ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 318

वीर रस

वीर रस, नौ रसों में से एक प्रमुख रस है। जब किसी रचना या वाक्य आदि से वीरता जैसे स्थायी भाव की उत्पत्ति होती है, तो उसे वीर रस कहा जाता है। युद्ध अथवा किसी कार्य को करने के लिए ह्रदय में जो उत्साह का भाव जागृत होता है उसमें वीर रस कहते हैं बुन्देल ...

वोल्गा से गंगा

वोल्गा से गंगा, राहुल सांकृत्यायन की प्रसिद्ध कृति है। यह मातृसत्तात्मक समाज में स्त्री के बर्चस्व की बेजोड़ रचना है। यह राहुल सांकृत्यायन द्वारा लिखी गई बीस कहानियों का संग्रह है। इसकी कहानियाँ आठ हजार वर्षों तथा दस हजार किलोमीटर की परिधि में बँ ...

व्यतिरेक अलंकार

स्वर्ग कि तुलना उचित ही है यहाँ, किन्तु सुर सरिता कहाँ सरयू कहाँ। वह मरों को पार उतारती, यह यहीं से सबको ताँती।। जन्म सिंधु पुनि बंधु विष,दीनन मलिन सकलंक| सीय मुख समता पाव किमी चंद्र बापूरो रंक || om namah shivay

शिवराज भूषण

शिवराज भूषण, कवि भूषण की प्रसिद्ध रचना है। इसमें कुल ३८५ पद्य हैं। भूषण ने अपनी इस कृति की रचना-तिथि ज्येष्ठ वदी त्रयोदशी, रविवार, संम्वत् 1730 को दी है। इस ग्रन्थ में उल्लिखित छत्रपती शिवाजी महाराज विषयक ऐतिहासिक घटनाएँ 1673 ई. तक घटित हो चुकी थ ...

श्लेष अलंकार

उदाहरण १ यहाँ सुबरन का प्रयोग एक बार किया गया है, किन्तु पंक्ति में प्रयुक्त सुबरन शब्द के तीन अर्थ हैं; कवि के सन्दर्भ में सुबरन का अर्थ अच्छे शब्द, व्यभिचारी के सन्दर्भ में सुबरन अर्थ सुन्दर वर, चोर के सन्दर्भ में सुबरन का अर्थ सोना है। उदाहरण ...

संतसाहित्य

गुरु/सन्त साहित्य देखें। संतसाहित्य का अर्थ है- वह धार्मिक साहित्य जो निर्गुणिए भक्तों द्वारा रचा जाए। यह आवश्यक नहीं कि सन्त उसे ही कहा जाए जो निर्गुण उपासक हो। इसके अंतर्गत लोकमंगलविधायी सभी सगुण-निर्गुण आ जाते हैं, किंतु आधुनिक ने निर्गुणिए भक ...

संदिग्ध दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

संदेश रासक

सन्देश रासक, अपभ्रंश में रचित एक काव्य है जिसकी रचना १०००-११०० ई के आसपास मुल्तान के कवि अब्दुर्रहमान ने किया था। यह ग्रन्थ उस अपभ्रंश में है जिससे लहन्दा, पंजाबी और सिन्धी आदि पश्चिमी भारतीय भाषाएँ जन्मी हैं। इस ग्रंथ की पाण्डुलिपियाँ मुनि जिनवि ...

सतसई

सतसई, मुक्तक काव्य की एक विशिष्ट विधा है। इसके अंतर्गत कविगण 713 दोहे लिखकर एक ग्रंथ के रूप में संकलित करते रहे हैं। "सतसई" शब्द "सत" और "सई" से बना है, "सत" का अर्थ सात और सई का अर्थ "सौ" है। इस प्रकार सतसई काव्य वह काव्य है जिसमें सात सौ छंद हो ...

सबद

सबद या शब्द का प्रयोग हिंदी के संत-साहित्य में बहुलता से हुआ है। बड़थ्वाल ने गरीबदास के आधापर लिखा है कि "शब्द, गुरु की शिक्षा, सिचण, पतोला, कूची, बाण, मस्क, निर्भयवाणी, अनहद वाणी, शब्दब्रह्म और परमात्मा के रूप में प्रयुक्त हुआ है" "सबद" या "शब्द ...

समरवीर गोकुला

समरवीर गोकुला सत्रहवीं सदी की किसान क्रान्ति का राष्ट्रीय प्रबन्ध काव्य है। इसके रचयिता राजस्थान के सम्मानित एवं पुरस्कृत कविवर श्री बलवीर सिंह करुण हैं। वे राष्ट्रकवि दिनकर की काव्यचेतना से अनुप्राणित करुण जी नालन्दा की विचार सभा में दिनकर जी के ...

समासोक्ति अलंकार

अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार समासोक्ति अलंकार मे प्रस्तुत वृत्तान्त के वर्णन किये जाने पर विशेषण के साम्य से अप्रस्तुत वृत्तान्त का भी वर्णन किया जाता है | उदाहरण- कुमुदिनी हूँ प्रफूलित भाई, साँझ कलानिधी जोई |

प्रहर्षन अलंकार

समुच्चय अलंकार, एक प्रकार का अलंकार है। जहाँ काम का बनाने वाला एक हेतु मौजूद हो, तो भी, उसी काम के साधक अन्य हेतु भी यदि इकट्ठे हो जायँ, तो समुच्चय अलंकार कहलाता है। उदाहरण- धोखे से धन, धाम, धरा, उसने छीना सब! अन्न वस्त्र भी कर अधीन मोहताज किया अ ...

साकेत

साकेत मैथिलीशरण गुप्त रचित महाकाव्य का नाम है। इसका प्रथम प्रकाशन सन् १९३१ में हुआ था। इसके लिए उन्हें १९३२ में मंगलाप्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ था। साकेत राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की अमर कृति है। इस कृति में राम के भाई लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला ...

साखी

साखी संस्कृत साक्षित्‌ का रूपांतर है। संस्कृत साहित्य में आँखों से प्रत्यक्ष देखने वाले के अर्थ में साक्षी का प्रयोग हुआ है। कालिदास ने कुमारसंभव में इसी अर्थ में इसका प्रयोग किया है। |सिद्धों के अपभ्रंश साहित्य में भी प्रत्यक्षदर्शी के रूप में स ...

साठोत्तरी हिन्दी साहित्य

साठोत्तरी हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य के इतिहास के अन्तर्गत सन् 1960 ई० के बाद मुख्यतः नवलेखन युग से काफी हद तक भिन्नता की प्रतीति कराने वाली ऐसी पीढ़ी के द्वारा रचित साहित्य है जिनमें विद्रोह एवं अराजकता का स्वर प्रधान था। हालाँकि इसके साथ-साथ ...

सामान्य प्रवृत्त दोष

काव्य में एक प्रकार का अर्थ दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी

साहित्य अकादमी पुरस्कार, सन् १९५५ से प्रत्येक वर्ष भारतीय भाषाओं की श्रेष्ठ कृतियों को दिया जाता है, जिसमें एक ताम्रपत्र के साथ नक़द राशि दी जाती है। नक़द राशि इस समय एक लाख रुपए हैं। साहित्य अकादेमी द्वारा अनुवाद पुरस्कार, बाल साहित्य पुरस्कार ए ...

सुजान चरित्र

सुजानचरित्र सूदन नमक कवि की वीररसप्रधान कृति है। इसमें कवि ने भरतपुर के शासक सुजानसिंह के युद्धों का वर्णन किया है। इस प्रबंध काव्य में संवत्‌ 18021745 AD से लेकर संवत्‌ 18101753 AD वि. के बीच सुजानसिंह द्वारा किगए ऐतिहासिक युद्धों का विशद वर्णन ...

सुदामा चरित

सुदामा चरित कवि नरोत्तमदास द्वारा अवधी भाषा में रचित काव्य-ग्रंथ है। इसकी रचना संवत १६०५ के लगभग मानी जाती है। इसमें एक निर्धन ब्राह्मण सुदामा की कथा है जो महान कृष्ण भक्त था, जो बालपन में कृष्ण का मित्र भी था। इस ब्राह्मण की कथा श्रीमद् भागवत मह ...

सुरति मिश्र

सूरति मिश्र हिन्दी के रीतिकाल के कवि थे। रीति परंपरा के समर्थ कवि एवं टीकाकार के रूप में मिश्र जी का महत्वपूर्ण स्थान है। इनका जन्म आगरा में कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में हुआ ता। इनके पिता का नाम सिंहमणि मिश्र था। ये बल्लभ संप्रदाय में दीक्षित ह ...

सुरेन्द्र चौधरी

सुरेन्द्र चौधरी हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में मुख्यतः कथालोचक के रूप में मान्य हैं। हिन्दी कहानी के शीर्ष आलोचकों में उनका स्थान प्रायः निर्विवाद रहा है।

सूरज पालीवाल

सूरज पालीवाल का जन्म 8 मई 1951 को मथुरा, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने हिन्दी साहित्य में एम०ए० व पी०एचडी० करने के पश्चात प्रत्रकारिता, अध्यापन एवं आलोचनात्मक लेखन कार्य में सक्रिय हैं। प्रो. पालीवाल प्रसिद्ध आलोचक, संपादक एवं शिक्षाविद हैं। ...

सूरसागर

सूरसागर, ब्रजभाषा में महाकवि सूरदास द्वारा रचे गए कीर्तनों-पदों का एक सुंदर संकलन है जो शब्दार्थ की दृष्टि से उपयुक्त और आदरणीय है। इसमें प्रथम नौ अध्याय संक्षिप्त है, पर दशम स्कन्ध का बहुत विस्तार हो गया है। इसमें भक्ति की प्रधानता है। इसके दो प ...

हिंदी प्रकाशक सूची

हिंदी मै पुस्तक प्रकाशन करने वाले संस्थानौं की सूची- अपोलो प्रकाशन जय भारतीय प्रकाशन पराग प्रकाशन आर्य प्रकाशन मंडल पंचशील प्रकाशन डायमंड पाकेट बुक हिन्दी साहित्य सदन प्रकाशन संस्थान फुल सर्किल पबल्शिंग इण्डियन बुक बैंक एम. एन. पब्लिशर्स एण्ड डिस ...

हिंदी साहित्य

हिन्दी भारत और विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। उसकी जड़ें प्राचीन भारत की संस्कृत भाषा में तलाशी जा सकती हैं। परंतु हिन्दी साहित्य की जड़ें मध्ययुगीन भारत की अवधी, मागधी, अर्धमागधी तथा मारवाड़ी जैसी भाषाओं के साहित्य में पा ...

हिन्दी उपन्यास

हिंदी उपन्यास का आरम्भ श्रीनिवासदास के "परीक्षागुरु से माना जाता है। हिंदी के आरम्भिक उपन्यास अधिकतर ऐयारी और तिलस्मी किस्म के थे। अनूदित उपन्यासों में पहला सामाजिक उपन्यास भारतेंदु हरिश्चंद्र का "पूर्णप्रकाश और चंद्रप्रभा नामक मराठी उपन्यास का अ ...

हिन्दी की साहित्यिक प्रवृत्तियाँ

खड़ी बोली की षष्ठ धारा है नवगीतवाद। बच्चन, नीरज, वीरेंद्र मिश्र, शंभुनाथ सिंह, रंग, रमानाथ अवस्थी, ठाकुरप्रसाद सिह, अंचल, सुरेंद्र तिवारी, सोम, कमलेश, केदारनाथ सिंह, गिरधर गोपाल, रामावतार त्यागी, गिरजाकुमार माथुर, कैलास वाजपेयी, राही, सुमन और नेप ...

हिन्दी की सौ श्रेष्ठ पुस्तकें

चित्र:|350px| हिन्दी की सौ श्रेष्ठ पुस्तकें जयप्रकाश भारती की रचना है। इसमें सौ श्रेष्ठ हिन्दी पुस्तकों का प्रत्येक के लिये तीन-चार पृष्ठों में सकारात्मक परिचय दिया गया है। किताब में विवेचित अधिकतर पुस्तकें पुरस्कृत हैं और अपने विषय और प्रस्तुति ...

हिन्दी के दस सर्वश्रेष्ठ

हिन्दी के दस सर्वश्रेष्ठ बीसवीं शताब्दी तक के हिन्दी साहित्यकारों एवं हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं की रचनाओं के सन्दर्भ में श्रेष्ठ आलोचकों द्वारा किये गये उल्लेखों-विवेचनों पर आधारित मुख्यतः दस-दस उत्कृष्ट साहित्यकारों या फिर साहित्यिक कृतिय ...

हिन्दी गद्यकार

कमलकान्‍त बुधकर कृष्ण बलदेव वैद गिरिराज किशोर कमलेश्वर कर्मेंदु शिशिर काशीनाथ सिंह कामतानाथ गीतांजली श्री कन्हैयालाल नंदन कृष्णा सोबती कृष्ण बिहारी कृष्ण चंदर क़ुर्रतुल ऎन हैदर

हिन्दी ग्रन्थों की सूची

रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास सूरसागर - सूरदास साखी - कबीरदास सतसई - बिहारी गोदान - मुंशी प्रेमचन्द कामायनी - जयशंकर प्रसाद प्रिय प्रवास - अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध रश्मिरथी - रामधकठपुतलियों का दौर - शिवकुमार श्रीवास्तव ारी सिंह दिनकर

हिन्दी पत्रिकाएँ

हिन्दी पत्रिकाएँ सामाजिक व्‍यवस्‍था के लिए चतुर्थ स्‍तम्‍भ का कार्य करती हैं और अपनी बात को मनवाने के लिए एवं अपने पक्ष में साफ-सूथरा वातावरण तैयार करने में सदैव अमोघ अस्‍त्र का कार्य करती है। हिन्दी के विविध आन्‍दोलन और साहित्‍यिक प्रवृत्तियाँ ए ...

हिन्दी राष्ट्र या सूबा हिन्दुस्तान

हिन्दी राष्ट्र या सूबा हिन्दुस्तान भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के हिन्दी भाषा के इतिहासकार धीरेन्द्र वर्मा द्बारा लिखी गई एक पुस्तक है। पुस्तक लीडर प्रेस, इलाहाबाद से 1930 ई में प्रकाशित हुई थी।

हिन्दी-काव्य में विरह की अभिव्यक्ति

हिन्दी-काव्य में विरह की अभिव्यक्ति साहित्य का सर्वोत्कृष्ट रस श्रृंगार है और इस श्रृंगार का भी परिष्कृत रूप विरह -वर्णन में मिलता है। श्रृंगार के संयोग पक्ष में तो बाह्य चेष्टाओं और काम क्रीड़ाओं की ही अधिकता होती है,ह्रदय की सूक्ष्म भाव वृत्तिय ...

शब्दकोश

अनुवाद
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