ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 132

श्री हनुमान जी मंदिर उबदी

इतिहास - यह प्राचीन हनुमान मंदिर मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के एक छोटे से ग्राम उबदी में स्थित है। प्राचीन काल में मंदिर का निर्माण गांव में तत्कालीन प्रमुख व्यक्तियों के निर्देशन में पूरे गांव के सहयोग से किया गया होगा, किन्तु इस तथ्य के साक्ष्य, ...

संतोलादेवी मंदिर

देहरादून से लगभग १५ कि॰मी॰ दूर स्थित प्रसिद्ध संतौला देवी मंदिर पहुँचने के लिए बस द्वारा जैतांवाला तक जाकर वहां से पंजाबीवाला तक २ कि॰मी॰ जीप या किसी हल्के वाहन द्वारा तथा पंजाबीवाला के बाद २ कि॰मी॰ तक पैदल रास्ते से मंदिर पहुँचा जा सकता है। यह म ...

साईंदरबार

राजपुर रोड पर शहर से 8 कि॰मी॰ की दूरी पर घंटाघर के समीप साई दरबार मंदिर है। इसका बहुत अधिक सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है तथा देश-विदेश से दर्शनार्थी यहाँ आते हैं। साई दरबार के समीप राजपुर रोड पर ही भगवान बुद्ध का बहुत विशाल और भव्य तिब्बती मंदिर है।

सीता समाहित स्थल (सीतामढ़ी)

सीता समाहित स्थल मंदिर संत रविदास नगर जिला में स्थित है। यह मंदिर इलाहबाद और वाराणसी के मध्य स्थित जंगीगंज बाज़ार से ११ किलोमीटर गंगा के किनारे स्थित है। मान्यता है कि इस स्थान पर माँ सीता से अपने आप को धरती में समाहित कर लिया था। यहाँ पर हनुमानज ...

सोमेश्वरनाथ मंदिर

जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर स्थित अरेराज के सोमेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना राजा सोम ने की थी। उन्हीं के नाम पर इस मंदिर का नाम सोमेश्वरनाथ पड़ा। यहां बिहार ही नहीं उत्तर प्रदेश व नेपाल के श्रद्धालु भी पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। सोमेश्वर महादे ...

सोलोमन मन्दिर

सोलोमन मन्दिर अथवा सालोमन मंदिर का उल्‍लेख बाइबिल में प्रथम मंदिर के नाम से मिलता है। इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्‍दी ईसा पूर्व में हुआ था। लेकिन बेबीलोन के शासकों ने 586 ई. में इसे तोड़ डाला था। बाद में इस मंदिर का पुर्नर्निमाण किया गया। आज भ ...

अल उमरी मस्जिद

अल उमरी मस्जिद Al-Omari Mosque ‏‎ यह मस्जिद सीरिया के प्राचीन तथा रोमन शासकों का शहर बुसरा अल शाम में स्थित है मस्जिद का निर्माण उमय्यद खिलाफत के शासन काल के दौरान हुआ था।

उमय्यद मस्जिद

उमय्यद मस्जिद ; जिसे दमिश्क की महान मस्जिद के रूप में भी जाना जाता है जो सीरिया में दमिश्क के पुराने शहर में स्थित है। विश्व में सबसे पूरानी और सबसे बड़ी मस्जिदो में एक है, और कुछ मुसलमानों द्वारा इस्लाम में चौथा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। 63 ...

कूफा की महान मस्जिद

कूफा की महान मस्जिद; Great Mosque of Kufa, or Masjid al-Kūfa, or Masjid-al-Azam यह मस्जिद इराक के कूफा शहर में स्थित है जो शिया मुसलमानों के तीर्थस्थलों में से एक है।

नबी हाबील मस्जिद

‎‏ दमिश्क शहर के शिमाल में कासियून नाम की पहाड़ी में एक मशहूर गुफा हैं जिसे ख़ूनी गुफा कहा जाता है वहां के लोंगो का मत है कि हजरत आदम के पुत्र क़ाबिल ने इस गुफा के पास अपने भाई हाबील को क़त्ल किया था दमिश्क़ से जुबदानी और बलोदान को जाने वाले रास् ...

ब्हाइट मस्जिद नाज़रथ

व्हाइट मस्जिद इज़राइल के नाज़रथ शहर में स्थित सबसे पुरानी मस्जिद है 1और नाटकेथ के पुराने बाजार के केंद्र में हरात अलघामा या "मस्जिद क्वार्टर" में स्थित है। इसकी उत्कृष्ट पेंसिल के आकार का मीनार, क्रीम रंग की दीवारों, हरी ट्रिम और हरे रंग का गुंबद ...

मस्जिद ए कबीर मध्य जावा

मस्जिद परिसर 10 हेक्टेयर 25 एकड़ है। इस के तीन केंद्रीय इमारतें जावा, अरबी और ग्रीक तरज पर बनागई हैं। इस मस्जिद के समूह में मस्जिद, ग्रंथालय और एक आडिटोरियम शामिल हैं। इस मस्जिद का एक गुंबद और चार मीनार हैं। इसकी छत टैल्स से बनी है। इस मस्जिद का ...

मस्जिद ए नबवी

मस्जिद-ए-नबवी, जिसे अक्सर पैगंबर की मस्जिद कहा जाता है, सऊदी अरब के शहर मदीना में स्थित इस्लाम का दूसरा पवित्र स्थान है। मक्का में मस्जिद-ए-हरम मुसलमानों के लिए पवित्र स्थान है। जबकि बैतुल मुक़द्दस में मस्जिद-ए-अक्सा इस्लाम का तीसरा पवित्र स्थान है।

मिहराब

मिहराब एक मस्जिद की दीवार में एक अर्धचालक आला है जो कि क़िब्ला को इंगित करता है; अर्थात्, मक्का में काबा की दिशा और इसलिए प्रार्थना करते समय मुस्लिमों को इस की तरफ मुंह करना चाहिए। जिस दीवार में एक मिहराब प्रकट होता है उसको क़िब्ला दीवार" कहा जात ...

सना की महान मस्जिद

सना की महान मस्जिद सना, यमन में एक प्राचीन मस्जिद है, जो पुराने घुमदान पैलेस के पूर्व में स्थित है। यह सातवीं शताब्दी में बसा साना के पुराने शहर है जो आज यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है। यह कथित तौपर घमदान महल की सामग्री से बनाया गया था ...

सुल्तान अहमद मस्जिद

सुल्तान अहमद मस्जिद या नीली मस्जिद इस्तांबुल, तुर्की में स्थित एक मस्जिद है। उसे बाहरी दीवारों के नीले रंग के कारण नीली मस्जिद के रूप में जाना जाता है।

पंचेन लामा

पंचेन लामा दलाई लामा के बाद तिब्बत के दूसरे सबसे प्रभावशाली धर्म गुरु हैं। ये चीन सरकार द्वारा निर्वासित नहीं किगए हैं। इसलिए ये तिब्बत में ही रहते हैं।

आण्डाल

आण्डाल, दक्षिण भारत की सन्त महिला थीं। वे बारह आलवार सन्तों में से एक हैं। उन्हें दक्षिण की मीरा कहा जाता है। अंदाल का जन्म विक्रम सं. 770 में हुआ था। अपने समय की यह प्रसिद्ध आलवार संत थीं। इनकी भक्ति की तुलना राजस्थान की प्रख्यात कृष्णभक्त कवयित ...

चागांती कोटेस्वारा राव

चागांती कोटेस्वारा राव भारतीय वक्ता हैं जो सनातन धर्म पर अपने प्रवचनों के लिए जाने जाते हैं। वह पुराणों के ज्ञाता है। उनके प्रवचनों का व्यापक रूप से पालन किया जाता है और टेलीविजन चैनलों जैसे भक्ति टीवी और टीटीडी पर प्रसारित किया जाता है। पूरी दुन ...

त्रैलंग स्वामी

त्रैलंग स्वामी एक हिन्दू योगी थे, जो अपने आध्यात्मिक शक्तियों के लिये प्रसिद्ध हुए। ये वाराणसी में निवास करते थे। इनकी बंगाल में भी बड़ी मान्यता है, जहां ये अपनी यौगिक अएवं आध्यात्मिक शक्तियों एवं लंबी आयु के लिये प्रसिद्ध रहे हैं। कुछ ज्ञात तथ्य ...

नित्यानन्द स्वामी (परमहंस)

यह लेख नित्यानन्द स्वामी पर है, अन्य नित्यानन्द स्वामी लेखों के लिए देखें नित्यानन्द स्वामी नित्यानन्द स्वामी, स्वामीनारायण संप्रदाय के संत और स्वामीनारायण परमहंस थे।

परमहंस रामचंद्र दास

महंत परमहंस रामचंद्र दास राम मन्दिर आंदोलन के प्रमुख संत व श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष थे। वे सन् ४९ से रामजन्म-भूमि आंदोलन में सक्रिय हुए तथा १९७५ से उन्होने दिगम्बर अखाड़े के महंत का पद संभाला। उन्होने कहा था कि "मेरे जीवन की तीन ही अन्ति ...

बाबा लाल दयाल

बावा लाल दयाल {१३५५-१६५५} एक संत थे। बावा लाल दयाल जी का प्रमुख स्थान ध्यानपुर पंजाब में स्थित है जहा उनकी समाधी स्थल व् धाम है। शुक्ल पक्ष की द्वितीया को यहाँ विशेष उत्सव होता है।

भगवानबाबा

आबाजी तुबाजी सानप जो भगवानबाबा के नाम से प्रसिद्ध थे, उनका जनमः बीड जिल्हे में हुवा था। । महाराष्ट्र के वारकरी सम्प्रदाय के प्रसिद्ध सन्त थे।

भारतीकृष्ण तीर्थ

भारती कृष्णतीर्थ जी महाराज जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य थे। शास्त्रोक्त अष्टादश विद्याओं के ज्ञाता, अनेक भाषाओं के प्रकांड पंडित तथा दर्शन के अध्येता पुरी के शंकराचार्य भारती कृष्णतीर्थ जी महाराज ने वैदिक गणित की खोज कर समस्त विश्व को आश्चर्यचकित कर ...

आलवार सन्त

आलवार तमिल कवि एवं सन्त थे। इनका काल ६ठी से ९वीं शताब्दी के बीच रहा। उनके पदों का संग्रह दिव्य प्रबन्ध कहलाता है जो वेदों के तुल्य माना जाता है। आलवार सन्त भक्ति आन्दोलन के जन्मदाता माने जाते हैं। विष्णु या नारायण की उपासना करनेवाले भक्त आलवार कह ...

स्वामी इन्द्रवेश

स्वामी इन्द्रवेश सामाजिक कार्यकर्ता, आर्य समाज के नेता एवं सांसद थे। उन्होने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। आर्यसमाज में निश्चय ही उनसे अधिक विद्वान, मनीषी, वाक्चातुर्य में निपुण, साहित्य रचयिता, वेदभाष्यकार, शास्त्रार्थ महारथी, कुशल ...

स्वामी गोविंदानंद तीर्थ

स्वामी गोविंदानंद तीर्थ जी महाराज शक्तिपात परम्परा के सिद्ध गुरु हैं। स्वामीजी महान गुरु एवं लेखक स्वामी शिवोम् तीर्थ जी महाराज के शिष्य तथा योग श्री पीठ आश्रम, ऋषिकेश के संचालक हैं। भूतकाल में प्रिंसिपल रह चुके स्वामीजी ने अब तक लगभग आठ सौ लोगो ...

स्वामी चिदानन्द सरस्वती

स्वामी चिदानन्द सरस्वती एक हिन्दू आध्यात्मिक गुरू एवं सन्त हैं। वे मुनि की रेती स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष हैं। वे भारतीय संस्कृति शोध प्रतिष्ठान, ऋषिकेश तथा पिट्सबर्ग के हिन्दू-जैन मन्दिर के भी संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं। उनकी ...

स्वामी प्रणवानन्द

स्वामी प्रणवानन्द एक सन्त थे जिन्होने भारत सेवाश्रम संघ की स्थापना की। उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भी भाग लिया। वे बाबा गंभीरनाथ जी के शिष्य थे। सन् १९१७ में उन्होने भारत सेवाश्रम संघ की स्थापना की। उनके अनुयायी उन्हे भगवान शिव का अवत ...

स्वामी रामनरेशाचार्यजी महाराज

स्वामी रामनरेशाचार्य जी महाराज - स्वामीजी सगुण एवं निर्गुण रामभक्ति परंपरा और रामानंद सम्प्रदाय के मूल आचार्यपीठ-श्रीमठ, काशी के वर्तमान पीठाधीश्वर हैं। वर्ष १९८८ में उन्हें जगदगुरु रामानंदाचार्य के पद पर प्रतिष्ठित किया गया। इनका जन्म वसंत पंचमी ...

स्वामी रामानन्दाचार्य

स्वामी रामानंद को मध्यकालीन भक्ति आंदोलन का महान संत माना जाता है। उन्होंने रामभक्ति की धारा को समाज के निचले तबके तक पहुंचाया। वे पहले ऐसे आचार्य हुए जिन्होंने उत्तर भारत में भक्ति का प्रचार किया। उनके बारे में प्रचलित कहावत है कि - द्वविड़ भक्त ...

स्वामी विज्ञानानन्द (सामाजिक कार्यकर्ता)

स्वामी विज्ञानानन्द उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं। स्वामी विज्ञानानन्द जी का पूर्व नाम रामशंकर मौर्य है। उनका आस्रम गंगा नदी के तट पर भिटौरा नामक स्थान पर स्थित है। उन्होने स्थानीय स्तर पर गंगा नदी को ...

स्वामी विरजानन्द

स्वामी विरजानन्द, एक संस्कृत विद्वान, वैदिक गुरु और आर्य समाज संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती के गुरु थे। इनको मथुरा के अंधे गुरु के नाम से भी जाना जाता था।

स्वामी विष्णु तीर्थ

स्वामी विष्णु तीर्थ एक महान लेखक, संन्यासी एवं सिद्धयोग की शक्तिपात परम्परा के उच्च स्थान प्राप्त गुरु थे। उनका जन्म हिंदुस्तान के हरियाणा प्रदेश के झज्जर नामक स्थान पर हुआ था। स्वामीजी बचपन से ही अत्यन्त मेघावी थे। उन्होंने अपने चाचा के साथ रहकर ...

स्वामी शिवानन्द सरस्वती

स्वामी शिवानन्द सरस्वती वेदान्त के महान आचार्य और सनातन धर्म के विख्यात नेता थे। उनका जन्म तमिल नाडु में हुआ पर संन्यास के पश्चात उन्होंने जीवन ऋषिकेश में व्यतीत किया। स्वामी शिवानन्द का जन्म अप्यायार दीक्षित वंश में 8 सितम्वर 1887 को हुआ था। उन् ...

हरिदास ठाकुर

हरिदास ठाकुर महान वैष्णव सन्त थे। उन्होने हरे कृष्ण आन्दोलन के आरम्भिक प्रसार में महती भूमिका अदा की। रूप गोस्वामी तथा सनातन गोस्वामी के अतिरिक्त वे चैतन्य महाप्रभु के वे प्रमुख शिष्य थे।

तेत

तेत वियतनाम के पारम्परिक कालदर्शक के नववर्ष को कहते हैं। यह वियतनाम का सबसे बड़ा त्यौहार भी है। यह जनवरी या फ़रवरी के महीने में पड़ता है और वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करता है।

बॉन त्योहार

"ओबॉन" या "बॉन" एक जापानी बौद्ध रिवाज है जो पूर्वजों को आदर करता है। यह बौद्ध रिवाज विकसित होकर एक पारिवारिक छुट्टी हो गया है। इस दिन लोग अपने पैतृक परिवार के स्थानो जाकर वह अपने पैतृक कब्रों को स्वच्छ करते हैं। तब पैतृक आत्माओं शांति पहुँचाते है ...

लोसर

लोसर तिब्बती भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है - नया वर्ष । लोसर, तिब्बत, नेपाल और भुटान का सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध पर्व है। भारत के आसम और सिक्किम राज्यों में ये त्यौहार मनाया जाता है। लोसार तिब्बती बौद्ध धर्म में एक त्योहार है। स्थान परंपरा के आधापर ...

शब्दकोश

अनुवाद
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