ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 155

शियानबेई लोग

शियानबेई प्राचीनकाल में मंचूरिया, भीतरी मंगोलिया और पूर्वी मंगोलिया में बसने वाली एक मंगोल ख़ानाबदोश क़बीलों की जाति थी। माना जाता है कि ख़ान की उपाधि का इस्तेमाल सबसे पहली इन्ही लोगों में हुआ था। चीनी स्रोतों के अनुसार शियानबेई लोग दोंगहु लोगों ...

शियोंगनु लोग

शियोंगनु एक प्राचीन ख़ानाबदोश क़बीलों की जाती थी जो चीन के हान राजवंश के काल में हान साम्राज्य से उत्तर में रहती थी। इतिहास में उनका वर्णन सीमित है, इसलिए यह ठीक से ज्ञात नहीं है कि उनकी नस्ल क्या थी। अलग-अलग इतिहासकार उन्हें तुर्की, मंगोली, ईरान ...

सरमती लोग

सरमती लोग प्राचीनकाल में दक्षिणी रूस, युक्रेन और बाल्कन प्रदेश में बसने वाली एक जाति थी। सरमती ईरानी भाषाएँ बोलते थे और इस क्षेत्र में इनका प्रभाव पाँचवी शताब्दी ईसापूर्व से चौथी शताब्दी ईसवी तक रहा। यह स्किथी लोगों के पश्चिम में थे और उनसे सम्बं ...

सलजूक़ साम्राज्य

सलजूक़​ साम्राज्य या सेल्जूक साम्राज्य एक मध्यकालीन तुर्की साम्राज्य था जो सन् १०३७ से ११९४ ईसवी तक चला। यह एक बहुत बड़े क्षेत्पर विस्तृत था जो पूर्व में हिन्दू कुश पर्वतों से पश्चिम में अनातोलिया तक और उत्तर में मध्य एशिया से दक्षिण में फ़ारस की ...

स्किथी लोग

स्किथी या स्किथाई यूरेशिया के स्तेपी इलाक़े की एक प्राचीन ख़ानाबदोश जातियों के गुट का नाम था। ये प्राचीन ईरानी भाषाएँ बोलते थे और इनका भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग पर एक गहरा प्रभाव पड़ा है। इनके अति-प्राचीन इतिहास के बारे में ज़्यादा नहीं पता ...

हत्ती लोग

हत्ती या ख़त्ती एक प्राचीन आनातोली लोक-समुदाय था जिन्होने १८वीं सदी ईसापूर्व में उत्तर-मध्य आनातोलिया के ख़त्तूसा क्षेत्र में एक साम्राजय स्थापित किया। यह साम्राजय १४वीं शताब्दी ईपू के मध्य में सुप्पीलुलिउमा प्रथम के राजकाल में अपने चरम पर पहुँचा ...

हफथाली लोग

हफथाली मध्य एशिया में ५वीं और ६ठी सदी ईसवी में रहने वाली एक ख़ानाबदोश जाति थी। भारत में यह श्वेत हूण और तुरुष्क के नाम से भी जाने जाते थे। चीनी सूत्रों के हवाले से यह पहले चीन की महान दीवार से उत्तर में रहने वाले युएझ़ी लोग थे। यह किस जाति से सम् ...

नृवंशविज्ञान

नृवंशविज्ञान एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जिसका प्रयोग अक्सर सामाजिक विज्ञान में विशेष रूप से मानवशास्त्और समाजशास्त्र में किया जाता है। इसके अंतर्गत अक्सर मानव समाज/संस्कृतियों पर अनुभवजन्य आँकड़े जुटाने का कार्य किया जाता है। आँकड़ा संग्रह का क ...

अल्पसंख्यकवाद

अल्पसंख्यकवाद एक नवनिर्मित शब्द है जिसका तात्पर्य एक ऐसी राजनीतिक संरचना या प्रक्रिया से होता है जिसमें एक की आबादी का एक अल्पसंख्यक खंड जिससे देश के लिए निर्णय लेने में कुछ हद तक प्रधानता प्राप्त हो। यह बहुसंख्यकवाद के विपरीत हो सकता है, लेकिन य ...

पारम्परिक चिकित्सा

पारम्परिक चिकित्सा या लोक चिकित्सा कई मानव पीढ़ीयों द्वारा विकसित वे ज्ञान प्रणालियाँ होती हैं जिनके प्रयोग से आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से भिन्न तरीके से शारीरिक व मानसिक रोगों की पहचान, रोकथाम, निवारण और इलाज करा जाता रहा है। कई एशियाई और अफ़्रीक ...

संरचनावाद

structuralism संरचनावाद By Mr.Deepak Kumar,Suman,Pooja,Soniya,Rohit स्ट्रक्चरलिज्म मानव विज्ञान की एक ऐसी पद्धति है जो संकेत विज्ञान यानी संकेतों की एक प्रणाली और सहजता से परस्पर संबद्ध भागों की एक पद्धति के अनुसार तथ्यों का विश्लेषण करने का प्रय ...

पुरातत्वशास्त्र

पुरातत्वशास्त्र वह विज्ञान है जो पुरानी वस्तुओं का अध्ययन व विश्लेषण करके मानव-संस्कृति के विकासक्रम को समझने एवं उसकी व्याख्या करने का कार्य करता है। यह विज्ञान प्राचीन काल के अवशेषों और सामग्री के उत्खनन के विश्लेषण के आधापर अतीत के मानव-समाज क ...

लोक जीवविज्ञान

लोक जीवविज्ञान वैज्ञानिक रूप से विभिन्न मानव संस्कृतियों का अमानवीय जीवों के साथ के सम्बन्ध का अध्ययन करता है। इसमें अन्य जीवों के साथ करे गये मानव-व्यवहार, प्रयोगों, इत्यादि को देखा जाता है। मानवों का बायोटा और पर्यावरण के साथ ऐतिहासिक और वर्तमा ...

सामाजिक स्तरीकरण

सामाजिक स्तरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमे व्यक्तियों के समूहों को उनकी प्रतिष्ठा, संपत्ति और शक्ति की मात्रा के सापेक्ष पदानुक्रम में विभिन्न श्रेणियों में उच्च से निम्न रूप में स्तरीकृत किया जाता है। वर्ग स्‍तरीकरण वि‍श्‍वव्‍यापी है और उसके उत्‍पन् ...

रज़िया सुल्तान

रज़िया अल-दिन, शाही नाम" जलॉलात उद-दिन रज़ियॉ”, इतिहास में जिसे सामान्यतः" रज़िया सुल्तान” या" रज़िया सुल्ताना” के नाम से जाना जाता है, दिल्ली सल्तनत की सुल्तान थी। उसने 1236 ई० से 1240 ई० तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। रजिया पर्दा प्रथा त्यााग क ...

इडर के प्रताप सिंह

लेफ्टिनेंट जनरल प्रताप सिंह इडर राज्य के महाराजा तथा ब्रितानी भारतीय सेना के अधिकारी थे। १९०२ से १९११ तक वे अहमदनगर के महाराजा भी थे। प्रताप सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1845 को हुआ था। वह जोधपुर के तख्त सिंह 1819 -13 फरवरी 1873 जोधपुर के महाराजा के त ...

कुलोत्तुंग चोल तृतीय

कुलोत्तुंग चोल तृतीय चोल राज्य के वैभव के अपकर्षकाल का शासक था। इसने पहले तो पांड्यनरेश जटावर्मन कुलेश्वर को बुरी तरह पराजित किया था। बाद में उसने होयसल नरेश वल्लाल की सहायता से ही अपने राज्य पर अधिकार प्राप्त किया; किंतु उसे पांड्य नरेश की अधीनत ...

कुलोत्तुंग चोल द्वितीय

कुलोत्तुंग चोल द्वितीय कुलोत्तुंग का पौत्और विक्रम चोल का पुत्र। इसका शासनकाल राजनीतिक दृष्टि से पूर्णत: शांति का था। इसकी ऐतिहासिक ख्याति अन्य कारण से है। इसके पिता विक्रम चोल ने चिदंबरम् के सुविख्यात मंदिर के नवीनीकरण और विस्तार का कार्य आरंभ क ...

कुलोत्तुंग चोल प्रथम

कुलोत्तुंग चोल प्रथम दक्षिण भारत के चोल राज्य का प्रख्यात शासक था। यह वेंगी के चालुक्यनरेश राजराज नरेंद्र का पुत्र था और इसका नाम राजेंद्र था। इसका विवाह चोलवंश की राजकुमारी मधुरांतका से हुआ था जो वीरराजेंद्र की भतीजी थी। यह वेंगी राज्य का वैध अध ...

गांगेयदेव

गांगेयदेव कल्चुरि राजवंश का प्रमुख शासक था। वह सन् १०१५ के लगभग कलचुरि चेदि राज्य के सिंहासन पर बैठा। उसके पिता कोकल्लदेव द्वितीय और दादा युवराजदेव द्वितीय के समय राज्य की स्थिति कुछ कमजोर हो चली थी। गांगेयदेव ने इस स्थिति को केवल सँभाला ही नहीं, ...

चेत सिंह

बनारस के सामंत जमींदार बलवंतसिंह के पुत्र चेतसिंह के उत्तराधिकार ग्रहण करने के बाद, उक्त जमींदारी अवध के आधिपत्य से ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत ले ली गई । हेस्टिंग्ज़ ने तब चेतसिंह को वचन दिया था कि उनके नियमित कर देते रहने पर, उनसे किसी भी रूप ...

धनदेव का अयोध्या अभिलेख

धनदेव का अयोध्या अभिलेख एक प्राचीन प्रस्तर अभिलेख है जो ईसापूर्व पहली शताब्दी के भारतीय शासक धनदेव के काल की है। धनपाल देव राजवंश के राजा थे। उन्होने कोशल राज्य के अयोध्या नगरी से शासन चलाया। धनदेव का नाम प्राचीन सिक्कों एवं अभिलेखों में मिलता है ...

पुष्यमित्र शुंग

पुष्यमित्र शुंग उत्तर भारत के शुंग साम्राज्य का संस्थापक और प्रथम राजा था। इससे पहले वह मौर्य साम्राज्य में सेनापति था। १८५ ई॰पूर्व में शुंग ने अन्तिम मौर्य सम्राट की हत्या कर स्वयं को राजा उद्घोषित किया। उसके बाद उसने अश्वमेध यज्ञ किया और उत्तर ...

बहाड़ राव

बहाड़ राव परमार राजपूत राजा थे जिन्होने १३वीं शताब्दी में बाड़मेर नगर बसाया। बहाड़ राव के राज में बाड़मेर काफी समृद्ध था। बाड़मेर का अर्थ है बार का पहाड़ी किला। एक समय मालानी के नाम से जाना जाने वाला बाड़मेर अपनी जीवन्तता के कारण पर्यटकों को बहुत ...

बुक्क राय द्वितीय

बुक्क राय द्वीतीय विजयनगर साम्राज्य का संगम वंशीय सम्राट था। हरिहार द्वितीय की मौत के बाद कुछ दिनों के लिये उसका पुत्र विरूपाक्ष राय सिंहासन पर बैठा किन्तु उसकी हत्या उसके आपने ही पूर्त द्वारा कर दी गयी। बुक्क राय द्वितीय विरूपाक्ष का भाई था और उ ...

बुक्क राय प्रथम

संगम राजवंश में जन्मे बुक्क विजयनगर साम्राज्य के सम्राट थे। इन्हें बुक्क राय प्रथम के नाम से भी जाना जाता है। बुक्क ने तेलुगू कवि नाचन सोमा को संरक्षण दिया। १४वीं सदी के पूर्वार्ध में दक्षिण भारत में तुंगभद्रा नदी के किनारे विजयनगर राज्य की स्थाप ...

भारत में सबसे बड़े साम्राज्यों की सूची

भारत में सबसे बडे साम्राज्यों की सूची इसमें 10 लाख से अधिक वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्पर राज करने वाले भारत के सबसे बड़े साम्राज्यों की ऐतिहासिक सूची है। एक साम्राज्य बाहरी प्रदेशों के ऊपर एक राज्य की संप्रभुता का विस्तार शामिल है। सम्राट अशोक क ...

मयूरशर्मा

मयूरशर्मा कर्नाटक के आधुनिक शिमोगा जिला के तालगुण्डा का एक ब्राह्मण पंडित था। इसने बनवासी के कदंब वंश की स्थापना की थी। यह वंश ही था जिसने सबसे पहले आधुनिक कर्न्टक की भुमि पर राज्य किया था। इसने अपना नाम मयूरवर्मन कर लिया था, जिससे वह ब्राह्मण से ...

महबूब अली खान

आसफ़ जाह VI मीर महबूब अली ख़ान सिद्दीक़ी GCB हैदराबाद के छटवें निज़ाम थे। इन्होंने 1869 और 1911 के मध्यकाल में भारत के हैदराबाद राज्य पर राज किया।

महाराजा अनूपसिंह

महाराजा अनूपसिंह बीकानेर के वीर, कूटनीतिज्ञ और विद्यानुरागी शासक थे। वीर होने के साथ-साथ वह स्वयं विद्वान व संगीतज्ञ भी थे और बड़े पुस्तक-प्रेमी थे। उन के दरबार में भाव भट्ट जैसे संगीतज्ञ और कई विद्वान आश्रय पाते थे। इनके आश्रय में रहकर तत्कालीन ...

वाक्पति मुंज

वाक्पति मुंज 973 से 995 ई. परमार राजा थे जो सीयक द्वितीय के दत्तक पुत्र थे और जिन्होंने राष्ट्रकूटों के पश्चात मालवा राज्य स्थापित किया। उनके प्राचीनतम ज्ञात पूर्वज उपेन्द्र कृष्णराज थे। उसे वाक्पति द्वितीय भी कहते हैं। वाक्पति मुंज सीयक का दत्तक ...

सिराजुद्दौला

मिर्ज़ा मुहम्मद सिराज उद-दावला, प्रचलित नाम सिराज-उद्दौला वैधानिक रूप से मुगल साम्राज्य केेे बंगाल प्रांंत जिसमें वर्तमान भारत के पश्चिम बंगाल बिहार झारखंड उड़ीसा तथा बांग्लादेश सम्मिलित था का अप्रैल सन 1756 में नवाब बना उसके शासन का अंत ब्रिटिश ...

स्वातितिरुनाल बालराम वर्मा

श्री स्वाति तिरुनाल बालराम वर्मा त्रावणकोर के महाराजा थे। योग्य शासक होने के साथ-साथ वे संगीतज्ञ भी थे। उन्होने भारत की दोनों शास्त्रीय संगीत शैलियों - हिन्दुस्तानी संगीत और कर्नाटक संगीत को बढ़ावा दिया, यद्यपि वे स्व्यं कर्नातक संगीत के ज्ञाता थ ...

शब्दकोश

अनुवाद
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