने लगे उसके बाद सन 2018 के अंत में उनका तबादला आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर में बड़े कार्य क्षेत्र को सम्भालने के लिए किया गया और तब से वे अपने पद का निर्वहन बख़ूबी और ईमानदारी से आदिवासी व्यक्तियों को न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहें हैं। डॉ मीना आदिवासी समुदाय को जागरूक करने के उद्देश्य से काफी सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन कर चुके है तथा आदिवासी समुदाय के सामाजिक कार्यक्रमों मे बढ चढ कर भाग लेते है जिससे लोगो की डॉ मीना तक पहुंच आसान हो, लोगो की समस्याओं को सीधे सुन सके। जब कभी आदिवासी वर्ग के सदस्यों पर अत्याचार उत्पीड़न की शिकायत मिलती है तो लिखित कार्यवाही के साथ साथ औचक निरीक्षण करने में भी नहीं चूकते है। इससे पता चलता है कि डॉ मीना ईमानदारी, तत्परता के साथ आदिवासी वर्ग के सदस्यों की समस्याओं के निवारण के लिए निरंतर प्रयासरत है जो कि डॉ मीना का आदिवासी समुदाय के प्रति समर्पण, प्रतिबद्धता, ईमानदारी को दर्शाता है।

4.
                                     
  • ब गम - आच र य चत रस न बड घर क बह - स रज द व प रस द बड वह इ स न - - ड ड ड लखनव बढ त कदम - यशप ल ज न बण ठण - ध य न म ख ज बदचलन - कव त स ह

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