ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 45

आसव

आसव एक पालि शब्द हैं जो बौद्ध शास्त्र, दर्शन, और मनोविज्ञान में प्रयोग किया जाता है, जिसका अर्थ हैं "अन्तर्वाह" या "नासूर"। यह कामुक सुख, अस्तित्व के लिए तरसना, और अज्ञानता के मानसिक कलंक को संदर्भित करता हैं, जो संसार - पुनर्जन्म, दुःख, और फिर म ...

उपगुप्त

उपगुप्त एक प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु थे। इन्हें अलक्षणक बुद्ध भी कहा जाता है। उपगुप्त वाराणसी के गुप्त नामक इत्र विक्रेता के पुत्र थे। १७ वर्ष की अवस्था में संन्यास लेकर इन्होंने योगसाधना की और काम पर विजय प्राप्त करने के उपरांत समाधिकाल में भगवान् ब ...

उपासक और उपासिका

बौद्ध धर्म के अनुयायिओं को उपासक और उपासिका कहते हैं। पुरूष अनुयायिओं को उपासक और महिला अनुयायिओं को उपासिका कहा जाता है। बौद्ध धर्म में उनके अनुयायिओं के दो प्रकार है - भिक्खू-भिक्खूनी और उपासक - उपासिका। विश्व में करीब १७८ करोड़ बौद्ध धर्म के उ ...

उरुवेला

उरुवेला नामक स्थान का ऐतिहासिक महत्व महात्मा बुद्ध के संन्यासी जीवन से सम्बंधित है। उरुवेला नगर बौद्धकालीन मगध महाजनपद में अवस्थित था। उरुवेला को बोधगया के निकट स्थित उरेल नामक आधुनिक ग्राम से समीकृत किया जाता है। प्राकृतिक दृष्टि से यह अत्यंत मन ...

ऊष्णीष विजय ढारणी सूत्र

ऊष्णीष विजय ढारणी सूत्र भारत के महायान सम्रदाय का सूत्र है। इसका पूरा नाम यह है - सर्वदुर्गतिपरिशोधन ऊष्णीष विजय ढारणी सूत्र ।

ओं मणिपद्मे हूं

ॐ मणिपद्मे हुम् एक पाली मंत्र है जिसका संबंध अवलोकितेश्वर से है। यह तिब्बती बौद्ध धर्म का मूल मंत्र है। यह प्रायः पत्थरों पर लिखा जाता है या फिर कागज पर लिख कर पूजाचक्र में लगा दिया जाता है। मान्यता है कि इस पहिये को जितनी बार घुमाया जायेगा यह उत ...

कच्चान

कच्चान या महाकच्चान पालि भाषा के वैयाकरण तथा बुद्ध भगवान के दस शिष्यों में से एक परम ऋद्धिमान्‌ शिष्य थे, जिनकी प्रशंसा में कहा गया है: ये आयुष्मान्‌ महाकात्यायन, बुद्ध द्वारा प्रशंसित, सब्रह्मचारियों द्वारा प्रशंसित और शास्ता द्वारा संक्षेप में ...

कपिलवस्तु

कपिलवस्तु, शाक्य गण की राजधानी था। गौतम बुद्ध के जीवन के प्रारम्भिक काल खण्ड यहीं पर व्यथीत हुआ था। भगवान बुद्ध के जन्म इस स्थान से १० किमी पूर्व में लुंबिनी मे हुआ था। आर्कियोलजिक खुदाइ और प्राचीन यात्रीऔं के विवरण अनुसार अधिकतर विद्वान्‌ कपिलवस ...

कालचक्र

कालचक्र बौद्ध धर्म के बज्रयान सम्प्रदाय के दर्शन से सम्बन्धित एक शब्द है। कालचक्र अथवा समय का चक्र, प्रकृति से सुसंगत रहते हुए ज्योतिषशास्त्र, सूक्ष्म ऊर्जा और आध्यात्मिक चर्या के मेल से बना तांत्रिक ज्ञान है। बौद्ध खगोलविज्ञान के अनुसार ब्राह्मा ...

कौर्वकि

कहा जाता है कि रानी कौर्वकि एक मछुवारन थीं जो बाद में सम्राट अशोक की पत्नी बनीं। उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया तथा अशोक की दूसरी पत्नी बनीं। अशोक के लघु शिलालेखों में से एक रानी शिलालेख से वह अमर हो गयीं। इस शिलालेख के अनुसार वह अशोक की दूसरी पत् ...

खदिरवनी

खदिरवनी बौद्ध देवी तारा का एक रूप हैं। इस शब्द का अर्थ होता है - खैर के वन में रहनेवाली। यह हरितवर्ण, वरद मुद्रा में तथा कमल धारण किए अंकित की जाती हैं। अशोक कांता और एकजटा इनकी सहचरी कही गई हैं।

खसर्पण

खसर्पण बोधिसत्व अवलोकितेश्वर के अनेक रूपों में से एक रूप। इनका अभिज्ञान चिह्न कमल है और तारा, सुघन कुमार, भ्रकुटी तथा हयग्रीव इनके सहचर माने गए हैं। तिब्बत के बौद्धों के बीच यह देवता काफी लोकप्रिय रहे हैं। उनकी अनेक मूर्तियाँ तिब्बत और नेपाल से प ...

खुद्दकनिकाय

खुद्दकनिकाय बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक का सुत्तपिटक का पाँचवा निकाय है। इसमें धम्मपद, उदान, इतिवुत्तक, सुत्तनिपात, थेर-थेरी गाथा, जातक आदि सोलह ग्रंथ संग्रहीत है। इनमें से कुछ में बुद्ध के प्रामाणिक वचनों का संग्रह हैं। यह छोटे सूत्रों का संकलन है।

गंडव्यूह

गंडव्यूह बौद्ध महायान संप्रदाय का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें बोधिसत्व का गुणगान और उनकी उपासना की चर्चा है। इस ग्रंथ के संबंध में अनुश्रुति है कि एक दिन भगवान बुद्ध श्रावस्ती स्थित जेतवन में विहाकर रहे थे। उनके साथ सामंतभद्र, मंजुश्री आदि पाँच ...

गंधहस्ती

गंधहस्ती, बौद्ध धर्म के अंतर्गत एक बोधिसत्व हुए हैं। इनका उल्लेख निष्पन्न योग में मिलता है। उसमें इनके दो स्वरूपों का वर्णन है। किंतु इनकी प्रतिमा देखने में नही आती। नैपाली चित्रपटों में कभी कदा इनका चित्रण मिलता है।

गृधकूट

गृधकूट राजगृह की पाँच पहाड़ियों में से एक है। इसका उल्लेख पालि ग्रंथों में हुआ है। वहाँ इसे गिज्झकूट कहा गया और यह वैपुल्य के दक्षिण में स्थित बताया गया है। संभवत: इस शिखर का आकार गिद्ध के समान होने से यह नाम पड़ा है। चीनी यात्री फाह्यान के अनुसा ...

चतुर्थ बौद्ध संगीति

चतुर्थ बौद्ध संगीति दो भिन्न बौद्ध संगीति बैठकों का नाम है। पहली श्रीलंका में प्रथम ईशा पूर्व हुई थी। चतुर्थ बौद्ध संगीति में थेरवाद त्रिपिटक को ताड़ के पतों पर लिखा गया। यह संगीति कश्मीर के कुण्डलवं में कनिष्क के काल में हुई थी। दूसरी सर्वास्तिव ...

चान

चान, एक बौद्ध धर्म सम्प्रदाय है जो महायान सम्प्रदाय की शाखा है। इसका प्रसार चीन में ६ठी शताब्दी से आरम्भ हुआ जो तामग वंश और सांग वंश के काल में प्रमुख धर्म बन गया। युआन वंश के पश्चात यह चीन के मुख्यधारा के बौद्ध दर्म में मिल गया। चान शब्द, संस्कृ ...

चुल्लवग्ग

चुल्लवग्ग खंधक का दूसरा भाग है जबकि पहले भाग का नाम महावग्ग है। चुल्लवग्ग के बारह खंधक अर्थात् अध्याय हैं- 1 कम्म खंधक, 2 पारिवासिक, 3 समुच्चय, 4 समथ, 5 खुद्दकवत्थु, 6 सेनासन्, 7 संधभेदक, 8 वत्त, 9 पातिमोक्खट्ठपन, 10 भिक्खुगी, 11 पंचसतिक और 12 सत ...

चूलवंश

चूलवंश, पालि भाषा में रचित श्रीलंका के राजाओं का इतिहास है। इसमें ४थी शताब्दी से लेकर १८१५ तक के काल का इतिहास है। इसकी रचना अनेकों वर्षों में अनेकों भिक्षुओं के माध्यम से सम्पन्न हुई, अतः इसमें अनेक तर्ह की काव्य-शैलियाँ मिलतीं हैं। सामान्य मान् ...

चेतना (बौद्ध धर्म)

बौद्ध दर्शन के सन्दर्भ में चेतना मष्तिक की वह वस्तु है जो मन को एक निश्चित दिशा या निश्चित लक्ष्य की ओर प्रेरित करती है। बौद्ध धर्म में चेतना कई रूपों में वर्णित है- ३ महायान अभिधर्म के पाँच सर्वत्रग में से एक ४ कर्म के निर्माण के लिए आवश्यक सबसे ...

जातक

जातक या जातक पालि या जातक कथाएं बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक का सुत्तपिटक अंतर्गत खुद्दकनिकाय का १०वां भाग है। इन कथाओं में भगवान बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथायें हैं। जो मान्यता है कि खुद गौतमबुद्ध जी के द्वारा कहे गए है, हालांकि की कुछ विद्वानों का मानन ...

तथागत

त्रिपटकों में तथागत शब्द का उपयोग गौतम बुद्ध ने स्वयं के लिये किया है। इस शब्द का अर्थ है- तथा+गत = वह जो, वैसा ही चला गया। ततः+स+गत ज्यादा सही होगा। Tathagat bauddhik Unke shishyo une hi sarvparthm tathagat kaha tha.

तारा (बौद्ध धर्म)

महायान तिब्बती बौद्ध धर्म के सन्दर्भ में तारा या आर्य तारा एक स्त्री बोधिसत्व हैं। वज्रयान बौद्ध धर्म में वे स्त्री बुद्ध के रूप में हैं। वे "मुक्ति की जननी" के रूप में मान्य हैं तथा कार्य एवं उपलब्धि के क्षेत्र में सफलता की द्योतक हैं। उन्हें जा ...

तृतीय बौद्ध संगीति

तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन २५० /255 ईसापूर्व पाटलिपुत्र के अशोकराम नामक स्थान पर हुई थी। सम्भवतः यह संगीति सम्राट अशोक के संरक्षण में बुलाई गयी थी किन्तु अशोक के शिलालेखों में कहीं भी इसका उल्लेख नहीं मिलता।

त्रिरत्न

बुद्ध का मतलब जागृत एवं अनंत ज्ञानी मनुष्य, जिसने खुद के प्रयासों से बुद्धत्व प्राप्त किया। ‘बुद्ध’ शाक्यमूनी तथागत गौतम बुद्ध है। बुद्ध = तार्किक ज्ञान विचारक-वि0 कौशल कान्त बौद्ध

थाईलैंड में बौद्ध धर्म

यह लेख थाईलैंड में बौद्ध धर्म के बारे में है, बौद्ध धर्म की व्यापक परिभाषा के लिए विश्व में बौद्ध धर्म देखें। थाईलैंड में बौद्ध धर्म थेरवाद बौद्ध सम्प्रदाय है, जो थाईलैंड की जनसंख्या में बड़े पैमाने पर ९५% है। थेरवाद बौद्ध धर्म थाईलैंड का राष्ट्र ...

थेरगाथा

थेरगाथा, खुद्दक निकाय का आठवाँ ग्रंथ है। इसमें 264 थेरों के उदान संगृहीत हैं। ग्रंथ 21 निपातों में है। पहले निपात में 12 वर्ग हैं, दूसरे निपात में 5 वर्ग हैं और शेष निपातों में एक वर्ग है। गाथाओं की संख्या 1279 हैं। थेरगाथा में परमपद को प्राप्त थ ...

थेरवाद

थेरवाद या स्थविरवाद वर्तमान काल में बौद्ध धर्म की दो प्रमुख शाखाओं में से एक है। दूसरी शाखा का नाम महायान है। थेरवाद बौद्ध धर्म भारत से आरम्भ होकर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व की ओर बहुत से अन्य एशियाई देशों में फैल गया, जैसे कि श्रीलंका, बर्मा, कम्बोड ...

थेरीगाथा

थेरीगाथा, खुद्दक निकाय के 15 ग्रंथों में से एक है। इसमें परमपदप्राप्त 73 विद्वान भिक्षुणियों के उदान अर्थात् उद्गार 522 गाथाओं में संगृहीत हैं। यह ग्रंथ 16 निपातों अर्थात् वर्गों में विभाजित है, जो कि गाथाओं की संख्या के अनुसार क्रमबद्ध हैं। थेरी ...

दशभूमीश्वर

दशभूमीश्वर, महायान बौद्ध साहित्य का एक विशिष्ट पारिभाषिक शब्द जिसका आधार "दशभूमिक" नामक ग्रंथ है। यह महासांधिकों की लोकोत्तरवादी शाखा का ग्रंथ है जिसका सर्वप्रथम उल्लेख आचार्य नागार्जुन ने अपनी "प्रज्ञापारमिता शास्त्र" की व्याख्या में किया है। ना ...

दीक्षाभूमि

दीक्षाभूमि भारत में बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र है। यहां बौद्ध धर्म की पुनरूत्थान हुआ है। महाराष्ट्र राज्य की उपराजधानी नागपुर शहर में स्थित इस पवित्र स्थान पर बोधिसत्त्व डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी ने १४ अक्टूबर १९५६ को पहले महास्थविर चंद्रमणी से ब ...

दीघनिकाय

दीघनिकाय बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक के सुत्तपिटक का प्रथम निकाय है। दीघनिकाय में कुल ३४ सुत्त सूत्र है। यह लम्बे सूत्रों का संकलन है। इन सुत्रों के आकार दीर्घ हैं इसी लिए इस निकाय को दीघनिकाय कहा गया है।

देवदत्त

देवदत्त, सुपब्बुध के पुत्र था और भगवां बुद्ध के समकालीन था। वह बुद्ध से दीक्षित होकर बौद्ध संघ में शामिल हो गये था। प्रारंभ में बौद्धधरम के प्रति उसकी बड़ी आस्था थी और अल्प अवधि में ही उसकी गणना बुद्ध के प्रमुख एकादश शिष्यों में होने लगी। किंतु क ...

धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस

धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस भारतीय बौद्धों एक प्रमुख उत्सव है। दुनिया भर से लाखों बौद्ध अनुयायि एकट्टा होकर हर साल अशोक विजयादशमी एवं १४ अक्टूबर के दिन इसे मुख्य रुप से दीक्षाभूमि, महाराष्ट्र में मनाते है। इस उत्सव को स्थानिय स्तर भी मनाया जाता है। २० ...

धम्मपद

धम्मपद बौद्ध साहित्य का सर्वोत्कृष्ट लोकप्रिय ग्रंथ है। इसमें बुद्ध भगवान् के नैतिक उपदेशों का संग्रह यमक, अप्पमाद, चित्त आदि 26 वग्गों में वर्गीकृत 423 पालि गाथाओं में किया गया है। त्रिपिटक में इसका स्थान सुत्तपिटक के पाँचवें विभाग खुद्दकनिकाय क ...

धर्मत्रात

सर्वास्तिवाद दर्शन के प्रवर्तक गुरुओं एवं ग्रन्थकारों को धर्मत्रात कहते हैं। धर्मत्रात का शाब्दिक अर्थ है- धर्म का रक्षक। चीनी में धर्मत्रात का लिप्यन्तरण यह है: 達磨多羅 और चीनी भाषा में अनुवाद यह है: 法救 ।

नवबौद्ध

नवबौद्ध यह भारत सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा भारत के धर्म परिवर्तित कर बौद्ध बने हुए लोगो के लिए इस्तेमाल किये जाने वाली एक "सरकारी संज्ञा" हैं। तथापि भारतीय बौद्ध अनुयायि नवबौद्ध नामक ग्रूप या समूदाय को नहीं मानते हैं, क्योंकि उनके अनुसार पारं ...

नवयान

नवयान बौद्ध धर्म का एक सम्प्रदाय हैं, जो भारतीय बौद्ध नेता भीमराव आम्बेडकर द्वारा निर्मीत हैं। नवयान का अर्थ है - "नया मार्ग"। इस बौद्ध धर्म के सारे अनुयायि "आम्बेडकरवादी बौद्ध" होते हैं, इन बौद्धों का आम्बेडकर द्वारा निर्धारीत बाईस प्रतिज्ञाओं क ...

नागार्जुन (प्राचीन दार्शनिक)

नागार्जुन शून्यवाद के प्रतिष्ठापक तथा माध्यमिक मत के पुरस्कारक प्रख्यात बौद्ध आचार्य थे। युवान् च्वाङू के यात्राविवरण से पता चलता है कि ये महाकौशल के अंतर्गत विदर्भ देश में उत्पन्न हुए थे। आंध्रभृत्य कुल के किसी शालिवाहन नरेश के राज्यकाल में इनके ...

नीलकण्ठ धारणी

नीलकण्ठ धारणी या महाकरुणा धारणी महायान बौद्ध सम्रदाय की एक धारणी है। इसको चीनी भाषा में 大悲咒; फ़ीनयिन में Dàbēi zhòu, वियतनामी भाषा में Chú đại bi कहते हैं। महाकारुणिकचित्तसूत्र के अनुसार, बोधिसत्त्व अवलोकितेश्वर बोधिसत्त्वों, देवों और राजाओं क ...

पंचम बौद्ध संगीति

पञ्चम बौद्ध संगीति सन १८७१ ई में म्यांमार के मांडले में हुई थी। बर्मा के राजा मिन्दन के सौजन्य से यह आयोजन हुआ था। इसकी अध्यक्षता जगराभीवाम्सा, नरींधाभीधाजा और सुमंगलासामी द्वारा की गयी थी। इस संगीति के दौरान ७२९ शिलाखण्डों पर बौद्ध शिक्षाएँ उत्क ...

पगोडा

"चमयददछथददततदधजजढमथजछइंडोनेशिया, थाइलैंड, चीन, जापान एवं अन्य पूर्वीय देशों में भगवान् बुद्ध अथवा किसी संत के अवशेषों पर निर्मित स्तंभाकृति मंदिरों के लिये किया जाता है। इन्हें स्तूप भी कहते हैं। एक अनुमान यह है कि पगोडा शब्द संस्कृत के "दगोबा" क ...

पटिसंभिदामग्ग

पटिसंभिदामग्ग, खुद्दक निकाय का 12वाँ ग्रंथ है। इसमें आर्यभूमि की प्राप्ति में सहायक चार प्रकार के ज्ञान का निरूपण है। इसलिये यह ग्रंथ "पटिसंभिदाभग्ग" कहलाता है।

शब्दकोश

अनुवाद
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