ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 316

अंतर्पाठ

अंतर्पाठ किसी एक लिखाई या पाठ के अर्थ को किसी दूसरे पाठ द्वारा निर्धारित या परिवर्तित करने को कहते हैं। अंतर्पाठ का प्रयोग पाठक को प्रभावित करने के लिये और पाठ्य सामग्री में अर्थों की गहराई बढ़ाने के लिये करा जाता है।

सलीम (प्रेमचंद)

सलीम प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास कर्मभूमि का प्रमुख चरित्र है। वह अमरकांत का साथी औ्र शहर के रईस एवं प्रभावशाली राजनेता हाफिज अली, जो बनारस की म्युनिसिपैलिटी के मेयर हैं, का पुत्र है। वह भारतीय लोक सेवा की तैयारी करने वाले युवकों का प्रतिनिधी है ...

विसूत्र

सामान्य सत्य, सिद्धान्त या प्रेक्षण को अभिव्यक्त करने वाली संक्षिप्त लोकोक्तियों को विसूत्र कहते हैं। जैसे- अहिंसा परमो धर्मः, अति सर्वत्र वर्जयेत आदि। पहले एफोरिज्म शब्द का उपयोग हिप्पोक्रेटस के एफोरिज्म के लिये ही किया जाता था। उसकी कृति का पहल ...

द सेकेंड सेक्स

द सेकेंड सेक्स सिमोन द बोउआर द्वारा फ़्रान्सीसी भाषा में लिखी गई पुस्तक है जिसने स्त्री संबंधी धारणाओं और विमर्शों को गहरे तौपर प्रभावित किया है। इसे नारीवाद पर लिखी गयी सबसे उत्कृष्ट और लोकप्रिय पुस्तकों में गिना जाता है। उन्होंने यह किताब 38 सा ...

अंजली भारती

अंजली भारती का पहला उपन्यास "घर-परिवाऔर रिश्ते" है, जिसे पहले सावित्री प्रकाशन और फिर बाद में आत्माराम एंड संस ने प्रकाशित किया।। उनके उपन्यास "स्वयंसिद्धा" को आत्माराम एण्ड सन्स ने मई ०२, २००७ को प्रकाशित किया था। यह उस स्त्री की कहानी है जिससे ...

अंबिकादत्त व्यास

भारतेन्दु मण्डल के प्रसिद्ध कवि अंबिकादत्त व्यास का जन्म सन् १८५८ ई. में तथा मृत्यु सन् १९०० ई. में हुई। इन्होंने कवित्त सवैया की प्रचलित शैली में ब्रजभाषा में रचना की। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के समकालीन हिन्दी सेवियों में पंडित अंबिकादत्त व्यास बह ...

अतिशयोक्ति अलंकार

अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार है इसका उदाहरण है: पड़ी अचानक नदी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार । राजा ने सोचा इस बार, तब तक चेतक था उस पार ।। 2: हनुमान की पूछं मे लगन न पाई आग । लंका सारी जल गई गए निसाचर भाग । बालों को ...

अत्युक्ति अलंकार

अत्युक्ति अलंकार एक अलंकार है। काव्य में जहाँ किसी की झूठी वीरता, वियोग, उदारता, प्रेम, सुन्दरता, यश आदि का बहुत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया जाता है कि देखने में हास्यास्पद लगे तो वहां अत्युक्ति अलंकार होता है।जैसे- इत आवति चलि जेउत चली छः सातक हाथ। च ...

अधिक पद दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

अनधिकृत दोष

काव्य में एक प्रकार का अर्थ दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

अनुप्रास

अलंकार का शाब्दिक अर्थ है आभूषण अर्थात गहना ।जिस प्रकार नारी अलंकार से युक्त होने पर सुंदर दिखती है उसी प्रकार काव्य होता है। महाकवि केशव ने अलंकारों को काव्य का अपेक्षित गुण माना है। उनके अनुसार "भूषण बिनु न विराजहि कविता,वनिता,मित्त।"उनकी दृष्ट ...

अप्रतीत दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

अमृत पदार्थ दोष

काव्य में एक प्रकार का वाक्य दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

अमृतसर आ गया है

अमृतसर आ गया है ", भीष्म साहनी द्वारा लिखित एक कहानी है। यह किताब भारत के विभाजन के परिदृश्य पर लिखी गई है। कहानी में शरणार्थियों के एक समूह का पाकिस्तान से भारत के सीमावर्ती शहर अमृतसर की ओर यात्रा के दौरान के भयावहता और विनाश का वर्णन हैं। साहन ...

अश्लील दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

असंगति अलंकार

अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार। असंगति - कारण और कार्य में संगति न होने पर असंगति अलंकार होता है । जैसे - हृदय घाव मेरे पीर रघुवीरै । घाव तो लक्ष्मण के हृदय में है, पर पीड़ा राम को है, अत: असंगति अलंकार है । 2- उरझ ...

इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐंदुई ऐ ऐंदुस्तानी

इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐंदुई ऐ ऐंदुस्तानी के लेखक गार्सा द तासी हैं। इस ग्रंथ को उर्दू - हिन्दी अथवा हिन्दुस्तानी साहित्य का सर्व प्रथम इतिहास ग्रंथ माना जाता है। इसमें हिन्दी उर्दू के अनेक कवियों और लेखकों की जीवनियाँ, ग्रंथ विवरण और उद्धरण हैं ...

कबीर

कबीर या भगत कबीर 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। इनकी रचनाओं ने हिन्दी प्रदेश के भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। उनका लेखन सिखो ...

कबीर के आलोचक (पुस्तक)

डॉ॰ धर्मवीर द्वारा लिखित इस पुस्तक में हिंदी साहित्य में कबीपर लिखने वाले पूर्ववर्ती आलोचकों के लेखन का विश्लेषणात्मक एवं दलित विमर्श की दृष्टि से अध्ययन किया गया है। इसमें पं। हजारीप्रसाद द्विवेदी के कबीर संबंधी विश्लेषण को ब्राह्मणवादी आलोचक की ...

कमलेश भट्ट कमल

कमलेश भट्ट कमल गाजियाबाद स्थित हिन्दी लेखक हैं। ग़ज़ल, कहानी, हाइकु, साक्षात्कार, निबन्ध, समीक्षा एवं बाल-साहित्य आदि विधाओं में रचना करते हैं।

कविता कौमुदी

कविता कौमुदी हिन्दी के लोककवि रामनरेश त्रिपाठी की रचना है। यह उन 15 हजार से भी अधिक लोकगीतों का संग्रह है जिन्हें त्रिपाठी जी ने 1925 और 1930 के बीच अवध के गाँव-गाँव में घूम कर संग्रह किया था। सन 1928 के अंत में प्रकाशित इस पुस्तक की प्रथम प्रति ...

कामायनी

कामायनी हिंदी भाषा का एक महाकाव्य है। इसके रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। यह आधुनिक छायावादी युग का सर्वोत्तम और प्रतिनिधि हिंदी महाकाव्य है। प्रसाद जी की यह अंतिम काव्य रचना 1936 ई. में प्रकाशित हुई, परंतु इसका प्रणयन प्राय: 7-8 वर्ष पूर्व ही प्रारंभ ...

किशोर लेखनी

किशोर लेखनी हिन्दी की एक बाल पत्रिका है। इसका संपादन प्रकाशन देवेन्‍द्र कुमार देवेश द्वारा अपनी किशोर वय में किया गया था। इसका सूत्र वाक्‍य था--किशोरों की, किशोर द्वारा, किशोरों के लिए। पत्रिका के माध्‍यम से बालकिशोरों के साहित्‍य में बालकिशोरों ...

कुण्डलिया

कुंडलिया दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है। इस छंद के ६ चरण होते हैं तथा प्रत्येकचरण में २४ मात्राएँ होती है। इसे यूँ भी कह सकते हैं कि कुंडलिया के पहले दो चरण दोहा तथा शेष चार चरण रोला से बने होते है। दोहा के प्रथम एवं तृतीय चरण में १३-१३ मात् ...

कुबेर नाथ राय

कुबेरनाथ राय हिन्दी ललित निबन्ध परम्परा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर, सांस्कृतिक निबन्धकाऔर भारतीय आर्ष-चिन्तन के गन्धमादन थे। उनकी गिनती आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी और विद्यानिवास मिश्र जैसे ख्यातिलब्ध निबन्धकारों के साथ की जाती है।

कृष्ण गीतावली

कृष्ण गीतावली गोस्वामी तुलसीदास की एल लघु काव्य कृति है। इसमें ६१ पदों के माध्यम से कृष्ण चरित को काव्य का विषय बनाया गया है। यह ग्रन्थ ब्रजभाषा में है - कबहुं न जात पराए धाम ही। खेलत ही निज देखों आंगन सदा सहित बलराम ही। ।

शब्दकोश

अनुवाद
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