ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 374

बीजोपचार

फसलों के रोग मुख्यतः बीज, मिट्टी तथा हवा के माध्यम से फैलते हैंl फसलों को बीज-जनित एवं मृदा-जनित रोगों से बचाने के लिए बीजों को बोने से पहले कुछ रासायनिक दवाओं एवं पोषक तत्वों की उपलब्धता बढाने के लिए कुछ जैव उर्वरकों से उपचारित किया जाता है। इसे ...

बेंबर खेती

बेंवर खेती पूरी तरह से जैविक, पारिस्थितिक, प्रकृति के अनुकुल और मिश्रित खेती है। यह जैविक खेती का ही एक रूप है। डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड के कई गांवों में बैगा आदिवासी इस तरह की खेती करके अनाज का उत्पादन करते हैं और अपनी आजीविका चलाते हैं। ...

बैलगाड़ी

bail. jpg, बैलगाड़ी बैलों से खींची जाने वाली गाड़ी या यान है। यह विश्व का सबसे पुराना यातायात का साधन एवं सामान ढ़ोने का साधन है। यह यातायात का एक साधन भी होता था है और मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में प्रयोग में लाया जाता है। इसे बैलों द्वारा खींचा ...

भारत में किसान आत्महत्या

भारत में किसान आत्महत्या १९९० के बाद पैदा हुई स्थिति है जिसमें प्रतिवर्ष दस हज़ार से अधिक किसानों के द्वारा आत्महत्या की रपटें दर्ज की गई है। १९९७ से २००६ के बीच १,६६,३०४ किसानों ने आत्महत्या की।भारतीय कृषि बहुत हद तक मानसून पर निर्भर है तथा मानस ...

भारतीय शस्य

यह फसल लगभग सवाचार करोड़ एकड़ भूमि में भारत में बोई जाती है। यह चारे तथा दाने दोनों के लिये बोई जाती है। यह खरीफ की मुख्य फसलों में है। सिंचाई करके वर्षा से पहले एवं वर्षा आरंभ होते ही इसकी बोवाई की जाती है। यदि बरसात से पहले सिंचाई करके यह बो दी ...

मांस उद्योग

मांस के उत्पादन, पैकिंग, संरक्षण, तथा विपणन के लिये किये जाने वाले आधुनिक ढंग के औद्योगिक पशुपालन को मांस उद्योग कहते हैं। यह दुग्ध उत्पादन या ऊन उत्पादन से बिल्कुल अलग है।

मृदा परीक्षण

कृषि में मृदा परीक्षण या "भूमि की जाँच" एक मृदा के किसी नमूने की रासायनिक जांच है जिससे भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा के बारे में जानकारी मिलती है। इस परीक्षण का उद्देश्य भूमि की उर्वरकता मापना तथा यह पता करना है कि उस भूमि में कौन से तत् ...

राइजोबियम

Rhizobiumरायजोबीयम वेक्ट्रिया फलीदार पौधो की जड़ों की ग्रंथिकाओं में पाये जाते हैं, फलीदार जैसे दाल, मटर, ये Rhizobium ये नाइट्रोजन को नाइट्रेट मे बदल देता है इसी Rhizobium के कारण फलीदार पौधों मे प्रोटीन प्रचुर मात्रा मे पाया जाता है और वायुमंडल ...

राष्ट्रीय औषधीय पादप मिशन

बिहार सरकार द्वारा राष्ट्रीय औषधीय पादप मिशन के अंतर्गत औषधीय पौधों की खेती, आधारभूत संरचना के विकास, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, बाजार व्यवस्था आदि से संबंधित योजना शुरू की है। इसके अंतर्गत फसल के विविधीकरण द्वारा राज्य के किसानों, ग्रामीण युव ...

राष्ट्रीय मत्स्य आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो

राष्ट्रीय मत्स्य आनुवांषिक संसाधन ब्यूरो भारत के जलीय जैव-संसाधनों का सूचीबद्धकरण और संरक्षण करने के लिये स्थापित एक संस्थान है।

रेशमकीट पालन

कृषि पर आधारित कुटीर उद्योग है। ग्र क्षेत्र में ही कम लागत में इस उद्योग में शीघ्र उत्पादन प्रारम्भ किया जा सकता है। कृषि कार्य एवं अन्य घरेलू कार्यों के साथ-साथ इस उद्योग को अपनाया जा सकता है। श्रम जनित होने के कारण इस उद्योग में विभिन्न स्तरों ...

रोपण यंत्र

19वीं शती में अमरीका और यूरोप में रोपणयंत्रों का विकास हुआ। ऐसे वपित्र भारत में भी देखे जाते हैं। इन वपित्रों के सिद्धांत पर, बैलों से चलनेवाले कुछ वपित्र भी बने हैं। ऐसे यंत्र, या तो बीज बोनेवाले होते हैं, या पौधों की कतार में, कुछ दूरी पर, बोने ...

वन्यजीव कृषि

वन्यजीव खेती जैसे भोजन, पारंपरिक चिकित्सा और फाइबर के रूप में रहने वाले जानवरों और वस्तुओं के उत्पादन के लिए एक कृषि सेटिंग में गैर पालतू जानवरों की स्थापना करने के लिए संदर्भित करता है।

वर्मी वाश

वर्मीवाश एक तरल जैविक खाद है जो ताजा वर्मीकम्पोस्ट व केंचुए के शरीर को धोकर तैयार किय जाता है। वर्मीवाश के उपयोग से न केवल उत्तम गुणवत्ता युक्त उपज प्राप्त कर सकते हैं बल्कि इसे प्राकृतिक जैव कीटनाशक के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। वर्मीवाश ...

वृक्षायुर्वेद

वृक्षायुर्वेद एक संस्कृत ग्रन्थ है जिसमें वृक्षों के स्वास्थ्यपूर्ण विकास एवं पर्यावरण की सुरक्षा से समन्धित चिन्तन है। यह सुरपाल की रचना मानी जाती है जिनके बारे में बहुत कम ज्ञात है। सन् १९९६ में डॉ वाय एल नेने एशियन एग्रो-हिस्ट्री फाउन्डेशन, भा ...

शुष्कभूमि कृषि

शुष्कभूमि कृषि सिंचाई किये बिना ही कृषि करने की तकनीक है। यह शुष्कभूमियों के लिये उपयोगी है, यानि वह क्षेत्र जहाँ बहुत कम वर्षा होती है। इसके अंतर्गत उपलब्ध सीमित नमी को संचित करके बिना सिंचाई के ही फसलें उगायी जाती हैं। वर्षा की कमी के कारण मिट् ...

शैवालीकरण

जैव उर्वरक के रूप में बड़े स्तर पर नील हरित शैवाल की वृद्धि करने की प्रक्रिया को शैवालीकरण कहते हैं। इस संकल्पना का प्रारम्भ भारत में हुआ था लेकिन इस तकनीक का वास्तविक रूप में विकास जापान में किया गया। भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ...

संरक्षण कृषि

संरक्षण कृषि, खेती का एक बिल्कुल ही नया मॉडल है, जिसकी मदद से पर्यावरण का ख्याल रखा जाता है। इस अनोखी तरह की खेती में जमीन को या तो बिल्कुल भी नहीं जोता जाता या फिर कम से कम जुताई होती है। इसमें फसल के पौधों को शुरू में नर्सरी में उगाया जाता है। ...

सघन पशुपालन

सघन पशुपालन से आशय पशुपालन के उस तरीके से है जिसमें बहुत कम जगह में अधिक पशुओं को रखा जाता है ताकि कम से कम खर्च में अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके। इसे औद्योगिक पशुपालन या फैक्ट्री पशुपालन भी कहते हैं। बहुत से लोग इसे अनैतिक मानते हैं और इ ...

सस्यविज्ञान

सामान्यतः भूमि का उचित प्रबन्ध कर वैज्ञानिक विधि से फसलों को उगाने का अध्ययन सस्यविज्ञान कहलाता है। दूसरे शब्दों में, पौधों से भोजन, ईंधन, चारा एवं तन्तु की प्राप्ति के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को सस्यविज्ञान कहते हैं। सस्यविज्ञान के अन्तर्गत पाद ...

हँसिया

हंम्सिये की ब्लेड वक्राकार curved होती है। इस वक्राकार ब्लेड का भीतरी भाग तेज धार वाला होता है जिससे फसलों के आधार के विपरीत इसको खीचने/चलाने से फसलें कट जातीं हैं। काटी जाने वाली वस्तु को एक हाथ की मुट्ठी में पकड़कर दूसरे हाँथ में हँसिये को इस प ...

हरित क्रांति

हरित क्रांति सन् १९४०-६० के मध्य कृषि क्षेत्र में हुए शोध विकास, तकनीकि परिवर्तन एवं अन्य कदमों की श्रृंखला को संदर्भित करता है जिसके परिणाम स्वरूप पूरे विश्व में कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। इसने हरित क्रांति के पिता कहे जाने वाले नौरम ...

हरी खाद

कृषि में हरी खाद उस सहायक फसल को कहते हैं जिसकी खेती मुख्यत: भूमि में पोषक तत्त्वों को बढ़ाने तथा उसमें जैविक पदाथों की पूर्ति करने के उद्देश्य से की जाती है। प्राय: इस तरह की फसल को इसके हरी स्थिति में ही हल चलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। ह ...

हल

हल एक कृषि यंत्र है जो जमीन की जुताई के काम आता है। इसकी सहायता से बीज बोने के पहले जमीन की आवश्यक तैयारी की जाती है। कृषि में प्रयुक्त औजारों में हल शायद सबसे प्राचीन है और जहाँ तक इतिहास की पहुँच है, हल किसी न किसी रूप में प्रचलित पाया गया है। ...

ज्वालामुखीय चाप

ज्वालामुखीय चाप ज्वालामुखियों की एक शृंखला होती है जो दो भौगोलिक तख़्तों की संमिलन सीमा में निम्नस्खलित तख़्ते के ऊपर बन जाती है। ऊपर से देखने पर ज्वालामुखियों की यह शृंखला एक चाप के आकार में नज़र आती है। यदि यह किसी महासागर में स्थित हो तो अक्सर ...

द्वीप चाप

द्वीप चाप एक ऐसा द्वीप समूह होता है जिसमें द्वीप, ज्वालामुखी व समुद्र के नीचे उभरी चट्टानें एक चाप के आकार में सुसज्जित होती हैं। यह द्वीप चाप अक्सर दो भौगोलिक प्लेटों की सीमा पर स्थित होते हैं और उस सीमा पर एक प्लेट के दूसरी प्लेट के नीचे दब जान ...

प्रवेशिका

प्रवेशिका या पतली खाड़ी किसी तट पर एक लम्बी और पतली खाड़ी होती है जिसमें सागर का पानी कुछ दूरी तक भूमीय क्षेत्र में अंदर आया हुआ होता है। जब किसी पहाड़ी क्षेत्र में यह हिमानी द्वारा बनता है जो ऐसी प्रवेशिकाओं को फ़्योर्ड कहा जाता है।

शब्दकोश

अनुवाद
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