ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 307

छोटा भीम

छोटा भीम एक भारतीय कार्टून फ़िल्म या धारावाहिक है जो २००८ साल से पोगो टेलीविजन चैनल पर प्रदर्शित हो रही है। ये कार्टून फ़िल्म बच्चों को बेहद पसंद आती है।

बेन १० (टीवी शृंखला)

बेन १० एक अमेरिकी एनिमेटेड शृंखला है जिसकी रचना "मैन ऑफ़ एक्शन" और निर्माण कार्टून नेटवर्क स्टूडियोज़ ने किया है। यह शृंखला एक लड़के के उपर आधारीय है जिसे एक घडी नुमा परग्रही वस्तु मिलती है जिसे "ओम्नीट्रिक्स" मिलती है। कलाई पर बाँधने के बाद यह उ ...

मोटू पतलू

मोटू पतलू भारत में तैयार किया गया बच्चों का कार्टून शो है। इसके मुख्य पात्र मोटू और पतलू हैं। यह दोनों मित्र हैं। दोनों हर बार कोई हास्यप्रद समस्याओं में घिर जाते हैं और सौभाग्य से बच निकलते हैं। शो में उनके अन्य सहयोगियों के नाम घसीटा राम, इंस्प ...

इस्माईल लहरी

ईस्माईल लहरी दैनिक भास्कर के जाने-माने कार्टूनिस्ट हैं और इनेक कार्टून अखबार ही नहीं सोशल मिडिया पर भी चाहे रहते हैं। इनके कार्टून में राजनीती से लेकर किसी भी घटना का जिक्र बहुत ही अच्छे व्यंग्य के साथ होता हैं।

चंडी लहिड़ी

चंडी लहिड़ी पश्चिम बंगाल से एक भारतीय कार्टूनिस्ट थे। उन्होंने वर्ष 1952 में एक पत्रकार के रूप में अपने कॅरियर की शुरूआत की थी और अगले एक दशक में पूर्णकालिक कार्टूनिस्ट बनकर उभरे थे। प्रारंभिक दौर में वे दैनिक लोकसेवक पत्रिका में संवाददाता के तौप ...

मातृश्री मीडिया पुरस्कार

मातृश्री मीडिया अवार्ड: पत्रकारिता के विभिन क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिए जाने वाले पुरुस्कारों की एक श्रंखला जिसकी शुरूआत भारत में इमरजेंसी के दिनों से हुई. १९७६ से लगातार ये पुरूस्कार प्रति वर्ष नई दिल्ली में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक ...

मार्टिन नोडल

मार्टिन नोडल एक अमेरिकी कार्टूनिस्ट और कलाकार थे, जिन्हें सुपरहीरो ग्रीन लैंटर्ण के निर्माता के रूप में जाना जाता है। उनके कुछ काम उपनाम मार्ट डेलन के नाम से भी प्रकाशित हुए। फिलाडेल्फिया, पेंसिल्वेनिया में जन्मे नोडल के माता-पिता यहूदी आप्रवासी ...

हैरी लैम्पर्ट

हैरी लैम्पर्ट एक अमेरिकी कार्टूनिस्ट और लेखक थे। न्यू यॉर्क शहर में जन्मे हैरी ने 16 वर्ष की उम्र सही काम करना शुरू कर दिया था, और उन्होंने उस समय पोपी द सेलर, बेटी बूप और कोको द क्लाउन जैसे कार्टून चरित्रों का चित्रण किया। 40 के दशक में वह डीसी ...

चन्दर

कार्टूनिस्ट चन्दर तारा चन्दर/टीसी चन्दर का जन्म २ जुलाई १९५४ को उत्तरप्रदेश के आगरा में हुआ। चन्दर की शिक्षा आगरा और मध्यप्रदेश के बिजरौनी, बामौर कलां, कौलारस, नरवर, मगरोनी, शिवपुरी आदि स्थानों में हुई। चन्दर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ आ ...

प्राण कुमार शर्मा

कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा जिन्हें प्राण के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय कॉमिक जगत के सबसे सफल और लोकप्रिय कार्टूनिस्ट प्राण ने १९६० से कार्टून बनाने की शुरुआत की। प्राण को सबसे ज्यादा लोकप्रिय उनके पात्र चाचा चौधरी और साबू ने बनाया। सर्वप्र ...

सतीश आचार्य

कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य का जन्म कर्नाटक में उडुपी के निकट कुन्दपुर में हुआ। मेंगलोर विश्वविद्यालय से फाइनेंस में एमबीए सतीश वर्तमान में मिड-डे मुंबई में २००३ से ग्राफिक एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। बतौर कार्टूनिस्ट सतीश १९९४ से विभिन्न पत्र पत्र ...

हरिओम तिवारी

कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी का जन्म ग्वालियर जिले के बिलोआ गाँव में १५ अगस्त १९६८ को हुआ। गणित से हायर सेकेंडरी और सोइल साइन्स से एम् एस सी हरिओम की स्कूल जीवन से ही कार्टून बनाने में रूचि थी। हरिओम ने अपना पहला कार्टून एक प्रतियोगिता के लिए बनाया थ ...

साबू

साबू प्राण कुमार शर्मा द्वारा रचित बाल काॅमिक्स पत्रिका चाचा चौधरी के दूसरे प्रमुख पात्र का नाम है। इनका प्रकाशन डायमण्ड कॉमिक्स करती है। साबू जूपीटर का निवासी है।

स्टैंड बाय मी डोरेमोन

स्टैंड बाय मी डोरेमोन 8 अगस्त 2014 को रिलीज़ हुई एक जापानी एनिमेटेड फिल्म है । पटकथा तकासाकी यामाजाकी है, जिन्होंने "द थर्ड सनसेट श्रृंखला, अनन्त 0 और इतने पर काम किया। निर्देशक रियूची यागी और ताकाशी यामाजाकी के सह-निर्देशक हैं जिन्होंने दोस्तों: ...

पोम्पी

पोम्पी नूतन कॉमिक्स का एक मजेदार चरित्र था। पोम्पी एक बिलौटा था जिसकी कहानियाँ कुछ हद तक आपको डायमंड कॉमिक्स के पलटू की याद दिला देंगी. जानवर होते हुए भी वह इंसानों की भाषा बोलता था और कुछ कहानियों में इंसानों के साथ भी उसे दिखाया गया है। पोम्पी ...

बिल्लू

बिल्लू एक भारतीय काॅमिक्स पात्र है जिसकी रचना भारतीय कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा ने सन् १९७३ में किया था। इसकी प्रकाशन डायमण्ड पब्लिकेशन करती है। इसकी कहानियों की पृष्ठभूमि में दिल्ली की बीते सत्तर व अस्सी के दशक की झलक देखने मिलती है। बिल्लू ए ...

शैलचित्र

चित्रांकन और रेंखांकन मनुष्य जाति की सबसे प्राचीन कलाएं हैं। आदि मानव गुफाओं की दीवारों का प्रयोग कैनवास के रूप में किया करता था। उसने रेखांकन और चित्रांकन शायद अपने प्रतिवेश को चित्रित करने अथवा अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का दृश्य रिकार्ड कर ...

किरमिच

किरमिच या कानवास मोटा, मजबूत, सरल-बुनाई वाला कपड़ा है। इसका उपयोग जूते, तम्बू, पोत आदि बनाने में होता है। इसके उपर पेंट करने के लिये भी इसका उपयोग किया जाता है।

वर्णक

वर्णक या रंगद्रव्य या रंजक या पिगमेन्ट ऐसे पदार्थ को कहते हैं जो अपने ऊपर गिरने वाले प्रकाश को किसी अन्य रंग में बदलकर प्रतिबिम्बित करे। ऐसे पदार्थ अपने ऊपर गिरने वाले प्रकाश की किरणों में से कुछ तरंगदैर्घ्य वाली किरणें सोख लेते हैं और बाकी को प् ...

राष्ट्रीय पुरातात्विक संग्रहालय, नई दिल्ली

नई दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय भारत का सबसे बढ़िया संग्रहालय है। यह जनपथ मार्ग पर मौलाना आजाद मार्ग के चौराहे के निकट स्थित है। यहां अनेक प्रकार के संग्रह हैं, जहाँ प्राग-ऐतिहासिक काल से लेकर आधुनिक काल तक की कलाकृतियाँ हैं। यह संस्कृति ...

पिथोरा चित्रकला

पिथोरा चित्रकला एक प्रकार की चित्रकला है। जो भील जनजाति के सबसे बड़े त्यौहार पिठौरा पर घर की दीवारों पर बनायी जाती है।मध्य प्रदेश के पिथोरा क्षेत्र मे इस कला का उद्गम स्थल माना जाता है। इस कला के विकास में भील जनजाति के लोगों का योगदान उल्लेखनीय ...

कालीघाट चित्रकला

कालीघाट चित्रकला का उद्गम् लगभग १९वीं सदी में कोलकाता के कालीघाट मंदिर में हुआ माना जाता है। इस चित्रकला में मुख्यतः हिन्दू देवी-देवताओं तथा उस समय पारम्परिक किमवदंतियों के पात्रों के चित्रण विशेषतः देखने को मिलते हैं। प्राचीन समय में इस कला के च ...

जैनशैली

सातवीं से बारहवीं शताब्दी तक पूरे भारत में इस शैली का प्रमुख स्थान था। इस शैली का प्रथम प्रमाण सित्तन्वासल की गुफा में बनी पांच जैनमूर्तियों से प्राप्त होता हैं। यह जैनमूर्तियां सातवी शताब्दी के पल्लव नरेश महेन्द्र वर्मन के शासन काल में बनी थी। प ...

दक्क्न शैली

यह एक प्रमुख भारतीय चित्रकला शैली हैं। इस शैली का प्रधान केन्द्र बीजापुर था किन्तु इसका विस्तार गोलकुण्डा तथा अहमदनगर राज्यों में भी था। रागमाला के चित्रों का चित्रांकन इस शैली में विशेष रूप से किया गया। इस शैली के महान संरक्षकों में बीजापुर के अ ...

पटना या कम्पनी शैली

पटना कलम एक प्रमुख भारतीय चित्रकला शैली हैं। तत्कालीन जनसामान्य के आम पहलुओं के चित्रण के लिए प्रसिद्ध पटना या कम्पनी चित्रकला शैली का विकास मुगल साम्राज्य के पतन के बाद हुआ जब चित्रकारों ने पटना तथा उसके समीपवर्ती क्षेत्रों को अपना विषय बनाया। इ ...

पहाड़ी चित्रकला शैली

. विद्वानों के अनुसार जम्मू और कश्मीर प्रदेश में स्थित बसोहली पहाड़ी शैली को विकास का पालन कहा जाता है। सन् १९१६ में ए के स्वामी ने पहाड़ी शैली को दो -अलग शैली के रूप में माना।१का्नगडा्न २बसोहली। === गुलेरी शैली

पाल शैली

यह एक प्रमुख भारतीय चित्रकला शैली हैं। ९वीं से १२वीं शताब्दी तक बंगाल में पालवंश के शासकों धर्मपाल और देवपाल के शासक काल में विशेष रूप से विकसित होने वाली चित्रकला पाल शैली थी। पाल शैली की विषयवस्तु बौद्ध धर्म से प्रभावित रही हैं।

भारत के गुफाचित्र

भारत की लगभग सभी प्राचिनतम चित्रकलाएँ गुफाओं में ही बची पड़ीं हैं क्योंकि प्राचीन भारत में निर्मित बहुत कम भवन अब बचे रह गये हैं। बची हुईं सबसे प्राचीन भारतीय गुफाचित्र की कला या शैलकलाएँ प्रागैतिहासिक काल में ईसापूर्व ३० हजार वर्ष पहले निर्मित ह ...

मधुबनी चित्रकला

मधुबनी चित्रकला अथवा मिथिला पेंटिंग मिथिला क्षेत्र जैसे बिहार के दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी एवं नेपाल के कुछ क्षेत्रों की प्रमुख चित्रकला है। प्रारम्भ में रंगोली के रूप में रहने के बाद यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ो, दीवार ...

मुगल शैली

यह एक प्रमुख भारतीय चित्रकला शैली हैं। मुगल शैली का विकास चित्रकला की स्वदेशी भारतीय शैली और फारसी चित्रकला की सफाविद शैली के एक उचित संश्लेषण के परिणामस्वरुप हुआ था। इस शैली की शुरूआत बाबर 1526-30 से मानी जाती है।

मुग़ल चित्रकारी

मुगल चित्रकला दक्षिण एशियाई चित्रकला की एक विशेष शैली है जो आम तौपर पुस्तक चित्र के रूप में या एलबम में रखे जाने योग्य एक कार्य के रूप में होता है। यह पारसी की सूक्ष्म चित्रकारी से पैदा हुई है और भारतीय हिंदू, जैन, बौद्ध और प्रभावों के साथ सोलहवी ...

मैसूर चित्रकला

मैसूर चित्रकला दक्षिण भारत की एक महत्वपूर्ण शास्त्रीय चित्रकला है जिसका उद्भव मैसूर के आसपास हुआ और जिसे मैसूर के राजाओं ने प्रोत्साहित किया।

यशोधर पंडित

यशोधर पण्डित जयपुर के राजा जय सिंह प्रथम के दरबार के प्रख्यात विद्वान थे जिन्होने कामसूत्र की ‘जयमंगला’ नामक टीका ग्रंथ की रचना की। इस ग्रन्थ में उन्होने वात्स्यायन द्वारा उल्लिखित चित्रकर्म के छः अंगों की विस्तृत व्याख्या की है। रूपभेदः प्रमाणान ...

रघुराजपुर

रघुराजपुर ओड़िसा के पुरी जिला का विरासत हस्तशिल्प ग्राम है। यह अपने सुन्दर पट्टचित्रों के कारण प्रसिद्ध है। पट्टचित्र की कलाकारी का इतिहास ५वीं शती तक जाता है। इसके अलावा यह गोतिपुआ नृत्य के लिये भी प्रसिद्ध है जो ओड़िसी नृत्य का पूर्ववर्ती नृत्य ...

शेखावाटी चित्रकारी

Glories by Kiitsu Suzuki, early 19ty century.jpg|अंगूठाकार|भारतिय चित्रकारी" शेखावाटी चित्रकारी दिवारो को सजाने के लिये की जाती है। यह राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में उत्पन्न हुई थी। इस क्षेत्पर आजादी से पहले शेखावत क्षत्रियों का शासन होने के का ...

अपभ्रंश शैली

यह एक प्रमुख भारतीय चित्रकला शैली हैं। यह पश्चिम भारत में विकसित लघु चित्रों की चित्रकला शैली थी, जो ११वीं से १५वीं शताब्दी के बीच प्रारम्भ में ताड़ पत्रों पर और बाद में कागज़ पर चित्रित हुई इस शैली को जैन गुजराती तथा पश्चमी शैली आदि नामों से भी ...

यातायात संकेत

यातायात संकेत या सड़क संकेत, सड़क का उपयोग करने वालों को जानकारी प्रदान करने के लिए सड़कों के किनारे लगागए संकेतों को कहते हैं। पिछले आठ दशकों में वाहनों की संख्या में वृद्धि के साथ कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुविधाजनक बनाने तथा आम तौपर ...

सकल सन्नादी विरूपण

किसी आवर्ती संकेत का सकल संनादी विरूपण बताता है कि वह संकेत पूर्णतः साइनाकारी संकेत की तुलना में कितना विरूपित है। इसकी परिभाषा निम्नलिखित है- THD = V 2 + V 3 2 + V 4 2 + ⋯ + V n 2 V 1 {\displaystyle {\mbox{THD}}={\frac {\sqrt {V_{2}^{2}+V_{3}^{2 ...

पाबूजी की फड़

पाबूजी एक लोक-देवता के रूप में पूजे जाते हैं। यह 14वीं सदी 16वीं सदी में भी उल्लेख किया गया है राजस्थान के फलोदी तहसील के कोलू नामक दूरदराज़ के गाँव में रहते थे।

शब्दकोश

अनुवाद
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