ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 355

रुद्रम देवी

रानी रुद्रमा देवी काकतीय वंश की महिला शासक थीं। यह भारत के इतिहास के कुछ महिला शासकों में से एक थीं। रानी रूद्रमा देवी या रुद्रदेव महाराजा, 1263 से उनकी मृत्यु तक दक्कन पठार में काकातिया वंश की एक राजकुमारी थी। वह भारत में सम्राटों के रूप में शास ...

रेशम मार्ग

रेशम मार्ग प्राचीनकाल और मध्यकाल में ऐतिहासिक व्यापारिक-सांस्कृतिक मार्गों का एक समूह था जिसके माध्यम से एशिया, यूरोप और अफ्रीका जुड़े हुए थे। इसका सबसे जाना-माना हिस्सा उत्तरी रेशम मार्ग है जो चीन से होकर पश्चिम की ओर पहले मध्य एशिया में और फिर ...

ललितादित्य मुक्तपीड

ललितादित्य मुक्तापीड कश्मीर के कर्कोटा नागवंशी क्षत्रिय वंश के हिन्दू सम्राट थे। उनके काल में कश्मीर का विस्तार मध्य एशिया और बंगाल तक पहुंच गया। उन्होने अरब के मुसलमान आक्रान्ताओं को सफलतापूर्वक दबाया तथा तिब्बती सेनाओं को भी पीछे धकेला। उन्होने ...

लिच्छवि

लिच्छवि नामक जाति ईसा पूर्व छठी सदी में बिहार प्रदेश के उत्तरी भाग यानी मुजफ्फरपुर जिले के वैशाली नगर में निवास करती थी।लिच्छ नामक महापुरुष के वंशज होने के करण इनका नाम लिच्छवि पड़ा अथवा किसी प्रकार के चिह्न धारण करने के कारण ये इस नाम से प्रसिद् ...

लोधी वंश

लोदी वंश खिलजी अफ़्गान लोगों की पश्तून जाति से बना था। इस वंश ने दिल्ली के सल्तनत पर उसके अंतिम चरण में शासन किया। इन्होंने 1451 से 1526 तक शासन किया। दिल्ली का प्रथम अफ़गान शासक परिवार लोदियों का था। वे एक अफ़गान कबीले के थे, जो सुलेमान पर्वत के ...

काकतीय वंश

११९० ई. के बाद जब कल्याण के चालुक्यों का साम्राज्य टूटकर बिखर गया तब उसके एक भाग के स्वामी वारंगल के काकतीय हुए; दूसरे के द्वारसमुद्र के होएसल और तीसरे के देवगिरि के यादव। स्वाभाविक ही यह भूमि काकतीयों के अन्य शक्तियों से संघर्ष का कारण बन गई। का ...

वन्दे मातरम का इतिहास

वन्दे मातरम् का संक्षिप्त इतिहाइस प्रकार है- ७ नवम्वर १८७६ बंगाल के कांतल पाडा गांव में बंकिम चन्द्र चटर्जी ने ‘वंदे मातरम’ की रचना की। १८८२ वंदे मातरम बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में सम्मिलित। मूलरूप से ‘वंदे मातरम’ क ...

वसई की संधि

मराठा प्रदेश के राजाओं के आपस में जो संघर्ष चल रहे थे उनमें पूना के निकट हदप्सर स्थान पर बाजीराव द्वितीय को यशवंतराव होल्कर ने पराजित किया। पेशवा बाजीराव भाग कर बसई पहुँचे और ब्रिटिश सत्ता से शरण माँगी। पेशवा का शरण देना ब्रिटिश सत्ता ने सहर्ष स् ...

वाकाटक

वाकाटक शब्द का प्रयोग प्राचीन भारत के एक राजवंश के लिए किया जाता है जिसने तीसरी सदी के मध्य से छठी सदी तक शासन किया था। उस वंश को इस नाम से क्यों संबंधित किया गया, इस प्रश्न का सही उत्तर देना कठिन है। शायद वकाट नाम का मध्यभारत में कोई स्थान रहा ह ...

वाराणसी का इतिहास

वाराणसी का मूल नगर काशी था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, काशी नगर की स्थापना हिन्दू भगवान शिव ने लगभग ५००० वर्ष पूर्व की थी, जिस कारण ये आज एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। ये हिन्दुओं की पवित्र सप्तपुरियों में से एक है। स्कंद पुराण, रामायण एवं महाभारत ...

विजयनगर साम्राज्य

विजयनगर साम्राज्य मध्यकालीन दक्षिण भारत का एक साम्राज्य था। इसके राजाओं ने 310 वर्ष राज किया। इसका वास्तविक नाम कर्नाटक साम्राज्य था। इसकी स्थापना हरिहर और बुक्का राय नामक दो भाइयों ने की थी। पुर्तगाली इसे बिसनागा राज्य के नाम से जानते थे। इस राज ...

विदेह वंश

प्राचीन काल में आर्यजन अपने गणराज्य का नामकरण राजन्य वर्ग के किसी विशिष्ट व्यक्‍ति के नाम पर किया करते थे जिसे विदेह कहा गया। ये जन का नाम था। कालान्तर में विदेध ही विदेह हो गया। विदेह राजवंश का आरम्भ इक्ष्‍वाकु के पुत्र निमि विदेह के मानी जाती ह ...

शशांक

शशांक, बंगाल का हिंदू राजा था जिसने सातवीं शताब्दी के अंतिम चरण में बंगाल पर शासन किया। वह बंगाल का पहला महान् राजा था। उसने गौड़ राज्य की स्थापना की। मालवा के राजा देवगुप्त से दुरभिसंधि करके हर्षवर्धन की वहन राज्यश्री के पति कन्नौज के मौखरी राजा ...

शाहजी

मालोजीराजे भोसले के पुत्र शाहजीराजे का जन्म 18 मार्च १५९४ ई. को हुआ था।हुु ये प्रकृति से साहसी चतुर, साधनसंपन्न तथा दृढ़निश्चयी थे। व्यक्तिगत स्वार्थ से प्रेरित होते हुए भी, पृष्ठभूमि के रूप में, इन्हें महाराष्ट्र के राजनीतिक अभ्युत्थान का प्रथम ...

शाही राजवंश

शाही राजवंश अफगानिस्तान में स्थापित था। इसकी राजधानी काबुल थी। यह लोग सनातन धर्म के रक्षक थे। भीमपाल died in 1022-1026 कमलुक काबुल 895-921 सुरेन्द्र गिलगित का क 6-7th c. आनन्दपाल शाही 1001-c.1010, जयपाल शाही 964-1001 कल्लर काबुल c. 890-895 खिंगल ...

शिशुनाग वंश

शिशुनाग ४१२ई॰पू॰ गद्दी पर बैठे। महावंश के अनुसार वह लिच्छवि राजा के वेश्या पत्‍नी से उत्पन्‍न पुत्र था। पुराणों के अनुसार वह क्षत्रिय था। इसने सर्वप्रथम मगध के प्रबल प्रतिद्वन्दी राज्य अवन्ति पर वहां के शासक अवंतिवर्द्धन के विरुद्ध विजय प्राप्त क ...

शुंग राजवंश

शुंग वंश प्राचीन भारत का एक शासकीय वंश था जिसने मौर्य राजवंश के बाद शासन किया। इसका शासन उत्तर भारत में १८७ ई.पू. से 75 ई.पू. तक यानि 112 वर्षों तक रहा था। पुष्यमित्र शुंग इस राजवंश का प्रथम शासक था।

शेखावाटी

शेखावाटी उत्तर-पूर्वी राजस्थान का एक अर्ध-शुष्क ऐतिहासिक क्षेत्र है। राजस्थान के वर्तमान सीकर और झुंझुनू जिले शेखावाटी के नाम से जाने जाते हैं इस क्षेत्पर आजादी से पहले शेखावत क्षत्रियों का शासन होने के कारण इस क्षेत्र का नाम शेखावाटी प्रचलन में ...

संगम काल

संगमकाल दक्षिण भारत के प्राचीन इतिहास का एक कालखण्ड है। यह कालखण्ड ईसापूर्व तीसरी शताब्दी से लेकर चौथी शताब्दी तक पसरा हुआ है। यह नाम संगम साहित्य के नाम पर पड़ा है।

संयोगिता चौहान

संयोगिता / ˈ s ə m j oʊ ɡ ɪ t ɑː x ɔː h ɑː n ə) पृथ्वीराजतृतीय की पत्नी थी। पृथ्वीराज के साथ गान्धर्वविवाह कर के वें पृथ्वीराज की अर्धांगिनी बनी थी। भारत के इतिहास की महत्त्वपूर्ण घटनाओं में संयोगिताहरण गिना जाता है। पृथ्वीराज की तेरह रानियों में ...

सतनामी विद्रोह

सनातनी पंथ के अनुयायियों ने सन १६७२ में औरंगजेब के विरुद्ध एक विद्रोह किया था। इस विद्रोह के बारे फारस का इतिहासकार खफ़ी ख़ान लिखता है कि नारनौल में शिकदार राजस्व अधिकारी के एक प्यादे पैदल सैनिक ने एक सतनामी किसान का लाठी से सिर फोड़ दिया। इसे सत ...

सदाशिवराव भाऊ

सदाशिवराव भाऊ मराठा सेना के सेनानायक थे। उन्हे देशी राज्यों के विरुद्ध सैनिक सफलताओं के कारण असाधारण सेनानी समझा गया और पानीपत में मराठों की भीषण पराजय का आवश्यकता से अधिक दोषी भी। अनुकूल प्रकृति होते हुए भी महत्वकांक्षी और स्पष्टवादी होने से, भा ...

सन्नति

सन्नति दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक के उत्तरी भाग में गुलबर्ग जिला में स्थित चितापुर तालुक का एक ग्राम है, जो भीमा नदी के तट पर स्थित है। यह चंद्रपरमेश्वरी मंदिर के लिये प्रसिद्ध है। हाल ही में यहां भारतीय पुरातात्त्विक सर्वेक्षण विभाग द्वारा खुद ...

सफ़्फ़ारी राजवंश

सफ़्फ़ारी राजवंश सीस्तान क्षेत्र से उत्पन्न एक मध्यकालीन राजवंश था जिसने पूर्वी ईरान, ख़ुरासान, अफ़ग़ानिस्तान व बलोचिस्तान पर ८६१ ईसवी से १००२ ईसवी तक राज किया। इस राजवंश की नीव याक़ूब बिन लैथ़ अस-सफ़्फ़ार ने रखी जो एक स्थानीय अय्यार था। उसके पित ...

समुद्रगुप्त

समुद्रगुप्त गुप्त राजवंश के चौथे राजा और चन्द्रगुप्त प्रथम के उत्तराधिकारी थे एवं पाटलिपुत्र उनके साम्राज्य की राजधानी थी। वे वैश्विक इतिहास में सबसे बड़े और सफल सेनानायक एवं सम्राट माने जाते हैं। समुद्रगुप्त, गुप्त राजवंश के चौथे शासक थे, और उनक ...

सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी

इसकी स्थापना गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 में, पुणे महाराष्ट्र में की थी| इसका उद्देश्य नौजवानों को सार्वजनिक जीवन के लिए प्रशिक्षित करना था। इस सोसायटी के सदस्य आजीवन देश की सेवा करने का वचन लेते थे।सोसाइटी उनके परिवार के भरण पोषण के लिए सौ रुपए प् ...

सात्राप

सात्राप या क्षत्राप प्राचीन ईरान के मीदि साम्राज्य और हख़ामनी साम्राज्य के प्रान्तों के राज्यपालों को कहा जाता था। इस शब्द का प्रयोग बाद में आने वाले सासानी और यूनानी साम्राज्यों ने भी किया। आधुनिक युग में किसी बड़ी शक्ति के नीचे काम करने वाले ने ...

सिसोदिया (राजपूत)

सिसोदिया भारतीय राजपूत जाती में पाए जानेवाला एक गोत्र है, जिसका राजस्थान के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यह सूर्यवंशी क्षत्रिय वर्ग से नाता रखते हैं।{{उद्धरण आवश्यक} Jay marwar

सीयक हर्ष

मालवे में परमार राज्य की स्थापना उपेंद्र ने की थी। इसी के वंश में वैरिसिंह द्वितीय नाम का राजा हुआ जिसने प्रतिहारों से स्वतंत्र होकर धारा में अपने राज्य की स्थापना का प्रयत्न किया। सफल न होने पर संभवत: उसने राष्ट्रकूट राजा कृष्ण तृतीय की अधीनता स ...

सुगौली संधि

सुगौली संधि, ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के राजा के बीच हुई एक संधि है, जिसे 1814-16 के दौरान हुये ब्रिटिश-नेपाली युद्ध के बाद अस्तित्व में लाया गया था। इस संधि पर 2 दिसम्बर 1815 को हस्ताक्ष्रर किये गये और 4 मार्च 1816 का इसका अनुमोदन किया गया। ने ...

सेन राजवंश

सेन राजवंश एक राजवंश का नाम था, जिसने १२वीं शताब्दी के मध्य से बंगाल पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। सेन राजवंश ने बंगाल पर १६० वर्ष राज किया। इस वंश का मूलस्थान कर्णाटक।सेन राजाओं के शिलालेखों से पता चलता है कि वे चंद्र वंश के ब्रह्मक्षत्रिय थ ...

सोग़दा

सोग़दा, सोग़दिया या सोग़दियाना मध्य एशिया में स्थित एक प्राचीन सभ्यता थी। यह आधुनिक उज़्बेकिस्तान के समरक़न्द, बुख़ारा, ख़ुजन्द और शहर-ए-सब्ज़ के नगरों के इलाक़े में फैली हुई थी। सोग़दा के लोग एक सोग़दाई नामक भाषा बोलते थे जो पूर्वी ईरानी भाषा थी ...

सोमेश्वर चौहान

सोमेश्वर अजमेर के स्वामी अर्णोराज का कनिष्ठ पुत्र था वह चौहान वंश के राजा थे। जिन्होंने अपने जीवन का कुछ भाग चालुक्य राजा कुमारपाल के दरबार में व्यतीत किया। उसके नाना सिद्धराज जयसिंह के समय गुजरात में ही उसका जन्म हुआ था और वहीं पर चेदि राजकुमारी ...

हरीरूद

हरीरूद या हरी नदी मध्य एशिया की एक महत्वपूर्ण नदी है। यह १,१०० किमी लम्बी नदी मध्य अफ़ग़ानिस्तान के पहाड़ों से शुरू होकर तुर्कमेनिस्तान जाती है जहाँ यह काराकुम रेगिस्तान की रेतों में जाकर सोख ली जाती है। तुर्कमेनिस्तान में इसे तेजेन या तेदझ़ेन के ...

हर्यक वंश

हर्यक वंश की स्थापना ५४४ ई. पू. में बिम्बिसार के द्वारा की गई। यह नागवंश की ही एक उपशाखा थी यह एक क्षत्रिय वंश है जिसका राजनीतिक शक्‍ति के रूप में मगध का सर्वप्रथम उदय हुआ। बिम्बिसार को मगध साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। बिम्बिसार न ...

हिन्द-पहलव साम्राज्य

हिन्द-पहलव साम्राज्य गॉन्डोफर्नी वंश तथा अन्य शासकों, जो कि मुख्यतः मध्य एशिया के शासकों का समूह था, द्वारा प्रथम शताब्दी ईस्वी में शासित एक साम्राज्य था। इस साम्राज्य का विस्तार क्षेत्र वर्तमान में उत्तर-पश्चिमी भारत, पाकिस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान ...

हिन्द-यवन राज्य

हिन्द-यवन राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तरी क्षेत्र में स्थित २०० ईसापूर्व से १० ईसवी तक के काल में यूनानी मूल के राजाओं द्वारा प्रशासित राज्य थे। इस दौरान यहाँ ३० से भी अधिक हिन्द-यवन राजा रहे जो आपस में भी लड़ा करते थे। इन राज्यों का सिलस ...

हिन्दुस्तान घर

हिन्दोस्तान घर सोलहवीं सदी में एक पुर्तगाली संस्था थी जिसने पुर्तगाली साम्राज्य के सभी विदेशी क्षेत्रों का प्रबंधन को संभाला था।

हिन्दू शाही

हिन्दू शाही अफगानिस्तान के अंतिम हिंदू राजवंशों में से एक था जिसने भारत में प्रारंभिक मध्यकाल के दौरान काबुल घाटी और गांधापर आक्रमण किया था। वे तुर्क शाहियों के उत्तराधिकारी बने। काबुल घाटी और गांधार में दो राजवंश थे: क्षत्रिय वंश और ब्राह्मण वंश ...

हेमाद्रिपंत

हेमाद्रि पण्डित देवगिरि के यादव राजा महादेव एवं राजा रामचन्द्र के प्रधानमंत्री थे। वे एक कुशल प्रशासक, वास्तुकार, कवि और आध्यात्मविद थे।हेमाद्रिपंत के प्रधानमंत्रीत्व में यादवकुल का सूर्य अपने चरम पर था। तेरहवी शताब्दी में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड ...

हेलमंद नदी

हेलमंद नदी अफ़्गानिस्तान की सबसे लम्बी नदी है. यह नदी अफ़्गानिस्तान और दक्षिण-पूर्वी इरान के सिस्तान जलाधार इलाक़े की सिंचाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

हैदराबाद के निज़ाम

हैदराबाद के निज़ाम-उल-मुल्क, हैदराबाद स्टेट की एक पूर्व राजशाही थी, जिसका विस्तार तीन वर्तमान भारतीय राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में था। निज़ाम-उल-मुल्क जिसे अक्सर संक्षेप में सिर्फ निज़ाम ही कहा जाता है और जिसका अर्थ उर्दू भाषा म ...

१३९८ हरिद्वार महाकुम्भ नरसंहार

महाकुम्भ, भारत का एक प्रमुख धार्मिक उत्सव है। वार्षिक कुम्भ का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है लेकिन प्रति १२ वर्षों में आयोजित किए जाने वाले महाकुम्भ को देश में चार विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जाता है। इनमें से एक स्थान है हरिद्वार जहाँ पर जनवरी ...

१८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम

१८५७ का भारतीय विद्रोह, जिसे प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, गुर्जर विद्रोह और भारतीय विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है इतिहास की पुस्तकें कहती हैं कि 1857 की क्रान्ति की शुरूआत 10 मई 1857 की संध्या को मेरठ मे हुई थी और इसको समस्त भारतवासी 10 मई ...

शब्दकोश

अनुवाद
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