ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 22

मोक्षदा एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।

मोहिनी एकादशी

वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि यह तिथी सब पापों को हरनेवाली और उत्तम है। इस दिन जो व्रत रहता है उसके व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल तथा पातक समूह से छुटकारा पा जाते हैं। वैशाख मास के शुक्ल ...

मौनी अमावस्या

माघ मास की अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या कहते हैं। यह योग पर आधारित महाव्रत है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। गंगा त ...

यज्ञोपवीत

यज्ञोपवीत शब्द के दो अर्थ हैं- उपनयन संस्कार जिसमें जनेऊ पहना जाता है और विद्यारंभ होता है। मुंडन और पवित्र जल में स्नान भी इस संस्कार के अंग होते हैं। सूत से बना वह पवित्र धागा जिसे यज्ञोपवीतधारी व्यक्ति बाएँ कंधे के ऊपर तथा दाईं भुजा के नीचे पह ...

यम द्वितीया

भ्रातृ द्वितीया कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई ...

यश भारती पुरस्कार

यश भारती पुरस्कार उत्तर प्रदेश सरकार का सर्वोच्च पुरस्कार है।यह पुरस्कार साहित्य, समाजसेवा, चिकित्सा, फिल्म, विज्ञान, पत्रकारिता, हस्तशिल्प, संस्कृति, शिक्षण, संगीत, नाटक, खेल, उद्योग और ज्योतिष के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले को दिया ज ...

योगिनी एकादशी

योगिनी एकादशी व्रतकथा पद्मपुराण के उत्तरखण्ड में प्राप्त होती है। आषाढ़ मास की कृष्ण एकादशी को "योगनी" अथवा "शयनी" एकादशी कहते है। इस व्रतकथा के वक्ता श्रीकृष्ण एवं मार्कण्डेय हैं। श्रोता युधिष्ठिर एवं हेममाली हैं। जब युधिष्ठिर आषाढकृष्ण एकादशी क ...

रक्षाबन्धन

रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती व ...

रमा एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा है। यह बड़े-बड़े पापों का नाश करने वाली है

राम लीला

समुद्र से लेकर हिमाचल तक प्रख्यात रामलीला का आदि प्रवर्तक कौन है, यह विवादास्पद प्रश्न है। भावुक भक्तों की दृष्टि में यह अनादि है। एक किंवदंति का संकेत है कि त्रेता युग में श्री रामचंद्र के वनगमनोपरांत अयोध्यावासियों ने चौदह वर्ष की वियोगावधि राम ...

रामायण मेला

रामायण मेला, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और अयोध्या में लगता है। रामायण मेले में अनेक धर्माचार्य, संत महात्मा, देश-विदेश के रामकथा मर्मज्ञ तथा विद्धान भाग लेते हैं। इस अवसर पर रामलीला, प्रवचन तथा विभिन्न संस्थाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते ...

राष्ट्रपिता

राष्ट्रपिता दो शब्दों "राष्ट्र" अर्थात - देश या वतन और "पिता" अर्थात जनक शब्दों को समन्वय है, जिसका अंग्रेजी अनुवाद father of the nation है। विश्व के कुछ देशों के राष्ट्रपिता हैं: अहमद शाह अब्दाली: अफ़गानिस्तान महात्मा गांधी: भारत गणराज्य जॉर्ज व ...

राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन

राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन की स्थापना भारत सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय ने सन २००३ के फरवरी माह में की। इस परियोजना की अवधि पाँच वर्ष रखी गयी है। इसका उद्देश्य भारत की विशाल पाण्डुलिपि सम्पदा को खोजना एवं उसको संरक्षित करना है। ऐसा अनुमान ...

रोश हशाना

रोश हशाना यहूदी धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्योहार है। यह यहूदी नववर्ष को चिह्नित करता है। इसकी उत्पत्ति बाइबल लेव 23ः23-25 से जुड़ी है: एक पवित्र अवसर जो जोरदार धमाकों के साथ मनाया जाता है। रोश हशाना शब्द रैबिनिकल है, जिसका जि ...

लिन डी सूजा

लिन डी सूजा एक भारतीय महिला उद्यमी हैं। वे लिंटास मीडिया समूह के पूर्व अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। वे भारत की पहली ऐसी महिला हैं, जिन्हें ‘रीडरशिप स्टडीज काउंसिल ऑफ इंडिया’ की पहली चेयरपर्सन होने का सौभाग्य मिला। वर्तमान में वे खार, म ...

लोककला

भारत की अनेक जातियों व जनजातियों में पीढी दर पीढी चली आ रही पारंपरिक कलाओं को लोककला कहते हैं। इनमें से कुछ आधुनिक काल में भी बहुत लोकप्रिय हैं जैसे मधुबनी और कुछ लगभग मृतप्राय जैसे जादोपटिया। कलमकारी, कांगड़ा, गोंड, चित्तर, तंजावुर, थंगक, पातचित ...

लोकगीत

लोकगीत लोक के गीत हैं। जिन्हें कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा लोक समाज अपनाता है। सामान्यतः लोक में प्रचलित, लोक द्वारा रचित एवं लोक के लिए लिखे गए गीतों को लोकगीत कहा जा सकता है। लोकगीतों का रचनाकार अपने व्यक्तित्व को लोक समर्पित कर देता है। शास ...

वट सावित्री

वट सावित्री व्रत सौभाग्य को देने वाला और संतान की प्राप्ति में सहायता देने वाला व्रत माना गया है। भारतीय संस्कृति में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। इस व्रत की तिथि को लेकर भिन्न मत हैं। स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज् ...

वरूथिनी एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।

विजया एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। विजया एकादशी अपने नामानुसार विजय प्रादन करने वाली है। भयंकर शत्रुओं से जब आप घिरे हों औ ...

विशाखा उत्सव

विशाखा उत्सव एक हिन्दू त्यौहार हैं। अन्य त्योहारों की नसों मे, विशाख उत्सव एक और त्योहार है जो आंध्र प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा आयोजित किया जाता है, ताकि राज्य मे पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। यह त्योहार सबसे विशिष्ट घटना है, जो कला, शिल्प, ...

विषुक्कणि

विषुक्कणी उस झाँकी-दर्शन को कहते हैं, जिसका दर्शन विषु के दिन प्रात:काल सर्वप्रथम किया जाता है। ऐसा विश्वास है कि विषुक्कणी का प्रभाव वर्ष भर रहता है। विषु की पूर्व संध्या को कणी दर्शन की सामग्री इकट्ठी करके सजा दी जाती है। एक काँसे के डेगची या अ ...

वैभव लक्ष्मी

शुक्रवार को लक्ष्मी देवी का भी व्रत रखा जाता है। इसे वैभवलक्ष्मी व्रत भी कहा जाता है। इस दिन स्त्री-पुरुष देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हुए श्वेत पुष्प, श्वेत चंदन से पूजा कर तथा चावल और खीर से भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस व्रत ...

शाकाहार का इतिहास

शाकाहार की जड़ें प्राचीन भारतीय सभ्यता तथा प्राचीन यूनानी सभ्यता से निकलीं हैं। शाकाहार के विस्तृत व्यवहार के सबसे प्राचीन आंकड़े प्राचीन भारत में और प्राचीन यूनान में मिलते हैं। दोनों ही मामलों में आहार को जन्तुओं के प्रति अहिंसा के विचार को ध्य ...

शीतला अष्टमी

शीतला अष्टमी हिन्दु ओं का एक त्योहार है जिसमें शीतला माता के व्रत और पूजन किये जाते हैं। ये होली सम्पन्न होने के अगले सप्ताह में बाद करते हैं। प्रायः शीतला देवी की पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होती है, लेकिन कुछ स्थानों ...

श्रीलंका की संस्कृति

ऐसा विश्वास किया जाता है कि राजकुमार विजय और उसके 700 अनुयायी ई. पू. 543 में श्रीलंका में जहाज से उतरे थे। ये लोग "सिंहल" कहलाते थे, क्योंकि पहले पहल "सिंहल" की उपाधि धारण करने वाले राजा सिंहबाहु से इनका निकट संबंध था। । विजय ही श्रीलंका का पहला ...

षटतिला एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। पद्मपुराण में एकादशी का बहुत ही महात्मय बताया गया है एवं उसकी विधि विधान का भी उल्लेख क ...

संस्कृति

संस्कृति किसी समाज में गहराई तक व्याप्त गुणों के समग्र स्वरूप का नाम है, जो उस समाज के सोचने, विचारने, कार्य करने के स्वरूप में अन्तर्निहित होता है।यह ‘कृ’ धातु से बना है। इस धातु से तीन शब्द बनते हैं ‘प्रकृति’ की मूल स्थिति,यह संस्कृत हो जाता है ...

सत्य नारायण व्रत कथा

सत्यनारायण भगवान की कथा लोक में प्रचलित है। हिंदू धर्मावलंबियो के बीच सबसे प्रतिष्ठित व्रत कथा के रूप में भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप की सत्यनारायण व्रत कथा है। कुछ लोग मनौती पूरी होने पर, कुछ अन्य नियमित रूप से इस कथा का आयोजन करते हैं। सत्यनारा ...

सफला एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। पद्मपुराणमें पौषमास के कृष्णपक्ष की एकादशी के विषय में युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्री ...

सभा

वैदिक युग की अनेक जनतांत्रिक संस्थाओं में सभा एक थी। सभा के साथ ही एक दूसरी संस्था थी, समिति और अथर्ववेद में उन दोनों को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है। इससे यह प्रतीत होता है कि तत्कालीन वैदिक समाज को ये संस्थाएँ अपने विकसित रूप में प्राप्त ...

सभ्यता

सभ्यता शब्द का प्रयोग मानव समाज के एक सकारात्मक, प्रगतिशील और समावेशी विकास को इंगित करने के लिये किया जाता है। सभ्य समाज अक्सर उन्नत कृषि, लंबी दूरी के व्यापार, व्यावसायिक विशेषज्ञता और नगरीकरण आदि की उन्नत स्थिति का द्योतक है। इन मूल तत्वों के ...

सांस्‍कृतिक प्रसार

सांस्कृतिक नृविज्ञान तथा सांस्कृतिक भूगोल के सन्दर्भ में, से तात्पर्य सांस्कृतिक अवयवों के एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति में होने वाले प्रसार को कहते हैं। इसकी परिकल्पना १८९७/९८ में लिओ फ्रोबेनिअस ने डर वेस्टअफ्रीकानिश्चे कल्चरक्रीज नामक प्रकाशन ...

सुंईया मेला

सुंईया मेला, राजस्थान के बाड़मेर जिले के चौहटन कस्बे में पौष कृष्ण पक्ष अमावस्या की सोमवती अमावस्या को मुहूर्त पर लगता है। इसे "मारवाड़ का अर्द्ध कुंभ" कहा जाता है| सुंईया महादेव एक "मरु कुंभ" भी है।

सोनपुर मेला

वैशाली जिले में लालगंज रोड पर विश्व को शांति के पाठ पढ़ाने वाले महामानव गौतम बुद्ध का एक बहुत बड़ा बौद्ध स्थली बौद्ध प्रेमीओं द्वारा बनाया गग है जो सोनपुऔर हाजीपुर छेत्र में पर्यटकों को लुभाता रहता है। सोनपुर मेला बिहार के सोनपुर में हर साल कार्त ...

सोमवार व्रत कथा

अधा सेर गेहूं का आटा के तीन अंगा बनाकर घी, गुड़, दीप, नैवेद्य, पूंगीफ़ल, बेलपत्र, जनेउ का जोड़ा, चंदन, अक्षत, पुष्प, आदि से प्रदोष काल में शंकर जी का पूजन करें। सोलह सोमवार के दिन भक्तिपूर्वक व्रत करें। सत्रहवें सोमवार के दिन पाव भर गेहूं के आटे ...

सोलह शृंगार

भारतीय साहित्य में सोलह शृंगारी की यह प्राचीन परंपरा रही हैं। आदि काल से ही स्त्री और पुरुष दोनों प्रसाधन करते आए हैं और इस कला का यहाँ इतना व्यापक प्रचार था कि प्रसाधक और प्रसाधिकाओं का एक अलग वर्ग ही बन गया था। इनमें से प्राय: सभी शृंगारों के द ...

सोहर

सोहर घर में संतान होने पर गाया जाने वाला मंगल गीत है। इसको संतान के जन्म और उससे संबंधित अवसरों जैसे सतमासा, इत्यादि अवसरों पर गाया जाता है। इन गीतों में संतान के जन्म, उससे संबंधित कहानियों और उत्सवों के सुंदर वर्णन मिलते हैं। राम जन्म और कृष्ण ...

स्वयंवर

स्वयंवर प्राचीन काल से प्रचलित एक हिन्दू परंपरा है जिसमे कन्या स्वयं अपना वर चुनती थी और उससे उसका विवाह होता था। इस बात के प्रमाण हैं कि वैदिक काल में यह प्रथा समाज के चारों वर्णों में प्रचलित और विवाह का प्रारूप था। रामायण और महाभारत काल में भी ...

स्वस्तिक मन्त्र

स्वस्तिक मंत्र या स्वस्ति मन्त्र शुभ और शांति के लिए प्रयुक्त होता है। स्वस्ति = सु + अस्ति = कल्याण हो । ऐसा माना जाता है कि इससे हृदय और मन मिल जाते हैं। मंत्रोच्चार करते हुए दर्भ से जल के छींटे डाले जाते थे तथा यह माना जाता था कि यह जल पारस्पर ...

स्वीडन की संस्कृति

स्वीडन की संस्कृति अपने कलाकारों की विविध प्रकार की उपलब्धियों के लिए बह्त लम्बे समय से प्रसिद्ध है। प्रागैतिहासिक स्वीडन, नॉर्स संस्कृति का स्रोत था और सम्पूर्ण स्कैण्डिनेवियाई देशों में सैकड़ों वर्षों से प्रमुख देश है।

शब्दकोश

अनुवाद
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