ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 277

फिजी आर्य प्रतिनिधि सभा

फिजी की आर्य प्रतिनिधि सभा वहाँ के आर्यसमाजियों की प्रतिनिधि संस्था है। इसकी स्थापना १९१२ में मणिलाल डॉक्टर द्वारा की गयी थी। इसका पंजीयन एक धार्मिक संस्था के रूप में किया गया था। महात्मा गांधी ने फिजी में रह रहे भारतीयों को कानूनी सहायता देने मण ...

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा आर्यसमाज की सर्वोच्च संस्था है। इसकी स्थापना स्वामी श्रद्धानन्द द्वारा की गयी थी ताकि विश्व के सभी भागों में स्थित आर्यसमाज का समुचित प्रबन्धन करने में सुविधा हो। इसकी साधारण सभा में विश्व के विभिन्न आर्यसमाज संस्थाओ ...

हैदराबाद सत्याग्रह

सन् 1938-39 में जब अंग्रेजों का अत्याचार चरम पर था तब आर्य समाज ने आंदोलन छेड़ा जिसे हैदराबाद सत्याग्रह कहा जाता है। इस आन्दोलन में हिन्दू महासभा ने आर्य समाज का साथ दिया। आंदोलन सफल हुआ और निजाम हैदराबाद को झुकना पड़ा। इस सत्याग्रह को भारत के स् ...

कालदर्शक

कालदर्शक एक प्रणाली है जो समय को व्यवस्थित करने के लिये प्रयोग की जाती है। कालदर्शक का प्रयोग सामाजिक, धार्मिक, वाणिज्यिक, प्रशासनिक या अन्य कार्यों के लिये किया जा सकता है। यह कार्य दिन, सप्ताह, मास, या वर्ष आदि समयावधियों को कुछ नाम देकर की जात ...

चान्द्र-सौर पञ्चाङ्ग

चान्द्र-सौर पञ्चाङ्ग उन पंचांगों को कहते हैं जिसकी तिथियाँ चन्द्रमा की कला भी दर्शातीं हैं और सौर वर्ष का समय भी। चान्द्रसौर पंचांग का उपयोग कई संस्कृतियों में होता है जिसमें हिन्दू पञ्चाङ्ग और जैन पंचांग प्रमुख है।

दोपहर

दिन का दूसरा प्रहर या मध्याह्न वो होता है, जब सूरज सिपर आ जाता है। एक दिन में आठ प्रहर या पहर होते हैं. एक पहर तीन घंटे का होता है। सूर्योदय के समय दिन का पहला प्रहर प्रारंभ होता है। दूसरे पहर की समाप्ति और तीसरे पहर का प्रारंभ, दोपहर होती है। यह ...

भारतीय राष्ट्रीय पंचांग

भारतीय राष्ट्रीय पंचांग या भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर भारत में उपयोग में आने वाला सरकारी सिविल कैलेंडर है। यह शक संवत पर आधारित है और ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ-साथ 22 मार्च 1957 से अपनाया गया। भारत मे यह भारत का राजपत्र, आकाशवाणी द्वारा प्रसारित स ...

वीर निर्वाण संवत

वीर निर्वाण संवत एक कैलेंडर युग है जिसकी शुरुआत १५ अक्टूबर ५२७ ई.पू. से हुई थी। यह २४ वें तीर्थंकर भगवान महावीरस्वामी के निर्वाण का स्मरण करता है। यह कालानुक्रमिक गणना की सबसे पुरानी प्रणाली में से एक है जो अभी भी भारत में उपयोग की जाती है।

अधिक मास

सौर वर्ष और चांद्र वर्ष में सामंजस्य स्थापित करने के लिए हर तीसरे वर्ष पंचांगों में एक चान्द्रमास की वृद्धि कर दी जाती है। इसी को अधिक मास या अधिमास या मलमास कहते हैं। सौर-वर्ष का मान ३६५ दिन, १५ घड़ी, २२ पल और ५७ विपल हैं। जबकि चांद्रवर्ष ३५४ दि ...

कलि संवत

कलियुग संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ३१०२ ईपू से आरम्भ होता है। इस संवत की शुरुआत पांडवो के द्वारा अर्जुन के पौत्र परिक्षीत को सिँहासनारुढ़ करके स्वयं हिमालय की और प्रस्थान करने एंव भगवान श्रीकृष्ण के वैकुण्ठ जाने से मानी जाती है। अन्य संवत सप् ...

शक संवत

शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो 78 ईसवी से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। शक संवत्‌ के विषय में बुदुआ का मत है कि इसे उज्जयिनी के क्षत्रप चेष्टन ने प्रचलित किया। शक राज्यों को चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने समाप्त कर दिया पर ...

संवत

संवत्‌, समयगणना का भारतीय मापदंड। भारतीय समाज में अनेक प्रचलित संवत्‌ हैं। मुख्य रूप से तीन संवत्‌ चल रहे हैं, प्रथम विक्रम संवत्‌ तथा दूसरा शक संवत्‌। तीसरा लोधी संवत भी प्रचलन में आया है विक्रम संवत्‌ ई. पू. 57 वर्ष प्रारंभ हुआ। यह संवत्‌ मालवग ...

सप्तर्षि संवत

सप्तर्षि संवत् भारत का प्राचीन संवत है जो ३०७६ ईपू से आरम्भ होता है। महाभारत काल तक इस संवत् का प्रयोग हुआ था। बाद में यह धीरे-धीरे विस्मृत हो गया। एक समय था जब सप्तर्षि-संवत् विलुप्ति की कगापर पहुंचने ही वाला था, बच गया। इसको बचाने का श्रेय कश्म ...

अद्वैत वेदान्त

अद्वैत वेदान्त वेदान्त की एक शाखा है। अहं ब्रह्मास्मि अद्वैत वेदांत यह भारत मेँ उपज हुकई विचारधाराओं में से एक है। जिसके आदि शंकराचार्य पुरस्कर्ता थे। भारत में परब्रह्म के स्वरुप के बारे में कई विचारधाराएं हैं। जिसमें द्वैत, अद्वैत, विशिष्टाद्वैत ...

आधुनिक वेदांत

आधुनिक वेदांत यह एक भारतीय दर्शन है । यह दर्शन मूर्तिपूजा, यज्ञ, वर्णव्यवस्था, कर्मकांड, सगुण ईश्वर का विरोध करता है । आधुनिक वेदांत के अनुसार ईश्वर को एक रहस्य के रूप में मान्यता दी गयी है ।

दीपावली (जैन)

जैन समाज द्वारा दीपावली, महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है। जैन ग्रथों के अनुसार महावीर स्वामी को चर्तुदशी के प्रत्युष काल में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। चर्तुदशी का अन्तिम पहर होता है इसलिए जैन लोग दीपावली अमावस्या को मनाते है ...

आषाढ शुक्ल पूर्णिमा

विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक महायुग आनलाइन पंचाग

पूर्णिमा

पूर्णिमा पंचांग के अनुसार मास की 15वीं और शुक्लपक्ष की अंतिम तिथि है जिस दिन चंद्रमा आकाश में पूरा होता है। इस दिन का भारतीय जनजीवन में अत्यधिक महत्व हैं। हर माह की पूर्णिमा को कोई न कोई पर्व अथवा व्रत अवश्य मनाया जाता हैं।

असुर

हिन्दू धर्मग्रन्थों में असुर वे लोग हैं जो सुर से संघर्ष करते हैं। धर्मग्रन्थों में उन्हें शक्तिशाली, अतिमानवीय, अर्धदेवों के रूप में चित्रित किया गया है। ये अच्छे और बुरे दोनों गुणों वाले हैं। अच्छे गुणों वाले असुरों को अदित्य तथा बुरे गुणों से ...

कालनेमि

कालनेमि रामायण में एक मायावी राक्षस है। कालनेमि का उल्लेख सनातन धर्म से संबंधित रामायण काव्य में अता है जब लंका युद्ध के समय रावण के पुत्र मेघनाद द्वारा छोड़े गए शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गये तो सुषेन वैद्य ने इसका उपचार संजीवनी बूटी बताया ज ...

ज्वारासुर

एक पौराणिक कथा के अनुसार, ज्वारासुरका जन्म चिंतनमय शिवजी के ललाटके पसीनेसे हुआ था और वह देवताओं के लिए एक खतरा था। एक बार विष्णुने हयग्रीवका अवतार लिया था तब वह ज्वारासुरके बुखारसे पीड़ित थे। इसलिए उन्होने दानव ज्वारासुरको मार डाला। उन्होने अपने ...

बाणासुर

हिन्दू कहानियों में बाणासुर बलि के पुत्और हज़ार भुजाओं वाले असुर राजा थे। ऐसा माना जाता है कि बाणासुर ने वर्तमान असम के केन्द्रिय भाग पर शासन किया जिसकी राजधानी शोणितपुर थी। कहानियों के अनुसार बाणासुर किरट राजा थे। हालांकि हिमाचल की लोककथाओं के अ ...

भस्मासुर

भस्मासुर हिन्दू पौराणिक कथाओं में वर्णित एक ऐसा राक्षस था जिसे वरदान था कि वो जिसके सिपर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा। कथा के अनुसार भस्मासुर ने इस शक्ति का गलत प्रयोग शुरू किया और स्वयं शिव जी को भस्म करने चला। शिव जी ने विष्णु जी से सहायता माँगी ...

मधु-कैटभ

मधु और कैटभ सृष्टि के निर्माण की प्राचीन भारतीय अवधारणा से जुड़े हुए असुर हैं। इन दोनों का जन्म कल्पान्त तक सोते हुए विष्णु के दोनों कानों से हुई थी। जब वे ब्रह्मा को मारने दौड़े तो विष्णु ने उन्हें नष्ट कर दिया। तभी से विष्णु को मधुसूदन एवं कैटभ ...

महिषासुर

पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर एक असुर था। महिषासुर के पिता रंभ, असुरों का राजा था जो एक बार जल में रहने वाले एक भैंस से प्रेम कर बैठा और इन्हीं के योग से महिषासुर का आगमन हुआ। इसी वज़ह से महिषासुर इच्छानुसार जब चाहे भैंस और जब चाहे मनुष्य का र ...

राहु

राहु हिन्दू ज्योतिष के अनुसार असुर स्वरभानु का कटा हुआ सिर है, जो ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा का ग्रहण करता है। इसे कलात्मक रूप में बिना धड़ वाले सर्प के रूप में दिखाया जाता है, जो रथ पर आरूढ़ है और रथ आठ श्याम वर्णी कुत्तों द्वारा खींचा जा रहा ...

आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च

आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च, ऋग्वेद का एक श्लोक है। स्वामी विवेकानन्द प्रायः इस श्लोक को उद्धृत करते रहते थे और बाद में यह वाक्यांश रामकृष्ण मिशन का ध्येयवाक्य बनाया गया। यह धेयवाक्य मानवजीवन के एक ही साथ दो उद्देश्य निर्धारित करता है- पहला अपन ...

प्रबुद्ध भारत

प्रबुद्ध भारत रामकृष्ण मिशन द्वारा प्रकाशित अंग्रेजी मासिक पत्रिका है। इसका प्रकाशन सन् १८९६ से होता आ रहा है। इसमें भिक्षुओं, साधुओं एवं सन्यासियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक विषयों पर लेख होते हैं। इसका सम्पादन उत्तराखण्ड के मायावती ...

रामकृष्ण मिशन संस्थानों की सूची

निम्नलिखित रामकृष्ण मिशन द्वारा शुरू / अधिकृत संगठनों की सूची है। रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ के दुनिया भर में २०५ केंद्र हैं उप-केंद्रों को छोड़कर: भारत में १५६, बांग्लादेश में १५, संयुक्त राज्य अमेरिका में १४, रूस में २, और अर्जेंटीना, ऑस्ट्रे ...

स्वामी गंभीरानन्द

स्वामी गंभीरानन्द रामकृष्ण मिशन के ग्यारहवें संघाध्यक्ष थे। उनका पूर्व नाम जितेन्द्रनाथ दत्त था। कोलकाता के स्कॉटिश चर्च काँलेज से स्नातक की शिक्षा पूरा करने बाद 1923 में उन्होने रामकृष्ण मिशन में प्रवेश किया। स्वामी शिवानन्द ने उन्हें संन्यास की ...

स्वामी ब्रह्मानन्द

स्वामी ब्रह्मानन्द रामकृष्ण मिशन के प्रथम संघाध्यक्ष थे। उनका पूर्वाश्रम नाम राखाल चन्द्र घोष था। रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें मानस-पुत्र के रूप में ग्रहण किया। भक्त मंडली में वे राजा महाराज के नाम से जाने जाते हैं।

स्वामी रंगनाथानन्द

स्वामी रंगनाथानन्द का जन्म 15 दिसम्वर,1908 को केरल प्रान्त के त्रिक्कूर गाँव में हुआ था। उनका पूर्व नाम शंकरन कूट्टी था। 1926 में रामकृष्ण के पार्षद स्वामी शिवानन्द से वे मंत्रदीक्षा लाभ किये। 17 साल की उम्र में वे रामकृष्ण संघ में योगदान दिया।

स्वामी विज्ञानानंद

रामकृष्ण मिशन के एक साधु थे जो १९३७ में इसके अध्यक्ष बने। वे रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे। उनके ही अध्यक्षीय काल मेम बेलूर में रामकृष्ण मंदिर का निर्माण हुआ। वे मूलतः इंजीनियर थे और संस्कृत के विद्वान थे।

शब्दकोश

अनुवाद
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